क्या होता है VRRR ऑक्शन, जिसके जरिए RBI ने बैंकों से खींचे 3.93 लाख करोड़ रुपये; क्या आप पर भी होगा असर
RBI ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए VRRR ऑक्शन के जरिए 3.93 लाख करोड़ रुपये खींचे हैं. केंद्रीय बैंक ने 5 लाख करोड़ रुपये की नीलामी रखी थी, जिसके मुकाबले 3.93 लाख करोड़ रुपये की बीडिंग मिलीं. सभी बिडिंग 5.24 फीसदी की कट ऑफ और औसत दर पर स्वीकार की गईं.

बैंकिंग सिस्टम में मौजूद भारी अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए RBI ने बड़ा कदम उठाया है. भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को VRRR ऑक्शन के जरिए 3.93 लाख करोड़ रुपये की नकदी सिस्टम से बाहर खींची है. RBI ने इस नीलामी के लिए 5 लाख करोड़ रुपये की रकम तय की थी. बैंकों से कुल 3.93 लाख करोड़ रुपये की बिडिंग मिलीं और RBI ने सभी बिड स्वीकार कर ली. नीलामी में कट ऑफ और औसत दर 5.24 फीसदी रही. RBI पिछले एक महीने से अतिरिक्त नकदी को कंट्रोल करने के लिए ऐसे कदम उठा रहा है.
10.73 लाख करोड़ रुपये
11 सितंबर तक बैंकिंग सिस्टम में करीब 10.73 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी मौजूद थी. इतनी ज्यादा नकदी से बाजार में छोटी अवधि की ब्याज दरों पर दबाव बन सकता है. RBI का मकसद इस अतिरिक्त नकदी को कम करना है. इसके लिए केंद्रीय बैंक लगातार VRRR ऑक्शन कर रहा है. इस प्रक्रिया से ओवरनाइट मनी मार्केट की दरों को रेपो रेट के आसपास रखने में मदद मिलती है. इससे बैंकिंग सिस्टम में नकदी का बैलेंस बनाए रखने में भी मदद मिलती है.
VRRR ऑक्शन में क्या हुआ
RBI ने मंगलवार को 5 लाख करोड़ रुपये की VRRR ऑक्शन की घोषणा की थी. इसके मुकाबले बैंकों से 3.93 लाख करोड़ रुपये की बिडिंग मिलीं. RBI ने मिली पूरी रकम की बिडिंग स्वीकार कर ली. इन बोलियों की कट ऑफ रेट और वेटेज एवरेज रेट 5.24 फीसदी रही. VRRR के जरिए RBI बैंकों की अतिरिक्त नकदी को कुछ समय के लिए अपने पास रखता है. इससे सिस्टम में उपलब्ध नकदी घटती है और छोटी अवधि की ब्याज दरों को कंट्रोल करने में मदद मिलती है.
RBI ने OMO सेल्स का भी किया ऐलान
अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए RBI ने पिछले सप्ताह ओपन मार्केट ऑपरेशन यानी OMO सेल्स का भी ऐलान किया था. इसके तहत केंद्रीय बैंक 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी सिक्योरिटीज बेचेगा. यह बिक्री तीन चरणों में होगी. पहला चरण 17 सितंबर को होगा जिसमें 50000 करोड़ रुपये की सिक्योरिटीज बेची जाएंगी. इसके बाद 21 सितंबर और 28 सितंबर को 25000 करोड़ रुपये की सिक्योरिटीज की बिक्री होगी. इससे भी बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त नकदी कम होगी.
बैंकिंग सिस्टम में नकदी क्यों बढ़ी
बैंकों की तरफ से FCNR B डिपॉजिट में भारी रकम जुटाने से बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढने लगी. इन जमा के जरिए विदेशी मुद्रा सिस्टम में आई. इसके बाद RBI के साथ किए गए स्वैप से बैंकों को रुपये की नकदी मिली. इसके अलावा महीने के अंत में सरकार की तरफ से खर्च भी बढ़ा. इसमें कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन के पेमेंट शामिल रहे. इन वजहों से बैंकिंग सिस्टम में नकदी की उपलब्धता काफी ज्यादा हो गई.
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RBI के कदम का क्या असर होगा
RBI की ओर से VRRR ऑक्शन और OMO सेल्स जैसे कदम उठाने का मकसद सिस्टम में नकदी का बैलेंस बनाए रखना है. VRRR ऑक्शन के जरिए बैंक अपनी अतिरिक्त रकम कुछ समय के लिए RBI के पास रखते हैं. वहीं OMO सेल्स में RBI सरकारी सिक्योरिटीज बेचकर सिस्टम से नकदी बाहर करता है. इससे ओवरनाइट मनी मार्केट की दरों को रेपो रेट के करीब रखने में मदद मिलती है.