Jio IPO: लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में मचा तहलका, ₹180 तक पहुंचा GMP,16% लिस्टिंग गेन का संकेत
रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO से पहले ग्रे मार्केट में हलचल तेज हो गई है. जियो IPO का संभावित प्राइस बैंड 1065 से 1119 रुपये प्रति शेयर हो सकता है. वहीं, ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP करीब 170 से 180 रुपये बताया जा रहा है, जो ऊपरी प्राइस बैंड के मुकाबले 15 से 16 फीसदी संभावित लिस्टिंग गेन का संकेत देता है.

रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO को लेकर बाजार में हलचल तेज हो गई है. देश के सबसे बड़े IPO के संभावित लॉन्च से पहले ही ग्रे मार्केट में जियो के शेयरों की मांग बढ़ने की खबर है. अनऑफिशियल मार्केट पर नजर रखने वाले जानकारों के मुताबिक, जियो के शेयरों का ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP करीब 170 से 180 रुपये प्रति शेयर तक पहुंच गया है. रिपोर्टेड प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर के मुकाबले यह करीब 15 से 16 फीसदी के संभावित लिस्टिंग गेन का संकेत देता है. हालांकि, कंपनी ने अभी आधिकारिक प्राइस बैंड का ऐलान नहीं किया है.
ग्रे मार्केट में कितना चल रहा है जियो का GMP?
रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ती दिख रही है. ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयरों का प्रीमियम 170 से 180 रुपये प्रति शेयर बताया जा रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जियो IPO के लिए 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय कर सकती है. अगर ऊपरी प्राइस बैंड 1,119 रुपये और मौजूदा GMP 170 से 180 रुपये बना रहता है, तो शेयर की अनऑफिशियल लिस्टिंग कीमत 1,289 से 1,299 रुपये के आसपास बैठती है. हालांकि, ग्रे मार्केट के ये भाव आधिकारिक नहीं हैं और इनमें तेजी से बदलाव हो सकता है.
कितने रुपये में आ सकता है जियो का IPO
रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये के वैल्यूएशन पर आ सकता है. कंपनी की ओर से अभी आधिकारिक प्राइस बैंड और रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस की जानकारी सामने नहीं आई है. IPO के डॉक्यूमेंट इस सप्ताह दाखिल किए जा सकते हैं. संभावित प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर कंपनी करीब 30,200 करोड़ रुपये जुटा सकती है. अगर ऐसा होता है, तो यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO होगा. इससे पहले 2024 में Hyundai Motor India का करीब 2.9 अरब डॉलर का IPO देश का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू था.
IPO में नए शेयर जारी करेगी कंपनी
जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO में करीब 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जाने की उम्मीद है. इस इश्यू में ऑफर फॉर सेल यानी OFS का हिस्सा नहीं होने की बात कही गई है. इसका मतलब है कि मौजूदा शेयरधारकों की ओर से IPO के तहत शेयर बेचने का प्रस्ताव नहीं है. ड्राफ्ट फाइलिंग के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो प्लेटफॉर्म्स में 66.43 फीसदी हिस्सेदारी है. वहीं, मेटा की Jaadhu Holdings के पास 9.98 फीसदी और गूगल इंटरनेशनल के पास 7.73 फीसदी हिस्सेदारी है. ऐसे में IPO के जरिए कंपनी की ओर से नए शेयर जारी किए जाने पर बाजार की नजर रहेगी.
IPO से जुटाए पैसे का क्या करेगी जियो?
ड्राफ्ट दस्तावेजों के मुताबिक, IPO से मिलने वाली शुद्ध रकम में से 27,500 करोड़ रुपये तक का इस्तेमाल कर्ज चुकाने या पहले से लिए गए कर्ज का भुगतान करने के लिए किया जा सकता है. यह कर्ज मुख्य रूप से रिलायंस जियो इन्फोकॉम से जुड़ा है. बाकी रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा. इस प्रस्ताव के तहत IPO से जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा कर्ज घटाने में लगाया जा सकता है. इससे निवेशकों के लिए कंपनी की वित्तीय स्थिति और कर्ज प्रबंधन भी अहम पहलू होंगे.
टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के तौर पर पेश हो रही जियो
रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स का कारोबार केवल मोबाइल सेवाओं तक सीमित नहीं है. कंपनी के डिजिटल कारोबार में फिक्स्ड ब्रॉडबैंड, क्लाउड, एंटरटेनमेंट, एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी सर्विस भी शामिल हैं. मार्च तक कंपनी के करीब 52.4 करोड़ सब्सक्राइबर थे.
उठापटक के बीच आएगा जियो का IPO
जियो का IPO ऐसे समय में आने की तैयारी में है, जब शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती उभरते बाजारों के शेयरों पर दबाव डाल रही हैं. इसके बावजूद भारत के प्राइमरी मार्केट में बड़े IPO को लेकर दिलचस्पी बनी हुई है. घरेलू निवेशकों के पास उपलब्ध कैपिटल और बड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेश की मांग इसका एक कारण है. जियो के IPO को मिलने वाली प्रतिक्रिया से यह भी पता चलेगा कि मौजूदा बाजार परिस्थितियों में निवेशक इतने बड़े इश्यू के वैल्यूएशन को किस तरह देखते हैं.