RBI का बड़ा कदम, 50000 करोड़ रुपये की सरकारी सिक्योरिटीज बेची, बैंकिंग सिस्टम में घटेगी नकदी

RBI ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए OMO के तहत 50000 करोड़ रुपये की सरकारी सिक्योरिटीज बेचने के लिए बिडिंग स्वीकार की हैं. यह 1 लाख करोड़ रुपये की OMO बिक्री योजना की पहली किस्त है. 16 सितंबर तक बैंकिंग सिस्टम में करीब 7.38 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी थी.

RBI ने OMO के तहत 50000 करोड़ रुपये की सरकारी सिक्योरिटीज बेची. Image Credit:

भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. RBI ने गुरुवार को ओपन मार्केट ऑपरेशन के तहत 50000 करोड़ रुपये की सरकारी सिक्योरिटीज बेचने के लिए बिडिंग स्वीकार की हैं. यह बिक्री 1 लाख करोड़ रुपये के OMO प्लान की पहली किस्त है. बैंकिंग सिस्टम में 16 सितंबर तक करीब 7.38 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी थी. RBI का यह कदम सिस्टम से अतिरिक्त रुपये निकालने के लिए उठाया गया है. बाकी 50000 करोड़ रुपये की बिक्री दो और चरणों में होगी. इनकी तारीख 21 सितंबर और 28 सितंबर तय की गई है.

RBI ने 50000 करोड़ रुपये की सिक्योरिटीज बेची

RBI ने सरकारी सिक्योरिटीज की बिक्री के तहत कुल 50000 करोड़ रुपये की बिडिंग स्वीकार की हैं. इसमें अलग-अलग अवधि वाली सरकारी सिक्योरिटीज शामिल हैं. 2029 में मैच्योर होने वाली 7.59 फीसदी सरकारी सिक्योरिटी के लिए 7005 करोड़ रुपये स्वीकार किए गए. इसकी कट ऑफ यील्ड 6.6007 फीसदी रही. 6.79 फीसदी वाली 2029 सिक्योरिटी के लिए 7255 करोड़ रुपये की बोली स्वीकार हुई. इसकी यील्ड 6.7023 फीसदी रही.

2030 और 2031 की सिक्योरिटीज भी शामिल

RBI ने 7.61 फीसदी वाली 2030 की सरकारी सिक्योरिटी के लिए 1005 करोड़ रुपये स्वीकार किए. इसकी कट ऑफ यील्ड 6.8191 फीसदी रही. वहीं 5.77 फीसदी वाली 2030 की सिक्योरिटी के लिए 12645 करोड़ रुपये की बिड स्वीकार की गई. इसकी यील्ड 6.8589 फीसदी रही. इसके अलावा 6.68 फीसदी वाली 2031 की सिक्योरिटी के लिए 3250 करोड़ रुपये स्वीकार किए गए. इसकी कट ऑफ यील्ड 6.9080 फीसदी रही.

2032 वाली सिक्योरिटी की सबसे ज्यादा बिक्री

RBI ने 8.28 फीसदी वाली 2032 में मैच्योर होने वाली सरकारी सिक्योरिटी के लिए सबसे ज्यादा बोली स्वीकार की. इस सिक्योरिटी के लिए 18840 करोड़ रुपये की बोली स्वीकार हुई. इसकी कट ऑफ यील्ड 7.0090 फीसदी रही. इससे पता चलता है कि OMO बिक्री में लंबी अवधि वाली सरकारी सिक्योरिटी की भी बड़ी हिस्सेदारी रही. सभी सिक्योरिटीज को मिलाकर RBI ने कुल 50000 करोड़ रुपये की बिक्री की है.

OMO से बैंकिंग सिस्टम से कैसे निकलेगी नकदी

ओपन मार्केट ऑपरेशन यानी OMO के तहत जब RBI सरकारी सिक्योरिटीज बेचता है तो बैंक और दूसरे निवेशक इन्हें खरीदने के लिए RBI को पैसा देते हैं. इससे बैंकिंग सिस्टम में मौजूद रुपये की मात्रा कम हो जाती है. मौजूदा समय में बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी काफी ज्यादा है. 16 सितंबर तक यह करीब 7.38 लाख करोड़ रुपये थी. ऐसे में RBI OMO के जरिए इस अतिरिक्त नकदी को सिस्टम से निकाल रहा है.

बाकी 50000 करोड़ रुपये की बिक्री कब होगी

RBI ने कुल 1 लाख करोड़ रुपये की OMO बिक्री का ऐलान किया है. इसे तीन चरणों में पूरा किया जाना है. पहले चरण में 50000 करोड़ रुपये की सरकारी सिक्योरिटीज की बिक्री हो चुकी है. अब बाकी 50000 करोड़ रुपये की बिक्री दो बराबर चरणों में होगी. 25000 करोड़ रुपये की अगली बिक्री 21 सितंबर को होगी. इसके बाद 25000 करोड़ रुपये की बिक्री 28 सितंबर को की जाएगी.

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बैंकिंग सिस्टम में नकदी क्यों बढ़ी

बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी बढ़ने की एक बड़ी वजह FCNR B जमा में बढ़ोतरी रही. बैंकों ने विदेशी मुद्रा में बड़ी मात्रा में जमा जुटाई. इससे विदेश से पैसा भारतीय सिस्टम में आया. इसके बाद RBI के साथ हुए स्वैप से बैंकों को रुपये की नकदी मिली. इसके अलावा महीने के अंत में सरकार की ओर से वेतन और पेंशन जैसे भुगतान भी बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ाने का काम करते हैं.