फेस्टिव सीजन में आरबीआई का महंगाई शॉक! आखिर क्यों डरा रहे हैं ये आंकड़े

RBI Inflation 2026-27: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने FY27 के लिए अपने इन्फ्लेशन फोरकास्ट को 5.0 फीसदी से अपडेट कर 5.2 फीसदी कर दिया है. यह बदलाव इसलिए किया गया है क्योंकि रिटेल इन्फ्लेशन लगातार तीन महीनों से RBI के टारगेट से ज्यादा रहा है.

मजबूत GDP ग्रोथ के बावजूद बढ़ती महंगाई ने RBI की चिंता बढ़ाई है. Image Credit: Sudipta Das/NurPhoto via Getty Images)

भारतीय रिजर्व बैंक ने FY27 के लिए महंगाई के अनुमान को 5.0 फीसदी से बढ़ाकर 5.2 फीसदी कर दिया है, क्योंकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, खाने की चीजों की कीमतें और कमजोर रुपया कीमतों में स्थिरता के लिए मुश्किल पैदा कर रहा है. मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी का नया अंदाजा ऐसे समय में आया है जब रिटेल महंगाई RBI के 4 फीसदी के टारगेट से ऊपर चली गई है, जबकि पश्चिम एशिया में बढ़ोतरी ने फ्यूल और इंपोर्टेड महंगाई के लिए एक नया रिस्क पैदा कर दिया है.

महंगाई का अनुमान

इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने बुधवार को MPC के फैसले की घोषणा की, जिसमें महंगाई का अनुमान पॉलिसी रिव्यू के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले हिस्सों में से एक बन गया है. सेंट्रल बैंक ने FY28 की दूसरी तिमाही के लिए महंगाई 4.9 फीसदी, दिसंबर तिमाही के लिए 6 फीसदी,Q4 के लिए 5.7 फीसदी और जून तिमाही के लिए 5.6 फीसदी रहने का भी अनुमान लगाया है, जिसमें रिस्क बराबर बैलेंस्ड है.

संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि कीमतों पर दबाव का बढ़ना RBI के डिफ्यूजन इंडेक्स में दिख रहा था. 4 फीसदी से ज्यादा महंगाई वाली चीजों का वेटेड शेयर अगस्त में बढ़कर लगभग 37 फीसदी हो गया, उन्होंने कहा कि शॉर्ट-टर्म महंगाई का अनुमान कई वजहों से सप्लाई साइड पर दबाव बना रहने की ओर इशारा करता है, जिसमें मॉनसून की कमी, एल नीनो की स्थिति और इंटरनेशनल तेल की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव शामिल है.

RBI के अगस्त के अनुमान में FY27 CPI महंगाई 5.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था, जबकि पिछले रिव्यू में यह अनुमान 4.6 फीसदी था. सेंट्रल बैंक ने पहली तिमाही में महंगाई 4.2 फीसदी, दूसरी में 5.1 फीसदी, तीसरी में 5.9 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.4 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था.

भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को भी 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया है, जो फरवरी 2023 के बाद पहली बार रेट में बढ़ोतरी है. यह कदम सेंट्रल बैंक के नजरिए में बदलाव का संकेत देता है क्योंकि कच्चे तेल और खाने की चीजों की कीमतों से महंगाई का खतरा बढ़ गया है. RBI ने 2025 में रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी, इससे पहले कि इसे लगातार चार रिव्यू में 5.25 फीसदी पर बिना किसी बदलाव के रखा जाए.

RBI ने क्यों बदला महंगाई का नजरिया?

भारतीय रिजर्व बैंक के 2025 में रेट में कटौती शुरू करने के बाद से महंगाई का नजरिया तेजी से बदला है. अगस्त में रिटेल महंगाई बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई, जो लगातार तीसरे महीने सेंट्रल बैंक के 4 फीसदी टारगेट से ऊपर रही. खाने-पीने की चीजों और एनर्जी की कीमतें दबाव के मुख्य सोर्स के तौर पर सामने आई हैं, जबकि इकोनॉमिस्ट ने भी ज्यादा इनपुट कॉस्ट से बड़े पैमाने पर महंगाई बढ़ने की संभावना जताई है.

कच्चा तेल सबसे बड़ा नया रिस्क बन गया है, पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं. भारत जो अपनी ज्यादातर कच्चे तेल की जरूरत का इंपोर्ट करता है, उसके लिए इंटरनेशनल कीमतों में लंबे समय तक बढ़ोतरी ट्रांसपोर्टेशन, फ्यूल और प्रोडक्शन कॉस्ट को बढ़ा सकती है और आखिरकार कंज्यूमर कीमतों पर असर डाल सकती है.

इस साल रुपया भी लगभग 6 फीसदी कमजोर हुआ है. कमजोर करेंसी इम्पोर्टेड कमोडिटीज़, जिसमें कच्चा तेल भी शामिल है, इसे रुपए के हिसाब से ज्यादा महंगा बनाती है और महंगाई का दबाव बढ़ा सकती है. मानसून पर इसके संभावित असर के कारण एल नीनो भी RBI के महंगाई के रिस्क को बढ़ाता है. एल नीनो आमतौर पर भारत में कमजोर या असमान बारिश से जुड़ा होता है, जिससे फसल उत्पादन और खाने की चीजों की सप्लाई पर असर पड़ सकता है. कमजोर फसल से सब्ज़ियों, अनाज और दूसरे खेती के प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे खाने की चीजों की महंगाई बढ़ सकती है.

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