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5 हफ्ते से बाजार बेहाल, अब मंगलवार को क्या होगा? इन 3 फैक्टर्स पर टिकी नजर

भारतीय शेयर बाजार लगातार पांचवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ है. बीते सप्ताह सेंसेक्स 2.27 फीसदी गिरकर 74,781.76 पर और निफ्टी 2.09 फीसदी टूटकर 23,398.10 पर बंद हुआ. अब मंगलवार को बाजार खुलने के बाद निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी.

मार्केट की चाल Image Credit: Getty image

Highlights

  • सेंसेक्स 2.27 फीसदी और निफ्टी 2.09 फीसदी नीचे बंद हुआ.
  • ब्रेंट क्रूड करीब 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जिससे महंगाई और आयात लागत को लेकर चिंता बढ़ी है.
  • 15-16 सितंबर की अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैठक बाजार के लिए बड़ा ट्रिगर है.

भारतीय शेयर बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है. घरेलू और ग्लोबल स्तर पर चल रही उथल-पुथल के बीच बाजार लगातार पांचवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिका में महंगाई को लेकर चिंता और दुनिया भर में बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी ने निवेशकों की परेशानी बढ़ा दी है. गणेश चतुर्थी के चलते सोमवार को भारतीय शेयर बाजार बंद रहा, लेकिन मंगलवार को कारोबार दोबारा शुरू होने पर इन ग्लोबल और घरेलू संकेतों का असर बाजार पर दिखाई दे सकता है.

बीते सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में करीब 2 फीसदी की गिरावट आई. ऐसे में अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बाजार इस दबाव से कैसे निकलता है और आने वाले दिनों में कौन से फैक्टर इसकी दिशा तय करते हैं.

बाजार में लगातार पांचवें सप्ताह गिरावट

बीते सप्ताह शेयर बाजार की शुरुआत ही कमजोर रही और पूरे कारोबारी सप्ताह के दौरान बेंचमार्क इंडेक्स दबाव में रहे. सप्ताह के अंत में सेंसेक्स 2.27 फीसदी की गिरावट के साथ 74,781.76 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 2.09 फीसदी टूटकर 23,398.10 के स्तर पर बंद हुआ.

बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली. यानी बाजार में गिरावट सिर्फ चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक स्तर पर निवेशकों ने बिकवाली की.

अब सोमवार को बाजार बंद रहने के बाद मंगलवार को दोबारा कारोबार शुरू होगा. ऐसे में निवेशकों की नजर खास तौर पर तीन बड़े फैक्टर पर रहेगी.

1. कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला. शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड करीब 3 फीसदी चढ़कर लगभग 108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया. कच्चे तेल में यह तेजी मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े ताजा तनाव के बीच आई है. निवेशकों को आशंका है कि क्षेत्र में तनाव बढ़ने से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई प्रभावित हो सकती है.

खाड़ी क्षेत्र में सऊदी अरब और ईरान की ओर से जहाजों पर हुए हमलों ने भी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ाई है. ऐसे में अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर भी पड़ सकता है. मंगलवार को बाजार खुलने पर निवेशक सबसे पहले कच्चे तेल की कीमतों और मिडिल ईस्ट से जुड़ी खबरों पर नजर रख सकते हैं.

2. Fed की बैठक पर टिकी निवेशकों की नजर

दूसरा बड़ा फैक्टर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक है. फेड की बैठक 15 और 16 सितंबर को होने वाली है. इस बैठक में ब्याज दरों को लेकर फैसला लिया जाएगा. ग्लोबल बाजार की नजर सिर्फ इस बात पर नहीं है कि फेड ब्याज दरों पर क्या फैसला करता है, बल्कि इस बात पर भी है कि फेड के अधिकारी महंगाई और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की ग्रोथ को लेकर आगे का क्या रुख अपनाते हैं.

अगर फेड की ओर से महंगाई को लेकर सख्त रुख देखने को मिलता है, तो ग्लोबल बाजारों में इसका असर पड़ सकता है. वहीं, ब्याज दरों को लेकर नरम संकेत मिलने पर बाजार को राहत मिल सकती है. इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी ग्लोबल कमोडिटी मार्केट की चिंता बढ़ाई है.

3. अब महंगाई के आंकड़े देंगे बाजार को अगला संकेत

ग्लोबल घटनाक्रम के साथ घरेलू आर्थिक आंकड़े भी बाजार के लिए काफी अहम रहने वाले हैं. आने वाले दिनों में थोक और खुदरा महंगाई के ताजा आंकड़े सामने आने वाले हैं.

इन आंकड़ों से यह संकेत मिलेगा कि बाहरी दबावों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति कैसी बनी हुई है. अगर महंगाई के आंकड़े उम्मीद के मुताबिक रहते हैं, तो बाजार को कुछ राहत मिल सकती है. वहीं, महंगाई में बढ़ोतरी निवेशकों की चिंता बढ़ा सकती है. इसके अलावा बेरोजगारी के आंकड़े और देश के व्यापार संतुलन से जुड़ी रिपोर्ट भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी. इन आंकड़ों से घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिति और बाहरी दबावों के असर को समझने में मदद मिलेगी.

मंगलवार को बाजार के लिए क्या मायने रखेगा?

मंगलवार को बाजार खुलने के बाद निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि लगातार पांच सप्ताह की गिरावट के बाद बाजार संभलता है या बिकवाली का दबाव आगे भी जारी रहता है. एक तरफ कच्चे तेल की कीमतों में करीब 108 डॉलर प्रति बैरल तक की तेजी चिंता बढ़ा रही है, तो दूसरी तरफ अमेरिकी फेड की बैठक और महंगाई को लेकर उसका रुख ग्लोबल बाजारों के लिए अहम है. इसके साथ ही घरेलू महंगाई, बेरोजगारी और व्यापार संतुलन के आंकड़े बाजार को आगे की दिशा का संकेत देंगे.

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ऐसे माहौल में मंगलवार के कारोबार में कच्चे तेल की कीमत, फेड की बैठक से जुड़े संकेत और घरेलू आर्थिक आंकड़े बाजार की चाल के लिए सबसे अहम फैक्टर रहेंगे.