RBI का बड़ा कदम, तेल कंपनियों को अब सीधे मिलेगी डॉलर की सप्लाई; रुपये पर क्या होगा असर?
RBI ने 12 अक्टूबर से IOC, HPCL और BPCL को रोजाना डॉलर की जरूरत पूरी करने के लिए विशेष व्यवस्था शुरू करने का ऐलान किया है. इसका मकसद खुले बाजार में डॉलर की मांग कम करने में मदद करना है. केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के नियम भी सख्त किए हैं और कुछ सौदों पर 20 फीसदी नकद जोखिम रिजर्व की शर्त रखी है.

RBI Dollar Window: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये पर दबाव के बीच सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर की जरूरत पूरी करने के लिए एक विशेष व्यवस्था शुरू करने का ऐलान किया है. यह सुविधा 12 अक्टूबर से लागू होगी और अगले आदेश तक जारी रहेगी. इसके तहत तीन सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) की हर दिन की डॉलर जरूरत पूरी की जाएगी.
RBI ने शनिवार, 10 अक्टूबर को बताया कि इस सुविधा के तहत केंद्रीय बैंक तय बैंकों के माध्यम से सरकारी तेल कंपनियों को डॉलर बेचेगा. हालांकि, RBI ने अभी यह नहीं बताया है कि इसके लिए किन बैंकों को चुना गया है, डॉलर की कीमत तय करने का तरीका क्या होगा और इस व्यवस्था के तहत कितने डॉलर की सप्लाई की जाएगी.
रुपये पर दबाव के बीच RBI का कदम क्यों अहम?
तेल कंपनियों को कच्चे तेल का आयात करने के लिए डॉलर में पेमेंट करना पड़ता है. इसके लिए उन्हें विदेशी मुद्रा बाजार से डॉलर खरीदने होते हैं. RBI की नई व्यवस्था के तहत इन कंपनियों को डॉलर की सप्लाई अलग माध्यम से मिलेगी. इससे खुले बाजार में उनकी डॉलर की मांग कम हो सकती है और रुपये पर पड़ने वाले दबाव को घटाने में मदद मिल सकती है.
यह कदम ऐसे समय आया है, जब रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब बना हुआ है. शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 96.78 पर बंद हुआ, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 96.79 पर था. RBI ने कहा कि उसने मौजूदा बाजार स्थितियों का आकलन करने के बाद यह फैसला लिया है.
विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के नियम भी सख्त
तेल कंपनियों के लिए विशेष डॉलर सुविधा के साथ RBI ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों से जुड़े नियम भी सख्त किए हैं. केंद्रीय बैंक के मुताबिक, इन कदमों का मकसद बाजार में अनुशासन मजबूत करना और कारोबार को व्यवस्थित बनाए रखना है. नए निर्देश जारी होने के बाद अधिकृत डीलर रुपये से जुड़े ऐसे डेरिवेटिव सौदों को दोबारा बुक करने की अनुमति नहीं दे सकेंगे, जिन्हें कैंसिल कर दिया गया है. हालांकि, मौजूदा नियमों के तहत सौदों की मैच्योरिटी पर उन्हें आगे बढ़ाया जा सकेगा.
इसके अलावा, बिना मूल लेनदेन या जोखिम के दस्तावेजी आधार को स्थापित किए हेजिंग करने के लिए तय सीमा को 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दिया गया है. यह बदलाव सभी अधिकृत डीलरों के स्तर पर लागू होगा. रुपये से जुड़े एक्सचेंज में कारोबार होने वाले मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के लिए भी संबंधित सीमा को मान्यता प्राप्त एक्सचेंजों पर घटाया गया है.
अब डीलरों को 20% विदेशी मुद्रा जोखिम रिजर्व रखना होगा
RBI ने फॉरेन करेंसी रिस्क से जुड़े रिजर्व की एक नई शर्त भी लागू की है. इसके तहत डीलरों को पात्र सौदों की कुल निर्धारित राशि के रुपये में मूल्य के 20% के बराबर नकद विदेशी मुद्रा जोखिम रिजर्व RBI के पास बनाए रखना होगा. यह नियम 2 मिलियन डॉलर से अधिक के रुपये से जुड़े उन सौदों पर लागू होगा, जिनका इस्तेमाल चालू खाते से जुड़े जोखिमों की हेजिंग के लिए किया जाता है. इसमें वे सौदे शामिल हैं, जिनमें ग्राहक रुपये देकर विदेशी मुद्रा खरीदते हैं. यह रिजर्व संबंधित सौदा खत्म होने तक बनाए रखना होगा.
आम लोगों और बाजार पर क्या असर हो सकता है?
तेल कंपनियों को अलग व्यवस्था से डॉलर मिलने पर खुले बाजार में उनकी डॉलर खरीद की जरूरत घट सकती है. इससे रुपये पर दबाव कम करने में मदद मिलने की संभावना है. हालांकि, रुपये की चाल पर कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की मांग और विदेशी निवेश के प्रवाह जैसे दूसरे कारकों का भी असर पड़ता है. इसलिए RBI के इस कदम से रुपये में कितनी मजबूती आएगी, यह अभी तय नहीं है. RBI ने डॉलर सप्लाई की कीमत तय करने की प्रक्रिया और कुल सप्लाई की मात्रा का खुलासा नहीं किया है. ऐसे में इस व्यवस्था का वास्तविक असर आने वाले कारोबारी सत्रों में देखने को मिलेगा.
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