जून की 7.8% GDP ग्रोथ ने बदला RBI का नजरिया, मल्होत्रा ​​एंड कंपनी ने FY27 के लिए बढ़ाकर 7.1% किया विकास दर का अनुमान

इस हफ्ते की शुरुआत में वर्ल्ड बैंक ने भारत के लिए FY27 की ग्रोथ का अनुमान 6.6 फीसदी से बढ़ाकर 7.1 फीसदी किया था. पहली तिमाही के मजबूत आंकड़ों ने बातचीत का रुख बदल दिया है. हालांकि जुलाई और अगस्त में कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर थोड़े कमजोर हुए हैं.

रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा Image Credit: Money9live

Highlights

  • जून के तिमाही के आंकड़े ने रिजर्व बैंक के नजरिए में बदलाव लाया है.
  • यह अपग्रेड उम्मीद से बेहतर पहली तिमाही के नतीजों के बाद किया गया है.
  • मॉनसून की अनियमितता ने खाने-पीने की चीजों की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बुधवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर (GDP) का अनुमान 6.7 फीसदी से 40 बेसिस पॉइंट (bps) बढ़ाकर 7.1 फीसदी कर दिया. बैंक ने घरेलू गतिविधियों में मजबूती और निवेश व खपत में तेजी का हवाला दिया, जबकि ग्लोबल ट्रेड में अनिश्चितता, जियो-पॉलिटिकल तनाव, कमोडिटी की ऊंची कीमतें और मौसम से जुड़े जोखिम विकास की राह में चुनौतियां पैदा कर रहे हैं. लेकिन जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में बड़ी बढ़ोतरी से संकेत मिल रहा है कि जून के तिमाही के आंकड़े ने रिजर्व बैंक के नजरिए में बदलाव लाया है.

रेपो रेट में इजाफा

मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने बदलते मैक्रोइकोनॉमिक और फाइनेंशियल हालात, डेवलपमेंट और आउटलुक के डिटेल्ड असेसमेंट के बाद पॉलिसी रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.5% कर दिया.

RBI के नजरिए में बड़ा बदलाव

GDP ग्रोथ के अनुमान में यह बढ़ोतरी अगस्त की पॉलिसी के बाद से अर्थव्यवस्था के बारे में RBI के नजरिए में एक और बदलाव को दिखाती है. तब सेंट्रल बैंक ने FY27 के लिए ग्रोथ का अनुमान 10 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 6.6% से 6.7% कर दिया था.

अगस्त में केंद्रीय बैंक ने FY27 की पहली तिमाही में ग्रोथ 7 फीसदी, दूसरी में 6.4 फीसदी, तीसरी में 6.5 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था.

जून तिमाही में ग्रोथ के बेहतर आंकड़े

हालांकि, इसके बाद आए आंकड़ों में जून तिमाही में अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर 7.8% की ग्रोथ दिखाई है, जिससे ग्लोबल फोरकास्टर्स ने अपने अनुमानों को बेहतर किया है. RBI ने अब दूसरी तिमाही में 7.2 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.9 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.8 फीसदी ग्रोथ का अनुमान लगाया है, जबकि FY28 की पहली तिमाही में रियल GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है.

महंगाई पर काबू पाने की कोशिश

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि पूरे साल के ग्रोथ अनुमान में 40 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी ने बड़ी मुश्किलों के बावजूद आर्थिक गतिविधियों की मजबूती को और दिखाया है. छह सदस्यों वाले पैनल ने अपनी पॉलिसी का रुख भी न्यूट्रल से बदलकर सोच-समझकर सख्ती करने का फैसला किया, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ने पर महंगाई को काबू में रखने पर अधिक ध्यान देने का संकेत मिला.

