टाटा मोटर्स ने इवेको में हासिल की 89.42% हिस्सेदारी, अंतिम चरण में टेकओवर; मिलेगा ट्रक और बस का कारोबार
Tata Motors and Iveco: पेश किए गए ये शेयर इवेको की कुल कॉमन शेयर कैपिटल और इस प्रस्ताव के दायरे में आने वाले शेयरों का 87.81 फीसदी हिस्सा हैं. यह घटनाक्रम टाटा मोटर्स द्वारा इवेको के प्रस्तावित अधिग्रहण को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
Highlights
- टाटा मोटर्स के प्रस्तावित अधिग्रहण में इवेको का ट्रक और बस कारोबार शामिल है.
- शुरुआत में इस प्रस्ताव की कीमत 14.10 यूरो प्रति शेयर तय की गई थी.
- टाटा मोटर्स द्वारा इवेको के प्रस्तावित अधिग्रहण को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम.
Tata Motors and Iveco: टाटा मोटर्स को इवेको ग्रुप की शेयर कैपिटल के 87.81 फीसदी हिस्से के लिए अस्थायी मंजूरी मिल गई है. यह स्वीकृति कंपनी के 3.91 अरब यूरो (लगभग 42,561 करोड़ रुपये) के अधिग्रहण प्रस्ताव के तहत मिली है. इसके साथ ही, इतालवी कमर्शियल वाहन निर्माता कंपनी में टाटा मोटर्स की संभावित हिस्सेदारी बढ़कर 89.42 फीसदी हो गई है, जो इस सौदे के लिए जरूरी न्यूनतम सीमा को पूरा करती है.
27 अक्टूबर को एक रेगुलेटरी फाइलिंग में, टाटा मोटर्स ने बताया कि उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, TML CV होल्डिंग्स B.V. को मिले अस्थायी नतीजों के अनुसार, 26 अक्टूबर को स्वीकृति अवधि समाप्त होने तक इवेको के 238.16 मिलियन शेयर पेश किए गए हैं.
कितनी हो जाएगी टाटा मोटर्स की हिस्सेदारी?
पेश किए गए ये शेयर इवेको की कुल कॉमन शेयर कैपिटल और इस प्रस्ताव के दायरे में आने वाले शेयरों का 87.81 फीसदी हिस्सा हैं. इवेको के ट्रेजरी शेयरों (जो इसकी कुल शेयर पूंजी का लगभग 1.8% हैं) को शामिल करने पर, टाटा मोटर्स की सहायक कंपनी की संभावित हिस्सेदारी 89.42 फीसदी हो जाती है. ये अस्थायी नतीजे अभी पुष्टि के अधीन हैं. टाटा मोटर्स ने कहा कि समय-सीमा तक मिली स्वीकृतियों के आधार पर, इस प्रस्ताव के लिए जरूरी न्यूनतम सीमा की शर्त पूरी हो गई है.
ऑफर प्राइस
यह घटनाक्रम टाटा मोटर्स द्वारा इवेको के प्रस्तावित अधिग्रहण को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे पहले, इस महीने की शुरुआत में भारतीय वाहन निर्माता कंपनी ने अपने ऑफर प्राइस को 0.30 यूरो प्रति शेयर बढ़ाकर 14.40 यूरो करने का फैसला किया था.
शुरुआत में इस प्रस्ताव की कीमत 14.10 यूरो प्रति शेयर तय की गई थी. टाटा मोटर्स ने बताया था कि यह बढ़ोतरी डील की प्रक्रिया में हुई लगभग चार महीने की देरी को ध्यान में रखते हुए की गई है, और साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि ऑफर प्राइस में अब और कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. अस्थायी नतीजों के अनुसार, स्वीकृति अवधि के दौरान पेश किए गए शेयरों का संशोधित ऑफर प्राइस लगभग 3.43 अरब यूरो है.
कब होगी प्रस्ताव के नतीजों की घोषणा?
इस प्रस्ताव के अंतिम नतीजे 29 अक्टूबर को सेंट्रल यूरोपियन टाइम के अनुसार सुबह 7:29 बजे घोषित किए जाएंगे, जो भुगतान की तारीख से एक दिन पहले होगा. शुरुआती स्वीकृति अवधि के दौरान पेश किए गए शेयरों का भुगतान 30 अक्टूबर को किया जाना है, बशर्ते बाकी शर्तें पूरी हो जाएं.
शेयरधारकों के लिए अतिरिक्त मौका
इवेको (Iveco) के जिन शेयरधारकों ने शुरुआती स्वीकार्यता अवधि (Initial Acceptance Period) के दौरान अपने शेयर नहीं सौंपे थे. उन्हें इस ऑफर में शामिल होने का एक और मौका मिलेगा. प्रोविजन रिजल्ट की पुष्टि और बाकी शर्तों के पूरा होने पर, स्वीकार्यता अवधि 2 नवंबर से 6 नवंबर तक, यानी पांच ट्रेडिंग दिनों के लिए फिर से खुल जाएगी. जो शेयरधारक इस दौरान अपने शेयर सौंपेंगे, उन्हें 13 नवंबर को भुगतान कर दिया जाएगा.
यह अवधि 16 अक्टूबर को इवेको की असाधारण आम बैठक (EGM) में पारित एक प्रस्ताव के बाद फिर से खोला जा रहा है. इस प्रस्ताव के तहत, ऑफर के लिए न्यूनतम शेयरहोल्डिंग की सीमा को कंपनी की जारी और बकाया कॉमन शेयर पूंजी (पूरी तरह से डाइल्यूटेड आधार पर, ट्रेजरी शेयरों को छोड़कर) के 95% से घटाकर 80% कर दिया गया है.
अंतिम चरण में अधिग्रहण
टाटा मोटर्स के प्रस्तावित अधिग्रहण में इवेको (Iveco) का ट्रक और बस कारोबार शामिल है, लेकिन इसमें कंपनी का डिफेंस (रक्षा) कारोबार शामिल नहीं है, जिसे समूह से अलग किया जा रहा है. इस सौदे का उद्देश्य यूरोप और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में टाटा मोटर्स के कमर्शियल व्हीकल (वाणिज्यिक वाहन) कारोबार का विस्तार करना और साथ ही इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को व्यापक बनाना है.
इस अधिग्रहण का विरोध ‘पेट्रस एडवाइजर्स’ ने किया है, जो इवेको (Iveco) में 3.8% हिस्सेदारी रखने वाले एक निवेशक हैं. उन्होंने शेयरधारकों से अधिक कीमत की मांग करने का आग्रह किया था. निवेशक का तर्क था कि शुरुआती ऑफर में इवेको की कीमत, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजूद अन्य कमर्शियल वाहन कंपनियों की तुलना में कम आंकी गई थी. साथ ही, कंपनियों के विलय से मिलने वाले संभावित फायदों के बदले शेयरधारकों को उचित मुआवजा भी नहीं दिया गया था.
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