नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की नियुक्ति को दी चुनौती, Tata Sons के सचिव को लिखी चिट्ठी; मांगा बैठक का वीडियो
Tata Group Controversy: नोएल टाटा ने सोमवार को टाटा संस के कंपनी सचिव सुप्रकाश मुखोपाध्याय को पत्र लिखकर चंद्रशेखरन की फरवरी 2027 के बाद भी नियुक्ति के प्रस्ताव को चुनौती दी. नोएल का तर्क है कि यह पुनर्नियुक्ति समय से पहले और बिना किसी पूर्व सूचना के की गई.

Tata Group Controversy: टाटा समूह के भीतर जारी कलह हर रोज एक नया रूप ले रही है. ग्रुप की कंपनियों पर कंट्रोल को लेकर जारी खींचतान लगातार बढ़ता जा रहा है. सोमवार को टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस के चेयरमैन के रूप में एन. चंद्रशेखरन की फिर से नियुक्ति के प्रस्ताव को चुनौती दी है. यह प्रस्ताव देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह की होल्डिंग कंपनी, टाटा संस की 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक में पास किया गया था.
बोर्ड के भीतर दरार
नोएल टाटा ने सोमवार को टाटा संस के कंपनी सचिव सुप्रकाश मुखोपाध्याय को पत्र लिखकर चंद्रशेखरन की फरवरी 2027 के बाद भी नियुक्ति के प्रस्ताव को चुनौती दी. इससे 100 साल से अधिक पुराने इस कारोबारी समूह के बोर्ड के भीतर की दरारें सबके सामने आ गई हैं.
न्यूज एजेंसी पीटीआई ने इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से बताया कि नोएल ने पांच साल के लिए की गई इस पुनर्नियुक्ति को अमान्य करार दिया है. उन्होंने इसके पीछे कई कारण बताए हैं, जिनमें बैठक के लिए जारी नोटिस और एजेंडा (कार्यसूची) शामिल हैं.
क्या है नोएल टाटा का तर्क?
सूत्रों के अनुसार, नोएल का तर्क है कि यह पुनर्नियुक्ति समय से पहले और बिना किसी पूर्व सूचना के की गई, जबकि यह बैठक के एजेंडे में शामिल ही नहीं थी. उन्होंने कहा कि बैठक का एजेंडा केवल नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमिटी (नामांकन और पारिश्रमिक समिति) की रिपोर्ट पर चर्चा तक सीमित था.
नोएल, जो टाटा ट्रस्ट्स के प्रमुख हैं (जिसके पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है), ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के लिए हुई वोटिंग के दौरान इसका विरोध किया था. टाटा संस के बोर्ड में टाटा ट्रस्ट्स के दूसरे डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने पुनर्नियुक्ति के पक्ष में बहुमत का साथ दिया.
डायरेक्टर्स ने चंद्रशेखरन के पक्ष में दिया था वोट
बैठक में चंद्रशेखरन की फिर से नियुक्ति के पक्ष में वोट देने वाले अन्य डायरेक्टर्स में अनीता जॉर्ज, हरीश मनवानी और सौरभ अग्रवाल शामिल थे.
नोएल का तर्क है कि टाटा संस के ‘आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन’ (कंपनी के नियम) के अनुसार, किसी भी प्रस्ताव को पारित करने के लिए टाटा ट्रस्ट्स के नामित डायरेक्टर्स की सहमति (पक्ष में वोट) जरूरी है. सूत्रों के मुताबिक, नोएल ने अपने पत्र में बोर्ड बैठक की बिना किसी काट-छांट वाली वीडियो रिकॉर्डिंग भी मांगी है.
टाटा संस के गवर्नेंस पर फोकस है विवाद
विवाद टाटा संस के गवर्नेंस पर केंद्रित है, जो ऑटोमोबाइल और स्टील से लेकर आईटी और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स तक के व्यवसायों में समूह की प्रमुख ऑपरेशनल कंपनियों को नियंत्रित करता है. टाटा ट्रस्ट और टाटा संस बोर्ड के बीच किसी भी निरंतर असहमति का समूह के नेतृत्व और होल्डिंग-कंपनी स्तर पर निर्णय लेने पर प्रभाव पड़ सकता है.