कच्चे तेल ने बिगाड़ा सोने का गणित….क्या ₹1.50 लाख से नीचे आएगा Gold?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत सोमवार को 4300 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसल गई. स्पॉट गोल्ड करीब 4290.5 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया. कच्चे तेल की कीमत 102.62 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ने और अमेरिकी महंगाई की चिंता बढ़ने से फेडरल रिजर्व के ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद मजबूत हुई है. बाजार में बुधवार को 25 बेसिस पॉइंट की दर बढ़ोतरी की करीब 90 फीसदी संभावना मानी जा रही है.

सोने की कीमतों में सोमवार को गिरावट देखने को मिली. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और महंगाई की नई चिंता के बीच निवेशकों ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले फैसले पर नजरें टिका दी हैं. इसी दबाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 4300 डॉलर प्रति औंस के नीचे चला गया.
वहीं भारतीय बाजार में सोने की कीमत 151310 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जिसमें 1950 रुपये यानी 1.27 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. इससे पहले सोने में लगातार तीन हफ्तों तक गिरावट दर्ज की जा चुकी है. हालांकि, पिछले एक साल में सोने की कीमत अभी भी करीब 16.6 फीसदी ऊपर है. ऐसे में आइए जानते हैं गोल्ड की कीमत को कौन से गणित बिगाड़ सकते हैं और क्या 1.50 लाख रुपये से नीचे आएगा गोल्ड.
कच्चे तेल की तेजी ने सोने पर बढ़ाया दबाव
सोने में गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल को माना जा रहा है. सोमवार को क्रूड की कीमत 102.62 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. सऊदी अरब ने ड्रोन हमलों के बाद अपनी अहम ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को बंद कर दिया. इससे कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई. मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण सप्लाई और शिपिंग से जुड़े जोखिम पहले से बने हुए हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने की आशंका भी मजबूत हुई है. यही वजह है कि निवेशक अब फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को लेकर रुख पर ज्यादा सतर्क हो गए हैं.
Fed के फैसले से पहले बढ़ी ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद
फेडरल रिजर्व की बैठक इसी हफ्ते होने वाली है. बाजार अब इस बात पर नजर रख रहा है कि केंद्रीय बैंक महंगाई को देखते हुए ब्याज दरों पर क्या फैसला लेता है. रॉयटर्स के मुताबिक, बाजार में बुधवार को 25 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर बढ़ोतरी की करीब 90 फीसदी संभावना मानी जा रही है.
ब्याज दरें बढ़ने पर आम तौर पर सोने पर दबाव पड़ता है. इसकी वजह यह है कि सोना कोई ब्याज नहीं देता, जबकि ब्याज दर बढ़ने पर निवेशकों को ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों में पैसा लगाने का ज्यादा आकर्षण हो सकता है.
अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों ने भी बढ़ाई चिंता
अमेरिका के ताजा महंगाई आंकड़ों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है. अगस्त में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI 0.4 फीसदी बढ़ा, जबकि जुलाई में इसमें 0.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी. सालाना आधार पर अमेरिकी महंगाई दर 3.4 फीसदी रही. वहीं, फूड और एनर्जी को छोड़कर कोर CPI में अगस्त में 0.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.
महंगाई के इन आंकड़ों के बाद बाजार में यह चिंता बढ़ी है कि फेड को महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखना पड़ सकता है.
$4,600 के ऊपर जाने के बाद सोने में मुनाफावसूली
सोने में हाल की गिरावट के बावजूद लंबी अवधि का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है. पिछले कुछ हफ्तों में सोने की कीमत 4600 डॉलर प्रति औंस से ऊपर चली गई थी. इतनी तेज तेजी के बाद कुछ निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली भी देखने को मिल रही है. इसके अलावा अब निवेशक ब्याज दरों और महंगाई के अगले रुख का आकलन कर रहे हैं, जिससे सोने की कीमत पर दबाव बढ़ा है.
मिडिल ईस्ट में तनाव से भी बाजार परेशान
मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की उम्मीदों को भी झटका लगा है. ईरान और खाड़ी देशों के बीच होने वाली एक प्रस्तावित बैठक टल गई है. इससे क्षेत्र में कूटनीतिक समाधान की उम्मीद कमजोर हुई है. तनाव जारी रहने से कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं और इससे दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों के सामने महंगाई का जोखिम बढ़ सकता है.
आगे सोने की चाल किन चीजों पर निर्भर करेगी?
आने वाले दिनों में सोने की कीमत की दिशा तय करने में सबसे अहम भूमिका अमेरिकी फेड के फैसले, ब्याज दरों, अमेरिकी महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों और मिडिल ईस्ट के तनाव की रहेगी. अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और महंगाई का दबाव बढ़ता है, तो फेड के सख्त रुख की आशंका सोने पर दबाव बनाए रख सकती है. वहीं, मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग को सहारा भी मिल सकता है. इसलिए फिलहाल सोने में एक तरफ ब्याज दरों का दबाव है, तो दूसरी तरफ भू-राजनीतिक तनाव से इसे सपोर्ट मिल रहा है.
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