आधार कार्ड की छुट्टी! सरकारी योजनाओं के पैसे के लिए अब वोटर ID से होगी पहचान?
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले लोगों के लिए पहचान से जुड़ा बड़ा बदलाव हो सकता है. केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने संकेत दिया है कि लाभार्थियों की पहचान और भुगतान के लिए आधार कार्ड की जगह वोटर आईडी और बायोमेट्रिक जानकारी का इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, सरकार ने अभी इसकी आधिकारिक समयसीमा और नियम घोषित नहीं किए हैं.

सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले लोगों के लिए पहचान से जुड़ा बड़ा बदलाव हो सकता है. केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने संकेत दिया है कि लाभार्थियों को भुगतान करने के लिए आधार कार्ड की जगह वोटर आईडी (EPIC नंबर) और बायोमेट्रिक पहचान का इस्तेमाल किया जा सकता है. इस व्यवस्था में लाभार्थियों की पहचान फिंगरप्रिंट जैसे बायोमेट्रिक डेटा से भी की जाएगी.
आधार कार्ड की जगह वोटर आईडी से होगी पहचान?
केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह, जिन्हें ललन सिंह के नाम से भी जाना जाता है, ने 30 अक्टूबर को आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में यह बात कही. उन्होंने कहा कि अब सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को भुगतान करने के लिए आधार कार्ड मुख्य पहचान का आधार नहीं रहेगा. मंत्री के मुताबिक, लाभार्थियों की पहचान के लिए बायोमेट्रिक जानकारी और वोटर आईडी का EPIC नंबर इस्तेमाल किया जाएगा. इसके आधार पर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.
किन लोगों पर पड़ेगा इस बदलाव का असर?
इंडियन एक्प्रेस की खबर के अनुसार अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो सरकारी योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता पाने वाले लोगों को अपनी पहचान साबित करने के लिए वोटर आईडी नंबर और बायोमेट्रिक जानकारी देनी पड़ सकती है.
फिलहाल कई सरकारी योजनाओं में आधार से जुड़े बैंक खातों के जरिए पैसा भेजा जाता है. इनमें पीएम किसान, ग्रामीण आवास योजना, ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम और बुजुर्गों, विधवाओं तथा दिव्यांगों को मिलने वाली पेंशन जैसी योजनाएं शामिल हैं. हालांकि, मंत्री ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह बदलाव किन योजनाओं में और कब से लागू होगा.
क्या पूरी तरह बंद हो जाएगा आधार कार्ड?
मंत्री के बयान का मतलब यह नहीं है कि आधार कार्ड का इस्तेमाल पूरी तरह बंद हो जाएगा. फिलहाल बात सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान और भुगतान की प्रक्रिया में बदलाव की है.
आधार कार्ड बनवाने की सुविधा आसानी से उपलब्ध होने का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि केवल आधार नंबर को लाभार्थी की पहचान का मुख्य आधार नहीं बनाया जाना चाहिए. इसके बजाय बायोमेट्रिक जानकारी और वोटर आईडी नंबर का इस्तेमाल किया जा सकता है.
अभी किन सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं?
इस प्रस्तावित बदलाव को लेकर अभी कई बातें स्पष्ट नहीं हैं. सरकार ने यह नहीं बताया है कि नई व्यवस्था किन मंत्रालयों और योजनाओं पर लागू होगी. इसके अलावा इसे लागू करने की तारीख और पूरी प्रक्रिया को लेकर भी कोई विस्तृत दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं.
ऐसे में फिलहाल लाभार्थियों को घबराने की जरूरत नहीं है. जब तक सरकार की ओर से आधिकारिक आदेश जारी नहीं होता, तब तक मौजूदा व्यवस्था के तहत ही योजनाओं का लाभ मिलता रहेगा.