‘टाटा संस को नहीं चलाते हैं ट्रस्ट्स’, भीतरी मतभेद और गहराए; ट्रस्टियों ने कहा- रीस्ट्रक्चरिंग प्रस्ताव नया नहीं

Tata Sons Controversy: ट्रस्टीज ने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि रीस्ट्रक्चरिंग से ट्रस्ट के चैरिटेबल स्टेटस (धर्मार्थ दर्जे) को खतरा हो सकता है. उन्होंने इसे 'बेतुका आरोप' बताया. ट्रस्टीज ने कहा कि रीस्ट्रक्चरिंग प्रस्ताव के पीछे का विचार नया नहीं है.

टाटा समूह के भीतर कलह Image Credit: money9live

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) के ट्रस्टियों ने टाटा संस के रीस्ट्रक्चरिंग प्लान पर दो सीनियर ट्रस्टियों की आपत्तियों को खारिज कर दिया है. नोएल टाटा के नेतृत्व वाले ट्रस्टियों में डेरियस खंबाटा, नेविल टाटा और भास्कर भट शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने ग्रुप की होल्डिंग कंपनी की लिस्टिंग को अनिवार्य नहीं किया था. उन्होंने असहमति जताने वालों वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह पर ट्रस्ट के फैसलों को कमजोर करने का आरोप लगाया.

लिस्टिंग का जिक्र नहीं

ईटी के अनुसार, ट्रस्टियों ने कहा कि RBI ने टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी को तो खारिज कर दिया था, लेकिन लिस्टिंग के लिए नहीं कहा था.

4 अक्टूबर के एक पत्र में उन्होंने कहा, ‘उस कम्युनिकेशन में टाटा संस के रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के आवेदन को खारिज किया गया था. उसमें लिस्टिंग का कोई जिक्र नहीं है, न ही कोई खास कदम उठाने को कहा गया है, और न ही यह कहा गया है कि टाटा संस किसी नियम का उल्लंघन कर रही है.’

लिस्टिंग के अलावा कानूनी रास्ता

उन्होंने कहा कि इसके बजाय RBI के कम्युनिकेशन से यह जरूरी हो गया कि कोई विकल्प तलाशा जाए. उन्होंने कहा, ‘इससे जो बात जरूरी हो गई है, वह यह है कि लिस्टिंग के अलावा कोई कानूनी रास्ता निकाला जाए, जिससे ट्रस्ट और टाटा संस के तय मकसद को हासिल किया जा सके.

यह जवाब तब आया जब श्रीनिवासन और सिंह ने कहा कि टाटा ट्रस्ट्स की ओर से टाटा संस बोर्ड को 28 सितंबर को भेजे गए पत्र से पहले उनसे सलाह नहीं ली गई थी. उस पत्र में होल्डिंग कंपनी के लिए रीस्ट्रक्चरिंग प्लान पेश किया गया था.

ट्रस्ट टाटा संस को नहीं चलाते

इसमें टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स लिमिटेड जैसी यूनिट्स का टाटा संस में विलय शामिल है. रीस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) प्रस्ताव का मकसद टाटा संस को एक कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी की कैटेगरी से बाहर निकालना है, ताकि उसे लिस्ट होने की जरूरत न पड़े.

ट्रस्टीज ने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि रीस्ट्रक्चरिंग से ट्रस्ट के चैरिटेबल स्टेटस (धर्मार्थ दर्जे) को खतरा हो सकता है. उन्होंने इसे ‘बेतुका आरोप’ बताया. साथ ही श्रीनिवासन और सिंह द्वारा उठाए गए एक और मुद्दे पर कहा कि ट्रस्ट टाटा संस को नहीं चलाते और न ही ऐसा करना चाहते हैं.’

अनलिस्टेड कंपनी बने रहने की स्थिति

ट्रस्टीज ने कहा कि रीस्ट्रक्चरिंग प्रस्ताव के पीछे का विचार नया नहीं है. उन्होंने कहा कि इस पत्र में किसी नई स्थिति की घोषणा नहीं की गई है. टाटा संस का अनलिस्टेड कंपनी बने रहना, ट्रस्ट और खुद टाटा संस की वर्षों से तय स्थिति रही है.

