स्वीप-इन Vs रेगुलर FD: कौन है बेहतर? पैसा निकालने की सुविधा से लेकर ब्याज तक, समझें 5 बड़े अंतर
स्वीप-इन एफडी में बचत खाते की तय सीमा से ज्यादा रकम अपने आप एफडी में जा सकती है और जरूरत पड़ने पर वापस खाते में आ सकती है. रेगुलर एफडी में एकमुश्त रकम तय अवधि के लिए जमा होती है. दोनों में ब्याज, निकासी, शुल्क और समय से पहले एफडी बंद करने के नियम अलग हो सकते हैं.

अगर आप बैंक में पैसा जमा करके बचत खाते से ज्यादा ब्याज कमाना चाहते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर पैसे निकालने की सुविधा भी बनाए रखना चाहते हैं, तो स्वीप-इन एफडी आपके काम आ सकती है. दूसरी तरफ, रेगुलर एफडी उन लोगों के लिए एक विकल्प है, जो अपनी रकम को तय अवधि तक जमा रखना चाहते हैं. दोनों में ब्याज कमाने का मौका मिलता है, लेकिन पैसा निकालने, ब्याज की गणना और समय से पहले एफडी बंद करने के नियम अलग हो सकते हैं.
इसलिए निवेश करने से पहले यह समझना जरूरी है कि स्वीप-इन एफडी और रेगुलर एफडी में क्या अंतर है और आपके लिए कौन-सा विकल्प सही हो सकता है.
Sweep-in FD क्या होती है?
स्वीप-इन एफडी में बचत खाते में तय सीमा से ज्यादा जमा रकम अपने आप एफडी में ट्रांसफर हो सकती है. इससे अतिरिक्त पैसे पर एफडी की दर से ब्याज कमाने का मौका मिलता है. वहीं, जब बचत खाते में पेमेंट के लिए पैसे कम पड़ते हैं, तो बैंक के नियमों के मुताबिक एफडी से रकम वापस खाते में आ सकती है.
इसका फायदा यह है कि अतिरिक्त रकम पर ब्याज कमाने के साथ जरूरत पड़ने पर पैसे तक पहुंच बनाए रखना आसान हो सकता है. हालांकि, कितनी रकम निकाली जा सकती है और ब्याज पर क्या असर पड़ेगा, यह बैंक की शर्तों पर निर्भर करता है.
रेगुलर FD क्या होती है?
रेगुलर एफडी में आप एकमुश्त रकम तय अवधि के लिए जमा करते हैं. इस पर चुनी गई अवधि और बैंक की लागू ब्याज दर के हिसाब से रिटर्न मिलता है. अगर आपको मैच्योरिटी से पहले पैसा निकालना पड़े, तो समय से पहले एफडी बंद करने के नियम लागू हो सकते हैं. इससे मिलने वाला ब्याज कम हो सकता है या जुर्माना लग सकता है.
Sweep-in FD और Regular FD में 5 बड़े अंतर
1. पैसा जमा करने का तरीका
स्वीप-इन एफडी में बचत खाते की तय सीमा से ज्यादा रकम अपने आप एफडी में जा सकती है. रेगुलर एफडी में आपको एकमुश्त रकम जमा करके अपनी पसंद की अवधि चुननी होती है.
2. जरूरत पड़ने पर पैसे निकालने की सुविधा
स्वीप-इन एफडी में बचत खाते में बैलेंस कम होने पर बैंक के नियमों के अनुसार एफडी से पैसा वापस खाते में आ सकता है. रेगुलर एफडी में मैच्योरिटी से पहले पैसा निकालने के लिए समय से पहले निकासी या एफडी बंद करने की प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है.
3. ब्याज और रिटर्न
स्वीप-इन एफडी में एफडी में ट्रांसफर हुई रकम पर संबंधित अवधि की लागू एफडी दर मिल सकती है. हालांकि, बीच में पैसा निकालने से मिलने वाले ब्याज पर असर पड़ सकता है. रेगुलर एफडी में चुनी गई अवधि के हिसाब से ब्याज मिलता है, लेकिन समय से पहले बंद करने पर ब्याज घट सकता है.
