10% से ज्यादा गिर चुका Nifty 50, क्या थमेगी बिकवाली? जानें आगे बाजार का रुख
Nifty 50 में 2026 में अब तक करीब 10.50 फीसदी की गिरावट आई है. कच्चे तेल की महंगाई, अमेरिका-ईरान तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेड की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बाजार पर दबाव बना रही है. Reliance और HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में गिरावट ने भी इंडेक्स को कमजोर किया है.
Highlights
- 2026 में अब तक करीब 10.50 फीसदी नीचे.
- कच्चा तेल, फेड की दरें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक तनाव ने बिगाड़ खेल.
- Jio Platforms IPO, HDFC Bank में नए सीईओ की नियुक्ति, विदेशी निवेश और AI सेक्टर में सुस्ती बाजार में रिकवरी के ट्रिगर बन सकते हैं.
भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स Nifty 50 में 2026 में अब तक करीब 10.50 फीसदी की गिरावट आ चुकी है. बढ़ते कच्चे तेल के दाम, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने, अमेरिका-ईरान तनाव और ग्लोबल बाजार में जारी दबाव ने भारतीय शेयर बाजार की चाल बिगाड़ दी है. इस दौरान BSE सेंसेक्स में 12 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है, जबकि Bank Nifty करीब 5.20 फीसदी टूट चुका है.
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या अगले साढ़े तीन महीनों में Nifty 50 इस नुकसान की भरपाई कर पाएगा या फिर 2026 का अंत भी लाल निशान में होगा. अगर Nifty 50 इस साल निगेटिव रिटर्न के साथ बंद होता है, तो यह करीब एक दशक बाद ऐसा मौका होगा. इससे पहले 2015 में Nifty 50 में 3 फीसदी की गिरावट आई थी. वहीं 2011 में इंडेक्स करीब 23.80 फीसदी टूटा था. 2008 में वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान Nifty 50 में 51 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई थी.
आखिर Nifty 50 क्यों गिर रहा है?
बाजार की धारणा पर सबसे ज्यादा असर भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का पड़ा है. अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की चिंता बढ़ी है. वहीं Brent Crude के 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने से महंगाई, चालू खाते, कंपनियों के मार्जिन और रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका है.
इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और इस सप्ताह होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद ने भी उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ाया है. निवेशक फेड के फैसले से पहले सतर्क हैं, क्योंकि जुलाई की बैठक के मिनट्स में महंगाई को लेकर चिंता और जरूरत पड़ने पर आगे भी दरें बढ़ाने की संभावना का संकेत मिला था.
Reliance और HDFC Bank ने भी बढ़ाई Nifty की मुश्किल
Nifty 50 में गिरावट की एक बड़ी वजह इसके दो बड़े इंडेक्स हेवीवेट शेयर Reliance Industries और HDFC Bank भी हैं. 2026 में Reliance Industries का शेयर करीब 20 फीसदी और HDFC Bank करीब 30 फीसदी टूट चुका है. इन दोनों कंपनियों का Nifty 50 में बड़ा वजन है. ऐसे में इन शेयरों में तेज गिरावट का सीधा असर पूरे इंडेक्स पर पड़ा है.
हालांकि, अब दोनों शेयरों में सुधार की उम्मीद भी जताई जा रही है. Reliance Industries की Jio Platforms IPO लाने की योजना बाजार के लिए बड़ा ट्रिगर बन सकती है. इसके Dussehra के आसपास भारतीय प्राइमरी मार्केट में आने की उम्मीद है. इससे Reliance के शेयर में खरीदारी बढ़ सकती है.
वहीं HDFC Bank में सीईओ के पद से जुड़े घटनाक्रम पर बाजार की नजर है. नए सीईओ की नियुक्ति सितंबर 2026 के आखिरी तक होने की उम्मीद है. इसके बाद बैंक के शेयर में करीब 15 से 20 फीसदी तक की तेजी की संभावना जताई गई है. मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर Reliance और HDFC Bank में तेजी आती है, तो Nifty 50 के 24,500-24,600 के स्तर तक पहुंचने की संभावना बन सकती है.
विदेशी निवेश आए तो बाजार को मिल सकता है सहारा
रिपोर्ट के मुताबिक, Nifty 50 को बाकी नुकसान की भरपाई के लिए विदेशी निवेश की जरूरत होगी. FPI और FII के जरिए डॉलर का प्रवाह बढ़ने पर बाजार को सहारा मिल सकता है. ऊंचे कच्चे तेल के दामों के बीच सरकार की ओर से FCNR बॉन्ड लाने से भारत में डॉलर का प्रवाह बढ़ाने और रुपये की गिरावट को थामने में मदद मिलने की उम्मीद है.
बाजार के लिए स्थायी राहत तब मिलेगी जब Strait of Hormuz से जुड़े संकट में सुधार हो, रूसी तेल आयात को लेकर स्थिति बेहतर हो और अमेरिका-ईरान बातचीत में कोई बड़ी प्रगति हो.
AI में सुस्ती भी बन सकती है भारत के बाजार के लिए मौका
ग्लोबल स्तर पर AI में सुस्ती भी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है. अगर अमेरिका में नवंबर के मध्यावधि चुनाव के नतीजे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ जाते हैं, तो अमेरिकी बॉन्ड में मुनाफावसूली बढ़ सकती है. इससे उभरते बाजारों, जिसमें भारत भी शामिल है, में FII और FPI निवेश बढ़ने की संभावना बन सकती है. इसके अलावा अगर AI सेक्टर में सुस्ती और तेज होती है, तो अमेरिकी डॉलर का प्रवाह भी बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में Nifty 50 में तेज रिकवरी देखने को मिल सकती है.
2026 के आखिरी तक कहां पहुंच सकता है Nifty 50?
अगर AI में सुस्ती नवंबर के आखिरी तक जोर पकड़ती है, तो Nifty 50 साल के आखिरी तक करीब 25500 के स्तर पर पहुंच सकता है. वहीं अगर AI में सुस्ती नवंबर की शुरुआत में ही तेज हो जाती है, तो Nifty 50 नया हाई बना सकता है और 2026 के अंत तक 27000 या उससे ऊपर पहुंच सकता है.
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