₹6000 का बिल है? ₹2,000-₹2,000 करके 3 बार में कर सकते हैं UPI पेमेंट? पहले जान लें ये नियम

6000 रुपये के बिल को तीन 2000 रुपये के यूपीआई पेमेंट में बांटना मौजूदा प्रस्ताव के तहत अलग-अलग लेनदेन माना जा सकता है. लेकिन एक ही दुकानदार को कम समय में बार-बार समान रकम भेजने पर बैंक का सुरक्षा सिस्टम इसे असामान्य पैटर्न मान सकता है. इससे अस्थायी रोक या यूपीआई सेवा पर असर पड़ सकता है. एमडीआर का खर्च सामान्य तौर पर दुकानदार का होता है.

यूपीआई पेमेंट Image Credit: @Tv9

UPI Payment: अगर आप किसी बड़े बिल को 2000-2000 रुपये के छोटे-छोटे यूपीआई पेमेंट में बांटकर पेमेंट करने की सोच रहे हैं, तो सावधान रहना जरूरी है. ऐसा इसलिए क्योंकि एक ही दुकानदार को कम समय में बार-बार एक जैसी रकम भेजने पर बैंक का फ्रॉड मॉनिटरिंग सिस्टम इस पैटर्न को असामान्य मान सकता है.

business today की रिपोर्ट के मुताबिक, 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से ज्यादा के व्यक्ति से व्यापारी यानी P2M यूपीआई लेनदेन पर 0.4% एमडीआर लगेगा. वहीं 75,000 रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर एमडीआर अधिकतम 300 रुपये प्रति लेनदेन होगा. 2000 रुपये तक के पेमेंट और व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P यूपीआई लेनदेन इस शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर किसी ग्राहक का 6000 रुपये का बिल है और वह तीन बार 2000 रुपये का भुगतान करता है, तो क्या ऐसा करना सही रहेगा?

₹6,000 के बिल को 3 बार ₹2,000 में बांट सकते हैं?

दिए गए प्रस्ताव के मुताबिक, एमडीआर की गणना हर लेनदेन के आधार पर अलग-अलग होगी. इसलिए 6000 रुपये के बिल के लिए किए गए तीन अलग-अलग 2000 रुपये के पेमेंट हर बार तय सीमा के भीतर आएंगे. इसके उलट अगर पूरा 6000 रुपये एक ही लेनदेन में चुकाया जाता है, तो उस पर 0.4% एमडीआर लागू होगा. लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि ग्राहक बार-बार पेमेंट बांटने को पूरी तरह जोखिम से मुक्त मान लें.

एक ही दुकानदार को बार-बार पेमेंट पर बैंक की नजर

रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI के दिशा-निर्देशों के तहत इस तरह के पेमेंट बांटने पर कोई आधिकारिक दैनिक सीमा नहीं है. हालांकि, बैंक अपने फ्रॉड रोकने वाले सिस्टम के तहत ग्राहकों के लेनदेन के पैटर्न पर लगातार नजर रखते हैं. अगर कोई ग्राहक कम समय में एक ही दुकानदार को बार-बार बिल्कुल एक जैसी रकम भेजता है, तो यह पैटर्न बैंक के सिस्टम को असामान्य लग सकता है.

ऐसे मामले में बैंक का ऑटोमेटिक सुरक्षा सिस्टम अतिरिक्त जांच शुरू कर सकता है. कुछ परिस्थितियों में अस्थायी रूप से लेनदेन रोका जा सकता है या यूपीआई सेवा पर रोक लग सकती है.

एक और दिक्कत, दैनिक लेनदेन की सीमा

बार-बार 2000 रुपये के पेमेंट करने पर सिर्फ फ्रॉड मॉनिटरिंग ही चिंता का विषय नहीं है. बैंक खातों में आमतौर पर एक दिन में किए जा सकने वाले लेनदेन की संख्या की सीमा भी होती है. ऐसे में अगर कोई ग्राहक कई बड़े बिलों को छोटे-छोटे 2000 रुपये के पेमेंट में बांटता है, तो उसके खाते की दैनिक लेनदेन सीमा जल्दी पूरी हो सकती है यानी हर छोटा पेमेंट अलग से सीमा के अंदर होने के बावजूद, बहुत ज्यादा बार पेमेंट करने पर ग्राहक को बैंक की दूसरी सीमाओं का सामना करना पड़ सकता है.

क्या दुकानदार 3 अलग-अलग पेमेंट लेने से मना कर सकता है?

किसी एक खरीदारी के लिए कई छोटे यूपीआई पेमेंट करने पर मौजूदा व्यवस्था में ग्राहकों को साफ तौर पर रोकने का प्रावधान नहीं बताया गया है. लेकिन इसका यह मतलब भी नहीं है कि ग्राहक दुकानदार से तीन अलग-अलग पेमेंट लेने की मांग कर सकता है. दुकानदार अपने हिसाब-किताब, बिल का मिलान, रिफंड या धोखाधड़ी रोकने जैसे कारणों से एक बिल के लिए एक ही पेमेंट मांग सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, पेमेंट का तरीका एमडीआर की सीमा देखकर तय करने के बजाय वास्तविक खरीदारी और कारोबारी लेनदेन के आधार पर होना चाहिए.

यानी 6000 रुपये का बिल है तो ग्राहक तकनीकी तौर पर तीन बार 2000 रुपये का पेमेंट कर सकता है, लेकिन दुकानदार के लिए यह जरूरी नहीं है कि वह इस तरीके से पेमेंट स्वीकार करे.

सबसे जरूरी बात, MDR ग्राहक से नहीं लिया जाता

यहां एक और महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है. एमडीआर दुकानदार पर लगने वाला शुल्क है, ग्राहक पर नहीं. आम तौर पर दुकानदार को एमडीआर का खर्च ग्राहक से अलग से वसूल नहीं करना चाहिए. अगर कोई दुकानदार ग्राहक से अलग से यूपीआई एमडीआर के नाम पर पैसा मांगता है, तो ग्राहक इसे देने से मना कर सकता है. ऐसी स्थिति में ग्राहक अपने यूपीआई ऐप या संबंधित बैंक के जरिए इसकी शिकायत कर सकता है.

क्या आगे बदल सकता है नियम?

फिलहाल 2000 रुपये की सीमा हर अलग लेनदेन के स्तर पर लागू होती है. लेकिन अगर बड़ी संख्या में लोग एक ही बिल को छोटे-छोटे पेमेंट में बांटकर एमडीआर से बचने की कोशिश करते हैं, तो फ्यूचर में यूपीआई व्यवस्था में ऐसे लेनदेन को जोड़कर देखने या इस तरह की व्यवस्था को रोकने के लिए नए नियम बनाए जा सकते हैं. इसलिए 6000 रुपये के बिल के लिए तीन 2000 रुपये के पेमेंट करना मौजूदा प्रस्ताव के तहत अलग-अलग लेनदेन के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन बार-बार ऐसा करने पर बैंक के सुरक्षा सिस्टम में यह पैटर्न नजर आ सकता है.

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