Tata Sons में फिर छिड़ी जंग, Chandrasekaran की री-अपॉइंटमेंट पर क्यों हुआ विवाद?
Tata Sons में N Chandrasekaran की दोबारा नियुक्ति पर विवाद बढ़ गया है. Tata Trusts ने फैसले को कानूनी तौर पर अमान्य बताया है. Noel Tata ने नियुक्ति के खिलाफ वोट किया है.

टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी Tata Sons में चेयरमैन पद को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है. बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद अगले पांच साल के लिए फिर से एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला किया है. हालांकि, Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस फैसले का विरोध किया है और इसे कानूनी तौर पर अमान्य बताया है.
चंद्रशेखरन ने पहले क्या कहा था?
एन. चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को बोर्ड को बताया था कि वह फरवरी 2027 में मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए उम्मीदवार नहीं होंगे. Tata Trusts के मुताबिक, इस फैसले को स्वीकार कर लिया गया था और उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी भी की गई थी.
इसके बाद Tata Sons की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी ने चंद्रशेखरन से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा. बोर्ड की बैठक में उन्होंने अपना फैसला बदलते हुए पांच साल और जारी रहने पर सहमति जताई. इसके बाद बोर्ड ने बहुमत से उनके दोबारा नियुक्त किए जाने को मंजूरी दे दी.
नोएल टाटा ने क्यों किया विरोध?
नोएल टाटा ने बोर्ड में चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के खिलाफ वोट किया. Tata Trusts का कहना है कि Tata Sons के Articles of Association में चेयरमैन की नियुक्ति या दोबारा नियुक्ति के लिए Tata Trusts के नॉमिनी डायरेक्टर्स के बहुमत की मंजूरी जरूरी है.
Trusts के मुताबिक, जब नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया तो बोर्ड का फैसला कानूनी रूप से वैध नहीं रह जाता. Trusts ने इसे “लीगल नलिटी” यानी ऐसा फैसला बताया है जिसका कानूनी प्रभाव नहीं होना चाहिए.
आगे क्या हो सकता है?
इस विवाद का एक अहम पहलू चंद्रशेखरन की Tata Sons में डायरेक्टर के तौर पर स्थिति भी है. Tata Trusts ने सवाल उठाया है कि जब उनकी डायरेक्टरशिप का मामला पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, तो उनके चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति का फैसला कैसे किया जा सकता है.
वहीं, Tata Sons बोर्ड ने RBI के नियमों के अनुपालन के लिए कंपनी की लिस्टिंग की दिशा में कदम उठाने का भी फैसला किया है. RBI ने हाल ही में Tata Sons की लिस्टिंग से छूट देने की अर्जी खारिज की थी. अब नेतृत्व और लिस्टिंग, दोनों मुद्दे कंपनी के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं.
Tata Sons में किसके पास कितनी हिस्सेदारी?
Tata Trusts के पास Tata Sons की करीब 66% हिस्सेदारी है. ऐसे में चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर Trusts की भूमिका महत्वपूर्ण है. हालांकि, बोर्ड ने बहुमत के आधार पर चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए फिर से नियुक्त करने का फैसला किया है.
यह मामला अब सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन तक सीमित नहीं है. इसमें कंपनी के Articles of Association, बोर्ड के वोटिंग अधिकार, Tata Trusts की भूमिका और RBI के लिस्टिंग नियम जैसे कई कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े मुद्दे शामिल हैं.