Silver Vs Gold: सोने के मुकाबले चांदी क्यों टूटी ज्यादा? 5 साल में दिया 167% रिटर्न, अब आगे क्या होगा?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस साल अब तक चांदी 16.53% और सोना 3.14% गिरा है. हालांकि, 5 साल में चांदी ने 167.71% और सोने ने 138.77% रिटर्न दिया. औद्योगिक मांग में कमजोरी, मजबूत डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड चांदी पर दबाव डाल रहे हैं. जे.पी. मॉर्गन ने चांदी का सालाना औसत भाव अनुमान 84 डॉलर से घटाकर 70 डॉलर किया है.

सोना और चांदी, दोनों की कीमतों पर पिछले कुछ महीनों से दबाव बना हुआ है. लेकिन गिरावट के मामले में चांदी को सोने के मुकाबले ज्यादा नुकसान हुआ है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस साल अब तक चांदी करीब 16 फीसदी तक टूट चुकी है, जबकि सोने में करीब 3 फीसदी तक की गिरावट आई है. हालांकि, लंबी अवधि के रिटर्न पर नजर डालें तो तस्वीर अलग दिखाई देती है. पिछले 5 साल में चांदी ने 167.71 फीसदी तक रिटर्न दिया है, जबकि सोने का रिटर्न 138.77 फीसदी रहा है. ऐसे में सवाल है कि चांदी में सोने के मुकाबले ज्यादा गिरावट क्यों आई और क्या आगे इसमें फिर तेजी लौट सकती है?
Silver vs Gold: किसने कितना रिटर्न दिया?
9 अक्टूबर तक के ट्रेडिंगव्यू के आंकड़ों के मुताबिक, डॉलर में मिले रिटर्न के आधार पर छोटी अवधि में सोने का प्रदर्शन चांदी से बेहतर रहा है. वहीं, एक साल और उससे ज्यादा की अवधि में चांदी आगे रही है.
| अवधि | चांदी का रिटर्न | सोने का रिटर्न | बेहतर प्रदर्शन |
|---|---|---|---|
| 1 महीना | -8.14% | -3.83% | सोना |
| 6 महीने | -20.14% | -12.19% | सोना |
| इस साल अब तक | -16.53% | -3.14% | सोना |
| 1 साल | 23.80% | 3.81% | चांदी |
| 5 साल | 167.71% | 138.77% | चांदी |
| 10 साल | 249.72% | 233.98% | चांदी |
इन आंकड़ों से साफ है कि हालिया गिरावट के दौरान सोने ने बेहतर प्रदर्शन किया है. लेकिन एक साल, 5 साल और 10 साल के रिटर्न में चांदी आगे रही है. यानी चांदी में तेजी के दौरान ज्यादा कमाई की संभावना रहती है, लेकिन गिरावट आने पर इसमें सोने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव भी देखने को मिलता है.
साल 2000 से अब तक किसने ज्यादा कमाई कराई?
लंबी अवधि के आंकड़ों में तस्वीर थोड़ी बदल जाती है. सिल्वर इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2000 से सितंबर 2026 तक चांदी ने 1,131% रिटर्न दिया, जबकि सोने का रिटर्न 1,447% रहा. इस अवधि में चांदी की सालाना औसत चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) 9.9% और सोने की 10.8% रही. इसका मतलब है कि 5 और 10 साल की अवधि में चांदी ने सोने को पीछे छोड़ा, लेकिन साल 2000 से सितंबर 2026 तक की लंबी अवधि में सोने का कुल रिटर्न ज्यादा रहा.
सोने के मुकाबले चांदी में ज्यादा गिरावट क्यों आती है?
financialexpres की रिपोर्ट के मुताबिक, चांदी की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव की सबसे बड़ी वजह इसकी दोहरी भूमिका है. यह सोने की तरह निवेश की धातु भी है और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल भी. इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन और सोलर पैनल जैसे क्षेत्रों में चांदी की बड़ी मांग रहती है. वैश्विक मांग का 50% से ज्यादा हिस्सा औद्योगिक इस्तेमाल से आता है.
जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो निवेशक ब्याज देने वाले विकल्पों की तरफ आकर्षित हो सकते हैं. इससे सोने और चांदी, दोनों पर दबाव आता है. लेकिन आर्थिक विकास धीमा होने की आशंका से उद्योगों की मांग भी प्रभावित हो सकती है. इसका असर चांदी पर ज्यादा पड़ता है.
