क्या अब टैरिफ की मनमानी पर लगेगी लगाम? BRICS के 10 देशों ने नई दिल्ली घोषणा में दिया बड़ा संदेश

नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit में सदस्य देशों ने नई दिल्ली घोषणा 2026 को सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया. घोषणा में एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापार उपायों पर गंभीर चिंता जताई गई है. BRICS देशों ने सीमा पार भुगतान के व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए बातचीत जारी रखने और ग्लोबल साउथ की भूमिका मजबूत करने पर भी जोर दिया.

ब्रिक्स देश Image Credit: टीवी9

भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में हो रहे BRICS Summit में सदस्य देशों ने नई दिल्ली घोषणा 2026 को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है. घोषणा में एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापार उपायों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है. BRICS देशों का कहना है कि ऐसे कदम व्यापार को प्रभावित करते हैं और विश्व व्यापार संगठन यानी WTO के नियमों के अनुरूप नहीं हैं.

भारत की अगुवाई में सदस्य देशों के बीच लगातार बातचीत के बाद इस घोषणा पर सहमति बनी. खास बात यह है कि मई में नई दिल्ली में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेदों के कारण संयुक्त बयान जारी नहीं हो पाया था. ऐसे में नई दिल्ली घोषणा पर सर्वसम्मति को एक अहम कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है.

एकतरफा टैरिफ और व्यापार बाधाओं पर BRICS की चिंता

नई दिल्ली घोषणा में BRICS देशों ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों के बढ़ते इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई. समूह के मुताबिक, ऐसे उपाय व्यापार को विकृत करते हैं और WTO के नियमों के अनुरूप नहीं हैं.

BRICS देशों ने एकतरफा दबाव वाले उन आर्थिक कदमों की भी निंदा की, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं. समूह का मानना है कि ऐसे कदमों से सदस्य देशों की बाहरी आर्थिक दबाव के प्रति निर्भरता और जोखिम बढ़ सकता है.

भारत लंबे समय से BRICS के भीतर व्यापार सहयोग मजबूत करने, व्यापारिक बाधाएं कम करने और कारोबार के नए अवसर बढ़ाने पर जोर देता रहा है. नई दिल्ली घोषणा में इन मुद्दों को आर्थिक एजेंडे के केंद्र में रखा गया है.

सीमा पार पेमेंट को आसान बनाने पर भी जोर

BRICS देशों ने आपसी सीमा पार भुगतान यानी क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट को आसान बनाने के लिए बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है. इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार और वित्तीय सहयोग को और मजबूत करना है. भारत BRICS देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के साथ-साथ भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने पर भी जोर देता रहा है. घोषणा में इस दिशा में व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए बातचीत जारी रखने की बात कही गई है.

परमाणु खतरे और संघर्ष को लेकर जताई चिंता

BRICS घोषणा में दुनिया में बढ़ते परमाणु खतरे और संघर्ष के जोखिम पर भी चिंता जताई गई है. समूह ने कहा कि परमाणु सुरक्षा, सुरक्षा उपाय और संरक्षा से जुड़े मानकों को हर स्थिति में बनाए रखा जाना चाहिए, यहां तक कि सशस्त्र संघर्ष के दौरान भी.

यह घोषणा ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच छह महीने से चल रहे युद्ध में फिर से एक-दूसरे के खिलाफ हमले शुरू होने की बात रिपोर्ट में कही गई है. अगस्त के अधिकांश समय में लड़ाई में ठहराव के बाद दोनों देशों के बीच फिर से हमले शुरू हुए हैं. वहीं, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर क्षेत्र में अपनी पकड़ और मजबूत की है.

मोदी बोले- ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत होनी चाहिए

BRICS Summit के उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि BRICS अब एक परिपक्व समूह बन चुका है और उसे अपनी एकता और सहमति को ठोस नतीजों में बदलने की जरूरत है.

मोदी ने वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों के समय सबसे आगे रहता है, लेकिन फैसले लेने की प्रक्रिया में पीछे है. उन्होंने इस व्यवस्था को बदलकर साझेदारी का मंच बनाने की जरूरत बताई, जहां हर देश की आवाज और हिस्सेदारी हो.

प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की भारत की पुरानी मांग भी दोहराई. भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता और भारत समेत उभरती शक्तियों के लिए बेहतर प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है.

मोदी ने कहा कि अगर भविष्य साझा है तो उस भविष्य को आकार देने का अधिकार भी साझा होना चाहिए.

पुतिन, शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति भी सम्मेलन में शामिल

नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत कई नेता शामिल हुए.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि BRICS देशों को इतिहास के सही पक्ष में मजबूती से खड़ा होना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को ज्यादा समानता और न्याय की दिशा में ले जाना चाहिए.

BRICS में अब 10 देश शामिल

BRICS की शुरुआत 2009 में हुई थी. अब इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं. यह समूह उभरती अर्थव्यवस्थाओं की वैश्विक भूमिका मजबूत करने और विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF और WTO जैसी वैश्विक संस्थाओं में सुधार के लिए लंबे समय से आवाज उठाता रहा है.

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