iPhone मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर को मिलेगी रफ्तार! Tata Sons ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में डाले 1100 करोड़

टाटा संस ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में 1100 करोड़ का निवेश किया है. इस फंडिंग का मकसद सेमीकंडक्टर बिजनेस के कैपिटल एक्सपेंस को मजबूती देना है. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने वित्त वर्ष 2026 में 97 फीसदी की शानदार बढ़त के साथ 1.31 लाख करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया है.

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स Image Credit: Kabir Jhangiani/NurPhoto via Getty Images

कंपनी फाइलिंग से इस बात का पता चलता है कि टाटा संस ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स बिजनेस में 1100 करोड़ रुपए डाले हैं, जिससे ग्रुप को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में मदद मिली है. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स एपल आईफोन और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस में है. मनीकंट्रोल ने कंपनी फाइलिंग को रिव्यू किया है. फाइलिंग से पता चलता है कि मार्च में 1500 करोड़ रुपए के इन्वेस्टमेंट के बाद यह लेटेस्ट इन्वेस्टमेंट सितंबर में हुआ था. यह नया कैपिटल सेमीकंडक्टर बिजनेस में चल रहे कैपिटल एक्सपेंस को फंड करेगा.

यह इन्वेस्टमेंट नोएल टाटा के टाटा ट्रस्ट और टाटा संस बोर्ड के बीच एन चंद्रशेखरन की रीअपॉइंटमेंट और होल्डिंग कंपनी की लिस्टिंग को लेकर चल रही खींचतान के बीच हुआ है. Apple iPhone मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस, जो टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के अंदर है, ट्रस्ट्स के लिस्टिंग के ऑप्शन में है. 28 सितंबर के एक प्रपोजल में आईफोन मैन्युफैक्चरिंग सब्सिडियरी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स को टाटा संस में मर्ज करने का प्लान है.

ट्रस्ट ने तर्क दिया कि उनके ऑपरेटिंग रेवेन्यू और एसेट्स को जोड़ने से टाटा संस RBI की NBFC और कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी की परिभाषा से बाहर हो जाएगा, जिससे वह अनलिस्टेड रह सकेगी. यह नई फंडिंग ऐसे समय में हुई है जब टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स तेजी से बढ़ते स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस को सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, असेंबली और टेस्टिंग में इन्वेस्टमेंट के साथ जोड़ रहा है.

चार साल में बन गई चौथी सबसे बड़ी कंपनी

मनीकंट्रोल के मुताबिक, FY26 में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का रेवेन्यू 97 फीसदी बढ़कर 1.31 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो एक साल पहले 66,601 करोड़ रुपए था, जिससे यह अपनी स्थापना के चार साल के अंदर रेवेन्यू के हिसाब से चौथी सबसे बड़ी ग्रुप कंपनी बन गई.

बढ़ गया नेट लॉस

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने शेयरहोल्डर्स को अपने FY26 के संबोधन में कहा कि कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट लेवल ब्रेक-ईवन पर पहुंच गया है. हालांकि, इसका नेट लॉस एक साल पहले के 70 करोड़ रुपए से बढ़कर 1611 करोड़ रुपए हो गया है. कंपनी की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा संस ने FY26 में कंपनी में सीधे 3000 करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट किया, जिससे उस साल के आखिर में कंपनी का इन्वेस्टमेंट की कैरिंग वैल्यू 9,961 करोड़ रुपए हो गई है.

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने विस्ट्रॉन के भारतीय ऑपरेशन्स को खरीदकर और पेगाट्रॉन टेक्नोलॉजी इंडिया में कंट्रोलिंग हिस्सेदारी लेकर अपनी मैन्युफैक्चरिंग पहुंच बढ़ाई है. इसके सेमीकंडक्टर प्लान्स में गुजरात के धोलेरा में एक फैब्रिकेशन प्लांट शामिल है, जिसे ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर डेवलप किया जा रहा है.

इस प्रोजेक्ट में 91,000 करोड़ रुपए का घोषित इन्वेस्टमेंट आउटले और हर महीने 50,000 वेफर्स की प्लान्ड कैपेसिटी है. इसके चिप्स ऑटोमोटिव, कंप्यूटिंग, डेटा स्टोरेज, वायरलेस कम्युनिकेशन्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मार्केट्स में एप्लीकेशन्स के लिए हैं.

असम में 27 हजार करोड़ का निवेश

कंपनी ने असम के जगीरोड में 27,000 करोड़ रुपए की सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग फैसिलिटी की भी घोषणा की है. असेंबली और टेस्टिंग में फैब्रिकेशन प्लांट्स में बने चिप्स की पैकेजिंग करना और तैयार प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल करने से पहले उनकी जांच करना शामिल है. दोनों प्रोजेक्ट्स में मिलाकर 1.18 लाख करोड़ का घोषित इन्वेस्टमेंट खर्च है, जो चिप प्रोडक्शन के अलग-अलग स्टेज में फैला हुआ है.

एन चंद्रशेखरन ने इलेक्ट्रॉनिक्स बिजनेस को भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं में एक लंबे समय के इन्वेस्टमेंट के तौर पर पेश किया है. शेयरहोल्डर एड्रेस में उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर को बढ़ावा देने के लिए लगातार फंडिंग, इंटरनेशनल पार्टनरशिप और स्किल्ड इंजीनियरों के साथ-साथ सप्लायर्स और रिसर्च कोलेबोरेशन के डेवलपमेंट की जरूरत है.

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