ग्रोथ आउटलुक में बड़ी बढ़ोतरी

इस हफ्ते की शुरुआत में वर्ल्ड बैंक ने भारत के लिए FY27 की ग्रोथ का अनुमान 6.6 फीसदी से बढ़ाकर 7.1 फीसदी किया था. यह ग्लोबल फोरकास्टर्स की ओर से किए गए कई अपग्रेड्स में से एक है. बैंक ने कहा कि मजबूत घरेलू खपत ने अर्थव्यवस्था को एनर्जी की बढ़ती कीमतों के झटके को झेलने में मदद की है. हालांकि तेल की ऊंची कीमतें और अल-नीनो का जोखिम अभी भी ग्रोथ के लिए मुख्य खतरा बनी हुई हैं.

यह अपग्रेड उम्मीद से बेहतर पहली तिमाही के नतीजों के बाद किया गया है. इन नतीजों ने बड़े फोरकास्टर्स को यह फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था साल के बाकी समय में कितनी तेजी से आगे बढ़ेगी. OECD अब ग्रोथ रेट 7.1% रहने का अनुमान लगा रहा है, जबकि S&P ग्लोबल रेटिंग्स, एशियन डेवलपमेंट बैंक और मूडीज को इसके लगभग 7% रहने की उम्मीद है. फिच का अनुमान थोड़ा कम, यानी 6.9 फीसदी है.

7.8% GDP ग्रोथ ने बदला नजरिया

जून तिमाही में 7.8% की ग्रोथ से पॉलिसी बनाने वालों का भरोसा बढ़ा कि घरेलू मांग उम्मीद से बेहतर बनी हुई है. अगस्त की पॉलिसी में सेंट्रल बैंक ने पहले ही कहा था कि आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं, क्योंकि खपत, सर्विस सेक्टर, इन्वेस्टमेंट और सरकारी खर्च अच्छे स्तर पर थे. लेकिन उसने यह भी चेतावनी दी थी कि ग्लोबल ट्रेड में अनिश्चितता, वेस्ट एशिया में टकराव और मौसम की मार ग्रोथ पर असर डाल सकती है.

बदला बातचीत का रुख

पहली तिमाही के मजबूत आंकड़ों ने बातचीत का रुख बदल दिया है. हालांकि जुलाई और अगस्त में कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर थोड़े कमजोर हुए हैं, लेकिन ग्रोथ की रफ्तार कुल मिलाकर मजबूत बनी हुई है. इस मजबूती ने अर्थशास्त्रियों का भरोसा भी बढ़ाया है कि अर्थव्यवस्था कुछ हद तक मॉनेटरी टाइटनिंग (ब्याज दरें बढ़ाने जैसे कदम) को झेल सकती है.

महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी

यह बदलाव फरवरी 2023 के बाद ब्याज दरों में पहली बढ़ोतरी का संकेत है, जब रेपो रेट को 6.50 फीसदी तक बढ़ाया गया था. यह लंबे समय के ठहराव के बाद RBI के टाइटनिंग की ओर लौटने का संकेत भी होगा. महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ने के साथ ही ब्याज दरें बढ़ाने की बात और मजबूत हुई है.

कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है, मॉनसून की अनियमितता ने खाने-पीने की चीजों की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है, और US फेडरल रिजर्व की हालिया बढ़ोतरी ने दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच ब्याज दरों के अंतर को कम कर दिया है.

सख्त साइकल की शुरुआत के संकेत

इन सभी दबावों के कारण RBI के लिए उन चीजों को नजरअंदाज करना मुश्किल हो रहा है जिन्हें पहले अस्थायी सप्लाई शॉक माना जा सकता था. यह बदलाव सिर्फ एक बार का कदम न होकर, लंबे समय तक चलने वाले सख्त साइकल की शुरुआत भी हो सकता है.

गोल्डमैन सैक्स ने ब्याज दरें बढ़ाने के अपने अनुमान को पहले कर दिया है. अब उसे उम्मीद है कि दिसंबर 2026 और फरवरी 2027 में 25-बेसिस-पॉइंट की बढ़ोतरी होगी, जबकि पहले उसे इस साइकल के अक्टूबर में शुरू होने की उम्मीद थी.

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