4. शुल्क और दूसरी शर्तें
स्वीप-इन एफडी में बचत खाते में न्यूनतम बैलेंस रखने की शर्त और सेवा शुल्क लागू हो सकते हैं. रेगुलर एफडी में भी समय से पहले बंद करने के नियम और जुर्माने बैंक तथा एफडी के प्रकार के हिसाब से अलग हो सकते हैं. सभी बैंकों के लिए एक जैसा शुल्क या नियम नहीं है.
5. किसके लिए कौन-सी एफडी सही?
स्वीप-इन एफडी उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है, जिनके बचत खाते में अतिरिक्त रकम रहती है, लेकिन उन्हें नियमित भुगतान या अचानक आने वाले खर्चों के लिए पैसे भी चाहिए. रेगुलर एफडी उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है, जो किसी तय लक्ष्य के लिए पैसा जमा कर रहे हैं और उसे एक निश्चित अवधि तक नहीं निकालना चाहते.
SBI, HDFC Bank और ICICI Bank की एफडी में क्या सुविधाएं हैं?
SBI की मल्टी ऑप्शन डिपॉजिट स्कीम
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की मल्टी ऑप्शन डिपॉजिट स्कीम यानी एमओडीएस में ऑटो-स्वीप की सुविधा मिलती है. ऑटो-स्वीप की न्यूनतम सीमा 50,000 रुपये है और बचत खाते में कम से कम 35,000 रुपये का बैलेंस रखने का प्रावधान है. इस स्कीम में एफडी 15,000 रुपये से शुरू होती है और इसके बाद 5,000 रुपये के गुणकों में जमा की जा सकती है. खाते में रकम की कमी होने पर एफडी से पैसे वापस निकालने की प्रक्रिया भी 5,000 रुपये की इकाइयों में होती है.
HDFC Bank की एफडी
एचडीएफसी बैंक की एफडी की शर्तों के मुताबिक, स्वीप-इन और आंशिक निकासी सहित समय से पहले पैसा निकालने पर लागू ब्याज दर में 1% की कटौती हो सकती है. हालांकि, यह नियम एफडी के प्रकार और बैंक की लागू शर्तों पर निर्भर करता है. लिंक किए गए बचत खाते में बैलेंस रखने और सेवा शुल्क से जुड़े नियम भी लागू हो सकते हैं.
ICICI Bank की एफडी
5 अक्टूबर 2026 से आईसीआईसीआई बैंक की पात्र अवधि वाली एफडी पर सामान्य ग्राहकों को अधिकतम 6.50% और वरिष्ठ नागरिकों को 7.10% तक ब्याज मिल सकता है. यह दरों की व्यापक सीमा है. इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्वीप-इन लेनदेन पर यही प्रभावी ब्याज मिलेगा.
दोनों एफडी पर कितना ब्याज मिलता है?
स्वीप-इन एफडी पर आमतौर पर संबंधित अवधि की रेगुलर एफडी वाली लागू दर के हिसाब से ब्याज मिलता है. उदाहरण के लिए, एसबीआई की सामान्य एफडी दरें अवधि के अनुसार 3.05% से 6.40% सालाना तक बताई गई हैं. हालांकि, स्वीप-इन एफडी का वास्तविक रिटर्न जमा की शर्तों और निकासी के समय पर निर्भर करेगा. इसलिए सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला न करें. न्यूनतम बैलेंस, समय से पहले निकासी, जुर्माना और एफडी की अवधि से जुड़े नियम भी जरूर देखें.
कौन-सी एफडी बेहतर है?
अगर आपके बचत खाते में अक्सर अतिरिक्त पैसा पड़ा रहता है और आपको अचानक खर्च के लिए रकम की जरूरत पड़ सकती है, तो स्वीप-इन एफडी पर विचार कर सकते हैं. इससे अलावा पैसे पर एफडी की दर से ब्याज कमाने और जरूरत पड़ने पर रकम तक पहुंच बनाए रखने में मदद मिल सकती है.
वहीं, अगर आपने किसी तय लक्ष्य के लिए पैसा जमा किया है और उसे कुछ समय तक निकालने की जरूरत नहीं है, तो रेगुलर एफडी पर विचार किया जा सकता है.
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