भारत-अमेरिका ट्रेड डील में फंस गया पेंच, रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून से बढ़ी चिंता; वित्त मंत्रालय ने दी जानकारी
भारत-अमेरिका ट्रेड रिलेशंस को लेकर फाइनेंस मिनिस्ट्री ने अनिश्चितता जताई है. सितंबर की मंथली इकोनॉमिक रिव्यू में मिनिस्ट्री ने कहा कि US कांग्रेस से ग्राहम बिल पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ट्रेड रिलेशंस पर दबाव बढ़ा है. नए कानून के तहत रूस से क्रूड ऑयल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है.

India US Trade Deal: भारत और US के बीच ट्रेड रिलेशंस को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. फाइनेंस मिनिस्ट्री ने सितंबर की मंथली इकोनॉमिक रिव्यू में कहा है कि US कांग्रेस से ग्राहम बिल पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद भारत-अमेरिका ट्रेड रिलेशंस को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है. यह रिपोर्ट 1 अक्टूबर को जारी की गई है. फाइनेंस मिनिस्ट्री के मुताबिक, नए कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से क्रूड ऑयल खरीदते हैं. भारत के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की रिफाइनिंग और एनर्जी जरूरतों में रूसी क्रूड की भूमिका बनी हुई है.
ग्राहम बिल से क्यों बढ़ी चिंता
नए कानून का मकसद रूस और ईरान से ऑयल खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ाना है, ताकि मॉस्को और तेहरान की क्रूड ऑयल रेवेन्यूज को सीमित किया जा सके. फाइनेंस मिनिस्ट्री ने कहा है कि ग्राहम बिल के कांग्रेस से पास होने और प्रेसिडेंशियल असेंट मिलने के बाद US के साथ ट्रेड रिलेशंस को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है. इस कानून का असर सिर्फ भारत-अमेरिका ट्रेड पर ही नहीं, बल्कि ग्लोबल ट्रेड और कैपिटल फ्लोज पर भी पड़ सकता है.
फाइनेंस मिनिस्ट्री के मुताबिक, इस समय ग्लोबल कैपिटल फ्लोज कई अलग-अलग ताकतों से प्रभावित हो रहे हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI में इन्वेस्टमेंट बूम अभी धीमा पड़ने के स्पष्ट संकेत नहीं दिखा रहा है और इससे कैपिटल एक्सपेंडिचर तथा क्रॉस-बॉर्डर कैपिटल फ्लोज को सपोर्ट मिल रहा है.
इसके साथ ही डेवलप्ड इकॉनमीज अपने मैन्युफैक्चरिंग एंबिशंस को मजबूत करने के लिए इन्वेस्टमेंट आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं. ग्लोबल सप्लाई चेन्स के बढ़ते स्ट्रैटेजिक यूज के बीच देशों के बीच इन्वेस्टमेंट के लिए कॉम्पिटिशन भी बढ़ रहा है.
भारत के सामने कैपिटल फ्लोज आकर्षित करने की चुनौती
फाइनेंस मिनिस्ट्री ने कहा है कि इन परिस्थितियों में भारत समेत अन्य डेवलपिंग इकॉनमीज के सामने ग्लोबल कैपिटल फ्लोज आकर्षित करने की बड़ी चुनौती है. हालांकि, मिनिस्ट्री ने यह भी कहा है कि चालू फाइनेंशियल ईयर में भारत में नेट फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट यानी FDI इनफ्लोज पिछले साल के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं.
इसके बावजूद फाइनेंस मिनिस्ट्री ने इंडियन एसेट्स पर शॉर्ट-टर्म प्रेशर को लेकर सावधानी बरती है. इसमें करेंसी भी शामिल है. ग्लोबल जियोपॉलिटिकल और जियोइकोनॉमिक अनसर्टेनिटी के बीच मिनिस्ट्री ने कहा कि भारत अपने पोस्ट-कोविड ग्रोथ को लेकर संतुष्ट होकर नहीं बैठ सकता. ग्रोथ को हर क्वार्टर में बनाए रखने की जरूरत होगी.
पीयूष गोयल और जैमिसन ग्रीयर के बीच ट्रेड टॉक्स
फाइनेंस मिनिस्ट्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने मिलवॉकी में US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीयर से मुलाकात की. दोनों नेताओं की बैठक G20 ट्रेड मिनिस्टर्स’ मीटिंग के दौरान हुई. गोयल ने बैठक के बाद कहा कि उन्होंने US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ग्रीयर के साथ भारत-अमेरिका बाइलेट्रल ट्रेड एग्रीमेंट के तहत एक म्यूचुअली बेनिफिशियल इंटरिम एग्रीमेंट को जल्द पूरा करने की दिशा में प्रोडक्टिव डिस्कशन की.
दोनों नेताओं ने US की चेयरशिप में हो रही G20 डिलिबरेशंस पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया. भारत और US के बीच बाइलेट्रल ट्रेड एग्रीमेंट पर लंबे समय से बातचीत चल रही है. फरवरी 2026 में दोनों देशों ने एग्रीमेंट के फर्स्ट फेज के फ्रेमवर्क को फाइनलाइज किया था. हालांकि, US टैरिफ लैंडस्केप में बदलाव के बाद बातचीत आगे भी जारी रही है.
ट्रेड एग्रीमेंट पर क्यों अहम है मौजूदा बातचीत
भारत और US के बीच इंटरिम ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बातचीत ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के बीच ट्रेड पॉलिसी से जुड़े कई मुद्दे चर्चा में हैं. भारत अपने एक्सपोर्टर्स के लिए US मार्केट में कॉम्पिटिटिव एडवांटेज सुनिश्चित करने पर जोर देता रहा है. दूसरी ओर, US एडमिनिस्ट्रेशन ग्लोबल ट्रेड, इंडस्ट्रियल ओवरकैपेसिटी, सप्लाई चेन्स और टैरिफ पॉलिसी से जुड़े मुद्दों पर अपना रुख मजबूत कर रहा है.