उन्होंने मार्च 2024 में टाटा संस बोर्ड के अनलिस्टेड बने रहने के फैसले का हवाला दिया, जिसके बाद लगभग 20,000 करोड़ रुपये के कर्ज का भुगतान और प्रेफरेंस शेयरों का रिडेम्पशन (भुगतान) किया गया.

उन्होंने पिछले साल 28 मई और 28 जुलाई को SDTT और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) द्वारा सर्वसम्मति से पारित प्रस्तावों की ओर भी इशारा किया. इन प्रस्तावों में टाटा संस को अपना अनलिस्टेड स्टेटस बनाए रखने के तरीकों पर विचार करने के लिए अधिकृत किया गया था, जिसमें शेयरहोल्डिंग से बाहर निकलने के लिए शापूरजी पलोनजी (SP) ग्रुप के साथ बातचीत भी शामिल थी.

टाटा संस में ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी

SDTT और SRTT के पास मिलकर टाटा संस की लगभग 51.54% हिस्सेदारी है, जो टाटा ट्रस्ट की कुल 66% हिस्सेदारी का बड़ा हिस्सा है. ट्रस्टीज ने कहा कि 28 सितंबर का पत्र 28 जुलाई, 2025 के प्रस्ताव के तहत और टाटा संस के अनुरोध के जवाब में जारी किया गया था.

टाटा संस बोर्ड ने RBI के कम्युनिकेशन (संदेश) पर विचार करने के लिए 17 सितंबर को बैठक की थी और सहमति जताई थी कि सिर्फ लिस्टिंग ही नहीं, बल्कि सभी विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए. बोर्ड ने टाटा ट्रस्ट से RBI के कम्युनिकेशन का पालन करने के विकल्पों पर काम करने के लिए भी कहा था.

श्रीनिवासन की आलोचना

ट्रस्टीज ने कहा, ‘टाटा संस बोर्ड के कामकाज पर कब्जा करने के बजाय, ट्रस्ट ने उसके अनुरोध का जवाब दिया.’ ट्रस्टीज ने श्रीनिवासन की इस बात के लिए भी आलोचना की कि उन्होंने 17 सितंबर की बोर्ड मीटिंग में टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के पक्ष में वोट दिया, जबकि 13 अगस्त को SDTT ने उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव पास किया था.

उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की सुरक्षा के लिए आर्टिकल 118 और 121 के तहत मिले वोटिंग के अधिकार को खुद ट्रस्ट के नॉमिनी के वोट ने ही बेअसर कर दिया.

उन्होंने श्रीनिवासन और सिंह पर यह आरोप भी लगाया कि वे सामूहिक विचार-विमर्श की अपनी ही बात के उलट काम कर रहे हैं. उन्होंने 25 सितंबर को चैरिटी कमिश्नर के पास जाकर SDTT की मीटिंग और सर्कुलर प्रस्तावों पर रोक लगाने की मांग की थी. ट्रस्टीज ने कहा कि आपका विरोध खोखला लगता है.

श्रीनिवासन पर आरोप

उन्होंने सिंह और श्रीनिवासन पर आरोप लगाया कि उन्होंने साथी ट्रस्टीज के सामने अपनी बदली हुई राय रखे बिना ही अप्रैल 2026 से लिस्टिंग का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया. उन्होंने कहा, ‘आपकी व्यक्तिगत राय को सार्वजनिक करने से ट्रस्ट के प्रस्तावों और RBI के पास टाटा संस की लंबित अर्जी, दोनों पर बुरा असर पड़ा. यह आपकी जिम्मेदारियों का उल्लंघन था.’

शेयरहोल्डर की मंजूरी

ट्रस्टीज ने कहा कि टाटा संस में टाटा ट्रस्ट की बड़ी हिस्सेदारी को देखते हुए, शेयरहोल्डर की मंजूरी वाली किसी भी रीस्ट्रक्चरिंग के लिए उनकी राय अहम है. उन्होंने कहा, ‘इसलिए, टाटा संस में लगभग 66% हिस्सेदारी रखने वाले शेयरहोल्डर की राय इस प्रक्रिया में कोई दखल नहीं है. वे इसका एक जरूरी हिस्सा हैं और शुरुआत में ही अपनी बात रखना जिम्मेदारी भरा काम है, न कि गलत.’

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