Repo Rate: 5.50% हुआ रेपो रेट, महंगी होगी होम और कार लोन की EMI; समझें पूरा कैलकुलेशन
RBI ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया है. इस फैसले के बाद फ्लोटिंग रेट वाले होम और कार लोन की EMI बढ़ सकती है. अगर बैंक पूरी बढ़ोतरी ग्राहकों तक पहुंचाता है तो 50 लाख रुपये के होम लोन की EMI करीब 817 रुपये और 10 लाख रुपये के कार लोन की EMI करीब 117 रुपये महीने बढ़ सकती है.

RBI ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है. इसके साथ ही रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गया है. इस फैसले का असर फ्लोटिंग रेट वाले होम और कार लोन पर पड़ सकता है. अगर बैंक पूरी 0.25 फीसदी बढ़ोतरी ग्राहकों तक पहुंचाते हैं तो लोन की ब्याज दर बढ़ सकती है और EMI भी महंगी हो सकती है. हालांकि EMI में कितना बदलाव होगा, यह आपके लोन की रकम, ब्याज दर, अवधि और बैंक के नियमों पर निर्भर करेगा. आइए उदाहरण और कैलकुलेशन से समझते हैं कि रेपो रेट बढ़ने के बाद आपकी जेब पर कितना असर पड़ सकता है.
50 लाख के होम लोन पर कितना असर
मान लीजिए आपने 50 लाख रुपये का होम लोन 25 साल के लिए लिया है. अभी ब्याज दर 7.50 फीसदी है. इस दर पर आपकी EMI करीब 36950 रुपये बैठती है. अब अगर बैंक रेपो रेट की पूरी 0.25 फीसदी बढ़ोतरी ग्राहकों तक पहुंचाता है और ब्याज दर 7.50 फीसदी से बढ़कर 7.75 फीसदी हो जाती है, तो EMI करीब 37766 रुपये हो सकती है.
| डिटेल | रेपो रेट बढ़ने से पहले | रेपो रेट बढ़ने के बाद |
|---|---|---|
| होम लोन | ₹50 लाख | ₹50 लाख |
| लोन अवधि | 25 साल | 25 साल |
| ब्याज दर | 7.50% | 7.75% |
| EMI | ₹36,950 | ₹37,766 |
| EMI में अंतर | – | करीब ₹817 ज्यादा |
यानी 50 लाख रुपये के इस होम लोन पर हर महीने करीब 817 रुपये ज्यादा EMI देनी पड़ सकती है. अगर पूरी लोन अवधि में ब्याज दर इसी स्तर पर रहती है और लोन की अवधि में बदलाव नहीं होता है तो कुल ब्याज का बोझ भी बढे़गा.
1 करोड़ के होम लोन पर असर
अब 1 करोड़ रुपये के होम लोन का उदाहरण लेते हैं. मान लीजिए लोन की अवधि 20 साल है और ब्याज दर 8.50 फीसदी से बढ़कर 8.75 फीसदी हो जाती है. ऐसे में EMI करीब 86782 रुपये से बढ़कर 88371 रुपये हो सकती है.
| डिटेल | पहले | बाद में |
|---|---|---|
| होम लोन | ₹1 करोड़ | ₹1 करोड़ |
| लोन अवधि | 20 साल | 20 साल |
| ब्याज दर | 8.50% | 8.75% |
| EMI | ₹86,782 | ₹88,371 |
| EMI में बढोतरी | – | करीब ₹1,589 |
इस मामले में हर महीने करीब 1589 रुपये ज्यादा EMI देनी पड़ सकती है. यानी साल भर में करीब 19068 रुपये का अतिरिक्त पेमेंट हो सकता है, अगर ब्याज दर और लोन की अवधि में कोई और बदलाव नहीं होता है.
कार लोन पर कितना असर
रेपो रेट बढ़ने का असर कार लोन पर भी पड़ सकता है. उदाहरण के लिए मान लीजिए आपने 10 लाख रुपये का कार लोन 5 साल के लिए लिया है और ब्याज दर 9 फीसदी है. अगर बैंक ब्याज दर को 9.25 फीसदी कर देता है तो EMI करीब 20,758 रुपये से बढ़कर 20875 रुपये हो सकती है.
| डिटेल | पहले | बाद में |
|---|---|---|
| कार लोन | ₹10 लाख | ₹10 लाख |
| लोन अवधि | 5 साल | 5 साल |
| ब्याज दर | 9.00% | 9.25% |
| EMI | ₹20,758 | ₹20,875 |
| EMI में बढ़ोतरी | – | करीब ₹117 |
यानी 10 लाख रुपये के इस कार लोन पर EMI करीब 117 रुपये महीने बढ़ सकती है. साल के हिसाब से देखें तो करीब 1404 रुपये का एक्स्ट्रा पेमेंट करना पड़ सकता है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
Teerth Realties के MD विजय रौंदल के मुताबिक, रेपो रेट बढ़ने का असर कमर्शियल रियल एस्टेट के ऑफिस, वेयरहाउसिंग और रिटेल सेगमेंट पर अलग-अलग हो सकता है. बढ़ती उधारी लागत से कमर्शियल प्रॉपर्टी के कैप रेट बढ़ सकते हैं, जिसका असर REITs और इंस्टीट्यूशनल निवेशकों पर ज्यादा दिख सकता है. Grade A ऑफिस की मांग बनी रह सकती है, जबकि कमजोर एसेट्स के रीफाइनेंसिंग में देरी हो सकती है. रिटेल में EMI बोझ बढ़ने से डिस्क्रेशनरी खर्च और फुटफॉल घट सकते हैं, जिससे नई सप्लाई और कैपिटल एक्सपेंडिचर पर असर पडे़गा.
किसे सबसे ज्यादा असर होगा
रेपो रेट बढने का सीधा असर फ्लोटिंग रेट वाले लोन पर पड़ सकता है. खासकर वे होम लोन जो रेपो रेट जैसे एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुडे़ हैं, उनमें ब्याज दर में बदलाव जल्दी दिखाई दे सकता है. वहीं कुछ दूसरे बेंचमार्क से जुडे़ लोन में असर तुरंत नहीं दिख सकता.
फिक्स्ड रेट वाले लोन पर आम तौर पर रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर नहीं होता. इसलिए किसी ग्राहक की EMI कितनी बढे़गी, यह सिर्फ RBI के फैसले से तय नहीं होगा. बैंक कितनी बढ़ोतरी पास करता है और लोन का रीसेट कब होता है, यह भी महत्वपूर्ण है.