शेयर बाजार से निकाले ₹2.8 लाख करोड़, IPO में लगाए ₹47000 करोड़; जानें क्यों रणनीति बदल रहे हैं FII

भारतीय शेयर बाजार में FIIs बिकवाली कर रहे हैं. 2026 में अब तक FIIs ने शेयरों से 2.8 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं. इसके बावजूद IPO में उनकी दिलचस्पी बनी हुई है. FIIs ने इसी दौरान IPO के जरिए 47000 करोड़ रुपये से ज्यादा लगाए हैं. महंगे वैल्यूएशन और धीमी कमाई वाले शेयरों से दूरी बनाकर विदेशी निवेशक नए सेक्टर और IPO में निवेश का मौका तलाश रहे हैं. यह भारत से दूरी नहीं बल्कि नई रणनीति में बदलाव है.

FII ने 2026 में अब तक सेकेंडरी मार्केट से करीब 2.8 लाख करोड़ रुपये निकाले. Image Credit: Canva/ Money9

शेयर मार्केट में विदेशी निवेशकों यानी FII की लगातार बिकवाली देखने को मिल रही है. 2026 में अब तक FIIs भारतीय शेयर मार्केट में लिस्टेड शेयरों से करीब 2.8 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं. इसके बावजूद भारत में उनका निवेश पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. इसी दौरान विदेशी निवेशकों ने IPO के जरिए 47000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है. इससे संकेत मिलता है कि FII भारत से निकलने के बजाय अपनी निवेश रणनीति बदल रहे हैं. अब उनकी दिलचस्पी पुराने शेयरों के बजाय चुनिंदा नए IPO और नए सेक्टर में बढ़ रही है.

शेयर मार्केट से क्यों पैसा निकाल रहे FII

इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी निवेशकों को भारतीय मार्केट में कई पुराने और बड़े शेयर महंगे नजर आ रहे हैं. इसके अलावा कुछ कंपनियों में कमाई की रफ्तार भी पहले के मुकाबले धीमी हुई है. ऐसे में FII मौजूदा कंपनियों के शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं. दूसरी तरफ दूसरे उभरते मार्केटों में उन्हें बेहतर वैल्यूएशन के मौके दिखाई दे रहे हैं. यही वजह है कि विदेशी निवेशक सेकेंडरी मार्केट में बिकवाली कर रहे हैं.

IPO में क्यों बढ़ रही FII की दिलचस्पी

IPO में निवेश करने से विदेशी निवेशकों को एक तय कीमत पर बड़ी मात्रा में शेयर खरीदने का मौका मिलता है. एंकर और QIB आवंटन के जरिए बड़े निवेशक एक ही बार में बड़ी हिस्सेदारी ले सकते हैं. अगर यही शेयर खुले मार्केट से खरीदे जाएं तो ज्यादा खरीदारी से शेयर का भाव तेजी से बढ़ सकता है. इससे निवेश की लागत बढ़ सकती है. IPO में पहले से तय कीमत पर खरीदारी होने से FII को यह परेशानी कम होती है.

IPO में वैल्यूएशन और नए सेक्टर का फायदा

विदेशी निवेशकों के लिए IPO का एक बड़ा फायदा यह भी है कि उन्हें नए और तेजी से बढ़ते सेक्टर में प्रवेश का मौका मिलता है. मौजूदा शेयर मार्केट में बैंकिंग IT और FMCG जैसे बड़े सेक्टर का वजन ज्यादा है. इन सेक्टर में ग्रोथ धीमी होने के कारण FII अपनी हिस्सेदारी घटा रहे हैं. वहीं नए IPO के जरिए इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंज्यूमर टेक्नोलॉजी रिन्यूएबल एनर्जी और कैपिटल मार्केट जैसे क्षेत्रों में निवेश का मौका मिल रहा है.

47000 करोड़ से ज्यादा IPO में लगाए

2026 में अब तक FIIs ने सेकेंडरी मार्केट से करीब 2.8 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं. इसके उलट IPO और प्राइमरी मार्केट में उनका निवेश 47000 करोड़ रुपये से ज्यादा रहा है. यह आंकड़ा बताता है कि विदेशी निवेशक भारत को लेकर पूरी तरह नेगेटिव नहीं हैं. वे मौजूदा शेयरों की कीमत और ग्रोथ को देखते हुए चुनिंदा जगहों पर पैसा लगा रहे हैं. IPO उनके लिए भारत के नए ग्रोथ अवसरों में निवेश करने का एक रास्ता बन गया है.

IPO मार्केट भी हो रहा मजबूत

भारत में IPO मार्केट का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है. SEBI से मंजूरी पा चुके और फाइल किए गए IPO का संभावित आकार 4.7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बताया गया है. Jio Platforms National Stock Exchange PhonePe और SBI Funds Management जैसी कंपनियों के संभावित IPO पर भी निवेशकों की नजर है. जुलाई और अगस्त में ही करीब 49600 करोड़ रुपये जुटाए गए. हालांकि IPO मार्केट में घरेलू निवेशकों की भूमिका भी काफी मजबूत रही है.

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FII की नई रणनीति क्या बताती है

FII की मौजूदा एक्टिविटी से साफ है कि विदेशी निवेशक भारत से पूरी तरह दूरी नहीं बना रहे हैं. वे महंगे लगने वाले पुराने शेयरों से पैसा निकालकर बेहतर वैल्यूएशन और नए ग्रोथ अवसरों की तलाश कर रहे हैं. IPO उन्हें तय कीमत पर बड़ी हिस्सेदारी लेने और नए सेक्टर में प्रवेश का मौका दे रहे हैं. इसलिए शेयर मार्केट में FII की बिकवाली को भारत से पूरी तरह मोहभंग के तौर पर देखना सही नहीं होगा. यह विदेशी निवेशकों की बदली हुई रणनीति का संकेत है.

डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.