क्या त्योहारों में और सस्ता होगा सोना, 6 साल के निचले स्तर पर डिमांड, 2026 में सिर्फ 650 टन रह सकती है खरीदारी
देश में सोने की मांग 2026 में घटकर करीब 650 टन रह सकती है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, ऐसा होने पर यह 2020 के बाद सबसे निचला स्तर होगा. सितंबर तिमाही में सोने की कुल मांग 29 फीसदी गिरकर 162.5 टन रह गई. इस दौरान ज्वेलरी की मांग में 20 फीसदी और निवेश के लिए सोने की खरीद में 40 फीसदी की गिरावट आई. रिकॉर्ड कीमतों, कमजोर मानसून और बढ़ती महंगाई ने खरीदारी पर दबाव डाला है.

देश में सोने की मांग में गिरावट आने का अनुमान है. 2026 में देश में सोने की कुल मांग करीब 650 टन रह सकती है. ऐसा हुआ तो 2020 के बाद यह सबसे निचला स्तर होगा. सोने की रिकॉर्ड कीमतों, कमजोर मानसून और बढ़ती महंगाई ने खरीदारी पर दबाव डाला है. सितंबर तिमाही में भी सोने की मांग में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. इसका असर ज्वेलरी और निवेश, दोनों तरह की खरीदारी पर पड़ा है.
सितंबर तिमाही में 29% गिरी सोने की मांग
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के मुताबिक, सितंबर तिमाही में भारत में सोने की कुल मांग 29 फीसदी गिरकर 162.5 टन रह गई. इस दौरान ज्वेलरी की मांग में 20 फीसदी और निवेश के लिए सोने की खरीदारी में 40 फीसदी की गिरावट आई. सोने की रिकॉर्ड कीमतों के चलते ग्राहकों ने खरीदारी घटा दी है. ऊंची कीमतों का असर आम लोगों के साथ-साथ निवेशकों पर भी पड़ा है. निवेश के लिए सोना खरीदने वालों का रुझान भी कमजोर हुआ है.
कमजोर मानसून से ग्रामीण मांग प्रभावित
भारत में सोने की आधी से ज्यादा मांग ग्रामीण इलाकों से आती है. ऐसे में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमजोरी सोने की खरीदारी के लिए बड़ी चुनौती बन गई है. कमजोर मानसून ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर डाला है. इससे किसानों की आमदनी प्रभावित हुई है और सोना खरीदने की उनकी क्षमता पर दबाव पड़ा है. ग्रामीण क्षेत्रों में मांग कमजोर रहने से देश में सोने की कुल खरीदारी प्रभावित हो रही है.
ईरान युद्ध और महंगाई का भी असर
ईरान युद्ध के बाद बढ़ती महंगाई और रहने-खाने की लागत ने भी लोगों की खरीदने की क्षमता को प्रभावित किया है. घरेलू खर्च बढ़ने के कारण सोने की खरीदारी के लिए उपलब्ध रकम पर दबाव पड़ा है. इस तरह रिकॉर्ड कीमतों, कमजोर मानसून और बढ़ती महंगाई का असर सोने की मांग पर दिखाई दे रहा है. सितंबर तिमाही में भारत का सोना आयात भी घटा है. हालांकि, अनौपचारिक आयात बढ़ने के संकेत मिले हैं.
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दिवाली और शादी के सीजन से उम्मीद
दिवाली और शादी-ब्याह का सीजन दिसंबर तिमाही में सोने की डिमांड को सपोर्ट दे सकता है. हालांकि, ऊंची कीमतों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमजोरी के कारण खरीदारी में बड़ी रिकवरी की उम्मीद कम है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुमान के मुताबिक, 2026 में भारत की सोने की मांग करीब 650 टन रह सकती है. यह स्तर 2020 के बाद सबसे कम होगा. ऐसे में त्योहारों और शादियों के सीजन के बावजूद सोने की मांग में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना सीमित दिखाई दे रही है.