सोने को केंद्रीय बैंकों का सहारा, चांदी को नहीं
सोने और चांदी के प्रदर्शन में अंतर की एक अहम वजह केंद्रीय बैंकों की खरीद है. दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोना रखते हैं. कीमत गिरने पर उनकी खरीद सोने को सहारा दे सकती है. चांदी को इस तरह का समर्थन नहीं मिलता. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, 2025 में विकसित देशों के केंद्रीय बैंकों के कुल भंडार में औसतन 30% हिस्सा सोने का था. उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंकों में यह हिस्सा करीब 15% था.
पिछले तीन साल में केंद्रीय बैंकों ने औसतन 1,000 टन से ज्यादा सोना खरीदा है. इससे पहले यह खरीद 500 टन से कम रहती थी. सोने की कीमतों में गिरावट के दौरान यह मांग उसे सहारा दे सकती है.
चांदी का बाजार छोटा, इसलिए कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव
चांदी के बाजार का आकार सोने के बाजार से काफी छोटा है. लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) के ट्रेड डेटा के मुताबिक, 11 सितंबर को समाप्त अवधि में चांदी का साप्ताहिक कारोबार 137 अरब डॉलर था, जबकि सोने का कारोबार 935 अरब डॉलर रहा. यानी चांदी का कारोबार सोने के मुकाबले करीब 15% था.
छोटे बाजार में बिकवाली के अपेक्षाकृत छोटे ऑर्डर भी कीमतों में बड़ी गिरावट ला सकते हैं. तेजी के दौरान भी यही स्थिति उलटी दिशा में काम कर सकती है. सट्टेबाजी, उधार लेकर किए गए सौदे और मार्जिन बढ़ने पर तेजी से पोजिशन बेचने की वजह से चांदी में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है.
चांदी के भाव का अनुमान घटा, अब क्या है आउटलुक?
चांदी 29 जनवरी को बने 121 डॉलर प्रति औंस के ऑलटाइम हाई से करीब 50% नीचे आ चुकी है. इसी अवधि में सोना अपने उच्च स्तर से करीब 25% गिरा है. जे.पी. मॉर्गन ग्लोबल रिसर्च ने चांदी के भाव का अपना अनुमान घटा दिया है. मई में उसने चांदी की सालाना औसत कीमत 84 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान लगाया था, जिसे अब घटाकर 70 डॉलर प्रति औंस कर दिया गया है. अक्टूबर के पहले सप्ताह में चांदी करीब 60 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी.
महंगाई, बॉन्ड यील्ड और युद्ध का भी असर
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के कारण तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है, जिससे महंगाई बढ़ने का जोखिम है. अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड भी कई दशकों के ऊंचे स्तर पर है और ब्याज दरें बढ़ने की आशंका बनी हुई है. ऊंची ब्याज दरें और मजबूत डॉलर सोने-चांदी जैसी धातुओं के लिए दबाव पैदा कर सकते हैं.
अगर वित्तीय दबाव के कारण केंद्रीय बैंक और सॉवरेन वेल्थ फंड सोना बेचने लगते हैं, तो इससे दोनों धातुओं की कीमतों पर और दबाव आ सकता है. हालांकि, अगर मौजूदा दबाव कम होते हैं, तो चांदी की कीमतों में तेज उछाल भी देखने को मिल सकता है.
निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
चांदी में लंबी अवधि के दौरान अच्छा रिटर्न देने की क्षमता दिखी है, लेकिन इसमें गिरावट भी ज्यादा तेज हो सकती है. औद्योगिक मांग में कमजोरी और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए कीमतों में और गिरावट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. दूसरी तरफ, अगर डॉलर, ब्याज दरों और औद्योगिक मांग से जुड़े हालात बदलते हैं, तो चांदी में तेज रिकवरी भी संभव है. इसलिए केवल पिछले 5 या 10 साल के रिटर्न को देखकर निवेश का फैसला करना सही नहीं होगा. निवेश से पहले अपनी जोखिम उठाने की क्षमता, निवेश की अवधि और बाजार में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखना जरूरी है.
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