रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची चीनी की कीमत, सरकार ने कहा- घबराने की जरूरत नहीं

देश में Sugar Price रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. दिल्ली में चीनी का खुदरा भाव 47 रुपये प्रति किलोग्राम और पश्चिम बंगाल में 50 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया है. हालांकि, ISMA और NFCSF का कहना है कि घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और घबराने की जरूरत नहीं है.

चीनी Image Credit: Freepik.com

Sugar Price: देश में चीनी की खुदरा और थोक कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कई राज्यों में चीनी महंगी हो गई है. हालांकि, केंद्र सरकार और चीनी उद्योग से जुड़े प्रमुख संगठनों का कहना है कि देश में घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को दिल्ली में चीनी का खुदरा भाव 47 रुपये प्रति किलोग्राम और पश्चिम बंगाल में 50 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. वहीं, उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार औसत एक्स-मिल चीनी कीमत बढ़कर 44 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 14 प्रतिशत अधिक है. दक्षिण भारत में कई चीनी मिलें 45 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास चीनी बेच रही हैं.

उद्योग संगठनों ने अफवाहों से बचने की अपील की

ET की रिपोर्ट के मुताबिक, Indian Sugar & Bio-energy Manufacturers Association (ISMA) और National Federation of Cooperative Sugar Factories Ltd (NFCSF) ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घरेलू खपत को पूरा करने में किसी तरह की समस्या नहीं होगी.

दोनों संगठनों ने कहा कि हाल में कीमतों में आई तेजी मांग और सप्लाई की वास्तविक स्थिति के अनुरूप नहीं है. बाजार में कमी का माहौल बनाना, सट्टेबाजी करना या गलत जानकारी फैलाना उपभोक्ताओं और चीनी पर निर्भर उद्योगों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. संगठनों ने व्यापारियों और अन्य हितधारकों से अनावश्यक स्टॉक जमा करने और अफवाहें फैलाने से बचने की अपील की है.

महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम स्टॉक का असर

विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले एक महीने में कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी महाराष्ट्र और कर्नाटक में देखने को मिली है. ये दोनों राज्य देश के प्रमुख चीनी उत्पादक हैं, लेकिन यहां अन्य राज्यों की तुलना में चीनी का स्टॉक अपेक्षाकृत कम बचा है.

चीनी कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इन राज्यों में स्टॉक कम होने के कारण अब अन्य राज्यों की चीनी मिलों को ऊंची कीमतों का फायदा मिल सकता है. बाजार में सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता ने भी कीमतों में तेजी लाने में अहम भूमिका निभाई है.

उत्पादन में सुधार की उम्मीद

उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, 30 सितंबर 2026 को समाप्त होने वाले 2025-26 Sugar Year में देश का चीनी उत्पादन करीब 27.8 मिलियन टन रहने का अनुमान है. यह पिछले सीजन के 25.6 मिलियन टन की तुलना में लगभग 8.5 प्रतिशत अधिक है. उत्पादन बढ़ने की उम्मीद से आने वाले महीनों में सप्लाई की स्थिति बेहतर हो सकती है.

एक्सपोर्ट बैन के बाद बदला बाजार

सरकार ने मई 2026 में चीनी उत्पादन अनुमान से कम रहने के बाद Sugar Export पर रोक लगा दी थी. एक्सपोर्ट बैन लागू होने से पहले करीब 8 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया था. इसमें सबसे बड़ा योगदान महाराष्ट्र और कर्नाटक की चीनी मिलों का रहा.

बताया जा रहा है कि इन राज्यों की कई मिलों ने अपने हिस्से के साथ-साथ उत्तर प्रदेश को आवंटित कुछ Export Quota का भी इस्तेमाल किया था. इसके बदले उत्तर प्रदेश की मिलों को घरेलू बिक्री के लिए अतिरिक्त कोटा दिया गया.

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