डॉलर के आगे फिर कमजोर पड़ा रुपया, RBI के फैसले के बाद क्या होगा?

RBI के रेपो रेट 5.50 फीसदी करने और नीति रुख को ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ में बदलने के बावजूद रुपया 96.78 प्रति डॉलर पर पांच महीने के निचले स्तर पर बंद हुआ. महंगा कच्चा तेल, मजबूत डॉलर और विदेशी बिकवाली ने दबाव बढ़ाया.

RBI ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया Image Credit:

भारतीय रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर पांच महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया. दिन के कारोबार के बाद रुपया 96.78 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ. इससे पहले मंगलवार को यह 96.43 रुपये प्रति डॉलर पर था. यानी एक दिन में रुपये में 35 पैसे की गिरावट दर्ज की गई. कारोबार के दौरान रुपया 96.83 के स्तर तक फिसल गया था और मई के रिकॉर्ड निचले स्तर 96.98 के करीब पहुंच गया.

RBI ने बढ़ाई रेपो रेट

रुपये में कमजोरी ऐसे समय आई है जब रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति में बड़ा बदलाव किया है. RBI ने रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया है. यह फरवरी 2023 के बाद पहली बार है जब केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर बढ़ाई है. इसके साथ ही RBI ने अपनी नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है.

कैलिब्रेटेड टाइटनिंग का मतलब है कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं है. अगर महंगाई और दूसरी आर्थिक परिस्थितियां जरूरत बताती हैं तो आगे दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है, लेकिन फैसला धीरे-धीरे और परिस्थितियों को देखकर लिया जाएगा.

RBI के सख्त रुख का रुपये पर असर क्यों नहीं?

आमतौर पर ब्याज दर बढ़ने से घरेलू मुद्रा को कुछ सपोर्ट मिल सकता है. लेकिन इस बार रुपये पर डॉलर की मजबूत मांग और वैश्विक अनिश्चितता का दबाव ज्यादा रहा. पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है.

RBI पिछले कुछ समय से रुपये को ज्यादा कमजोर होने से रोकने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप भी कर रहा है. इसके बावजूद डॉलर की मांग के कारण रुपया 97 के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब बना हुआ है.

आगे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया है कि निकट अवधि में ब्याज दरों में कटौती फिलहाल विकल्प नहीं है. आगे की नीति कार्रवाई महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी. इसका मतलब है कि बाजार में अब अगली चाल को लेकर दरों में बढ़ोतरी या कुछ समय तक यथास्थिति की संभावना पर नजर रहेगी.

महंगाई और ग्रोथ पर RBI का नया अनुमान

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1 फीसदी कर दिया है, जो पहले 6.7 फीसदी था. वहीं महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2 फीसदी कर दिया गया है. बढ़ती महंगाई, महंगे कच्चे तेल और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने अपना रुख सख्त किया है.

आने वाले दिनों में रुपये की दिशा मुख्य रूप से डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेश और वैश्विक बाजार के माहौल पर निर्भर करेगी. ऐसे में 97 रुपये प्रति डॉलर का स्तर बाजार के लिए अहम बना हुआ है.

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