Indian Economy: चौथी बड़ी इकॉनमी फिर भी भारत के शहरों की क्यों हैं खस्ता हालत ?
भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है, फिर भी कई शहरों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति सवाल खड़े करती है. बढ़ते टैक्स और विकास योजनाओं के बावजूद नागरिक ट्रैफिक, प्रदूषण, गंदे पानी, कचरे और कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. सवाल उठता है कि शहरी विकास के लिए घोषित बजट और परियोजनाओं का वास्तविक असर ज़मीन पर क्यों नहीं दिखता. विशेषज्ञों के अनुसार, देरी से होने वाले स्थानीय चुनाव, कमजोर शहरी प्रशासन और जवाबदेही की कमी बड़े कारण बनते हैं. निर्वाचित नेतृत्व के बिना शहरों में निर्णय प्रक्रिया धीमी और कम प्रभावी हो सकती है. फंडिंग में कटौती, अनुदान में देरी और योजना क्रियान्वयन की चुनौतियाँ भी विकास की रफ्तार को प्रभावित करती हैं. कुल मिलाकर, आर्थिक विकास के साथ मजबूत शहरी शासन और पारदर्शिता ही शहरों को बेहतर बना सकती है.
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