मां-बेटी की जोड़ी चाहती है TVS परिवार की संपत्ति का सही बंटवारा, 2024 के MoU पर उठे सवाल; जानें- पूरा मामला

इस विवाद में एक तरफ मल्लिका और लक्ष्मी हैं, तो दूसरी तरफ वेणु श्रीनिवासन और उनके बेटे सुदर्शन वेणु हैं. सुंदरम क्लेटन लिमिटेड (SCL) में अहम नियुक्तियों और गवर्नेंस को लेकर हुए बोर्डरूम ड्रामे के कुछ ही महीनों बाद यह नया विवाद सामने आया है.

टीवीएस का पारिवारिक विवाद. Image Credit: TVS, TAFE and AI

TVS ग्रुप के मुखिया वेणु श्रीनिवासन के परिवार में संपत्ति और एसेट्स के बंटवारे को लेकर फिर से मतभेद सामने आए हैं. मल्लिका श्रीनिवासन और उनकी बेटी लक्ष्मी वेणु ने मामले को जल्द, सही तरीके से और आपसी सहमति से सुलझाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. सोमवार देर रात जारी बयान में मल्लिका और लक्ष्मी ने कहा कि किसी भी सही समझौते में सभी संबंधित पक्षों के जायज आर्थिक हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए. यह समझौता वैल्यूएशन, बातचीत और सहमति की पारदर्शी प्रक्रिया पर आधारित होना चाहिए.

इस विवाद में एक तरफ मल्लिका और लक्ष्मी हैं, तो दूसरी तरफ वेणु श्रीनिवासन और उनके बेटे सुदर्शन वेणु हैं.

परिवार के बीच मेमोरेंडम

ग्रुप की कंपनी सुंदरम क्लेटन लिमिटेड (SCL) में अहम नियुक्तियों और गवर्नेंस को लेकर हुए बोर्डरूम ड्रामे के कुछ ही महीनों बाद यह नया विवाद सामने आया है. इसने परिवार के चार सदस्यों- माता-पिता और बच्चों- के बीच दो साल पहले हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर ध्यान केंद्रित किया है.

इस मामले में एक अहम बात यह भी है कि MoU के बाद से सुदर्शन वेणु द्वारा चलाई जा रही टू-व्हीलर कंपनी TVS मोटर के मार्केट कैप में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है.

बयान में कहा गया कि सबसे पहली बात तो यह है कि वेणु श्रीनिवासन के परिवार के बीच कोई आर्थिक समझौता नहीं हुआ है.

कोई वैल्यूएशन प्रोसेस नहीं किया गया

बयान में कहा गया, ‘TVS परिवार का बड़ा बंटवारा, जिस पर 2020 में सहमति बनी थी और जिसे बाद में लागू किया गया, वह संबंधित स्टेकहोल्डर्स को शामिल करके किया गया था. वेणु श्रीनिवासन परिवार के भीतर आर्थिक हितों को लेकर पारदर्शी वैल्यूएशन, चर्चा और आपसी सहमति वाली कोई वैसी प्रक्रिया नहीं हुई है. इन आर्थिक हितों को बांटने के लिए कोई समझौता नहीं हुआ है.

मालिकाना हक और पारिवारिक समझौते

ET की रिपोर्ट के अनुसार, लक्ष्मी और उनकी मां ने इस बात को चुनौती दी थी कि कारोबार और उनके मालिकाना हक को एक तय पारिवारिक समझौते के तहत दोनों भाई-बहनों के बीच बांटा गया था. उनका कहना था कि 21 मार्च 2024 से लागू MoU में केवल 2020 के TVS परिवार के बंटवारे के बाद ब्रांड अधिकारों और मैनेजमेंट के साथ-साथ नॉन-कम्पलीट क्लॉज (प्रतिस्पर्धा न करने की शर्तें) से जुड़ी बातें शामिल थीं.

मैनेजमेंट की जिम्मेदारियों और मालिकाना हक

उनके बयान में आगे कहा गया, ‘यह सुझाव कि परिवार की सभी संपत्तियां केवल एक व्यक्ति की हैं, और इसलिए वह उन्हें अपनी मर्जी से बांटने के लिए स्वतंत्र है, न तो कोई सहमत स्थिति है और न ही कोई स्थापित बात है.’

उनके अनुसार, मैनेजमेंट की जिम्मेदारियों को आर्थिक मालिकाना हक से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. लीडरशिप की भूमिकाएं या कारोबार को मैनेज करने के मौके देने का मतलब परिवार की संपत्तियों का बंटवारा नहीं है और न ही यह परिवार के सदस्यों के सही आर्थिक हितों की जगह ले सकता है.

बयान में कहा गया कि इसी तरह, ट्रेडमार्क, ब्रांड के इस्तेमाल और नॉन-कम्पलीट शर्तों से जुड़ी व्यवस्थाओं को आर्थिक समझौता नहीं कहा जा सकता, क्योंकि उन व्यवस्थाओं में ऐसा कोई समझौता शामिल नहीं था.’

कौन कर रहा कारोबार को मैनेज?

पिछले कुछ वर्षों से दोनों भाई-बहन TVS ग्रुप के भीतर अपने-अपने कारोबार को मैनेज कर रहे हैं. लक्ष्मी वेणु SCL को मैनेज कर रही हैं, पहले जॉइंट MD के तौर पर और फिर MD के तौर पर. सुदर्शन वेणु TVS मोटर के चेयरमैन और MD हैं और TVS होल्डिंग्स के MD भी हैं.

लक्ष्मी वेणु मार्च 2025 से ट्रैक्टर्स एंड फार्म इक्विपमेंट लिमिटेड (TAFE) की वाइस चेयर भी हैं. उनकी मां मल्लिका श्रीनिवासन कंपनी की चेयरपर्सन और MD बनी हुई हैं.

TAFE की स्थापना मल्लिका के दादा अनंतरामकृष्णन ने की थी. मल्लिका और लक्ष्मी वेणु ने यह भी कहा कि इस संदर्भ में TAFE का जिक्र करना गलत था.

TAFE किस ग्रुप का हिस्सा

उन्होंने कहा, ‘TAFE, Amalgamations Group का हिस्सा है, जो एक अलग पारिवारिक बिजनेस ग्रुप है और जिसमें मल्लिका श्रीनिवासन एक शेयरहोल्डर हैं. TAFE का वेणु श्रीनिवासन परिवार के बीच हुए आर्थिक समझौते से कोई लेना-देना नहीं है और इसे उस समझौते के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए.

TAFE के साथ उनके लंबे समय से चले आ रहे जुड़ाव और कस्टोडियल भूमिका को वेणु श्रीनिवासन परिवार के बीच आर्थिक हितों के उचित बंटवारे के सबूत के तौर पर पेश करना मूल रूप से गुमराह करने वाला है.’

अनसुलझा है मुद्दा

दोनों ने कहा कि एकतरफा तौर पर किए गए इंतजामों को निष्पक्ष या आपसी सहमति वाला नहीं माना जा सकता. उन्होंने कहा कि मूल मुद्दा मैनेजमेंट पदों का नहीं है, जिनके लिए उचित और बराबर मुआवजा दिया गया है. मुद्दा सही आर्थिक मालिकाना हक को उचित मान्यता देने का है, जो अभी भी अनसुलझा है.

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