टाटा ग्रुप में बदलेंगे समीकरण? नोएल टाटा ने बोर्ड से मांगी इस बड़े प्लान की डिटेल
टाटा ग्रुप में बड़े कारोबारी बदलाव की तैयारी चल रही है. नोएल टाटा ने शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप के 25,000 करोड़ रुपये के एग्जिट प्लान की बोर्ड से विस्तृत जांच कराने की मांग की है. इसके साथ ही टाटा संस के पुनर्गठन प्रस्ताव पर भी चर्चा हो सकती है. इस फैसले का टाटा ग्रुप के भविष्य पर असर पड़ सकता है.

टाटा ग्रुप में एक बार फिर बड़े कारोबारी बदलाव की चर्चा तेज हो गई है. टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और टाटा संस के डायरेक्टर नोएल टाटा ने शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप की 25,000 करोड़ रुपये की एग्जिट योजना की विस्तृत जांच कराने की मांग की है. उन्होंने टाटा संस के बोर्ड से इस प्रस्ताव के वित्तीय, कानूनी और कारोबारी पहलुओं पर विचार करने को कहा है. इसके साथ ही उन्होंने टाटा संस के पुनर्गठन से जुड़े प्रस्ताव की भी समीक्षा करने की मांग की है.
टाटा संस से बाहर निकलना चाहता है SP ग्रुप
शापूरजी पालोनजी ग्रुप की टाटा संस में करीब 18.38 फीसदी हिस्सेदारी है. SP ग्रुप लंबे समय से टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी के बदले निवेश की रकम निकालने का रास्ता तलाश रहा है. इसके लिए ग्रुप ने करीब 25,000 करोड़ रुपये की मांग की है.
प्रस्ताव के मुताबिक, टाटा संस अपनी शेयर पूंजी में चुनिंदा कमी करके SP ग्रुप के शेयरों को रद्द कर सकती है. इसके बदले ग्रुप को 25,000 करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं. यह भुगतान 18 महीने के भीतर दो या उससे ज्यादा किस्तों में करने का प्रस्ताव है.
शेयरों की कीमत तय करने के लिए मर्चेंट बैंकर या रजिस्टर्ड वैल्यूअर की मदद लेने की बात कही गई है. इस पूरी प्रक्रिया के लिए शेयरधारकों की मंजूरी और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की स्वीकृति भी जरूरी होगी.
कहां से आएंगे 25,000 करोड़ रुपये?
इस रकम का इंतजाम करने के लिए टाटा संस के पास कई विकल्प हो सकते हैं. इनमें कंपनी का आंतरिक कैश फ्लो, लिस्टेड कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचना और नए कारोबार में बाहरी निवेश लाना शामिल है. इसके अलावा कुछ कारोबार को शेयर बाजार में लिस्ट करके भी पैसा जुटाने का विकल्प रखा गया है. खास बात यह है कि प्रस्ताव में नया कर्ज लेने या सार्वजनिक फंड का इस्तेमाल करने से बचने की बात कही गई है.
टाटा संस का पुनर्गठन भी एजेंडे में
नोएल टाटा ने सिर्फ SP ग्रुप की एग्जिट योजना ही नहीं, बल्कि टाटा संस के पुनर्गठन प्रस्ताव की भी समीक्षा मांगी है. इसके तहत टाटा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स सॉल्यूशंस और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का टाटा संस में विलय करने का प्रस्ताव है.
इस बदलाव का मकसद कंपनी की रेगुलेटरी स्थिति में बदलाव करना और उसे अनलिस्टेड बनाए रखने का रास्ता तलाशना है. दरअसल, रिजर्व बैंक ने टाटा संस को अपर-लेयर NBFC के रूप में वर्गीकृत किया है, जिसके तहत कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट होना पड़ सकता है.
नोएल टाटा ने इन दोनों प्रस्तावों पर विस्तृत जानकारी और मैनेजमेंट की प्रस्तुति मांगी है. रिपोर्ट के मुताबिक, इन मुद्दों पर 26 नवंबर की बोर्ड मीटिंग में चर्चा हो सकती है. फिलहाल दोनों प्रस्तावों को बोर्ड की मंजूरी नहीं मिली है.