SBI Q2 Results: स्टैंडअलोन प्रॉफिट 14% बढ़कर ₹23038 करोड़ हुआ, NII में 15% इजाफा; लोन बुक ₹52 लाख करोड़ पार
SBI Q2 Results: इस ग्रोथ को बैंक की लोन बुक में बढ़ोतरी से सपोर्ट मिला, जो तिमाही के दौरान 52 लाख करोड़ रुपये को पार कर गई. SBI के कुल डिपॉजिट सालाना आधार पर 12% बढ़कर 62.78 लाख करोड़ रुपये हो गए. SBI की एसेट क्वालिटी में सुधार जारी रहा.
Highlights
- ऑपरेटिंग प्रॉफिट साल-दर-साल 7 फीसदी बढ़ा.
- इंटरेस्ट खर्च 8% की धीमी रफ्तार से बढ़कर 82876 करोड़ रुपये हो गया.
- कृषि क्षेत्र में दिए गए लोन सालाना आधार पर 23% बढ़े.
SBI Q2 Results: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए. बैंक ने बताया कि दूसरी तिमाही में उसका स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर (YoY) 14 फीसदी बढ़कर 23,038 करोड़ रुपये हो गया, पिछले साल की इसी तिमाही में यह आंकड़ा 20,160 करोड़ रुपये था.
नेट इंटरेस्ट इनकम में कितना इजाफा?
रिपोर्टिंग पीरियड में नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) सालाना आधार पर 15 फीसदी बढ़कर 49,143 करोड़ रुपये हो गई.
इस ग्रोथ को बैंक की लोन बुक में बढ़ोतरी से सपोर्ट मिला, जो तिमाही के दौरान 52 लाख करोड़ रुपये को पार कर गई. ऑपरेटिंग प्रॉफिट साल-दर-साल 7 फीसदी बढ़कर 31,904 करोड़ रुपये से 34,226 करोड़ रुपये हो गया.
इंटरेस्ट इनकम 10 फीसदी बढ़कर 1.32 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि इंटरेस्ट खर्च 8% की धीमी रफ्तार से बढ़कर 82,876 करोड़ रुपये हो गया.
बैड लोन प्रोविजन
बैड लोन के लिए प्रोविजन में भारी कमी ने भी SBI के प्रॉफिट को सहारा दिया. लोन-लॉस प्रोविजन एक साल पहले के 4,132 करोड़ रुपये से 33% घटकर 2,759 करोड़ रुपये रह गए. यह पिछली तिमाही के 3,359 करोड़ रुपये के आंकड़े से भी कम है.
लोन बुक
30 सितंबर तक, SBI के ग्रॉस एडवांस (कुल दिए गए लोन) सालाना आधार पर 18% बढ़कर 52.08 लाख करोड़ रुपये हो गए, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 44.2 लाख करोड़ रुपये था. घरेलू एडवांस में 17% की बढ़ोतरी हुई, जबकि विदेशी एडवांस में रुपये के हिसाब से 23% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह ग्रोथ व्यापक रहा, जिसमें कृषि, छोटे व्यवसाय, रिटेल और कॉर्पोरेट लोन – सभी क्षेत्रों में डबल-डिजिट में बढ़ोतरी देखी गई.
कृषि सेक्टर के लोन में 23% की बढ़ोतरी
कृषि क्षेत्र में दिए गए लोन सालाना आधार पर 23% बढ़े, जबकि छोटे और मध्यम उद्यमों (SME) को दिए गए लोन में 22% की बढ़ोतरी हुई. रिटेल पर्सनल लोन 14% बढ़कर 18.25 लाख करोड़ रुपये हो गए. रिटेल पोर्टफोलियो के भीतर, होम लोन 11.9% बढ़कर 9.86 लाख करोड़ रुपये हो गए, जो एक साल पहले 8.80 लाख करोड़ रुपये थे.
कॉरपोरेट लोन
कॉरपोरेट लोन 16.1% बढ़कर 14.39 लाख करोड़ रुपये हो गए, जो यह दिखाता है कि व्यवसायों की ओर से लोन की मांग लगातार बनी हुई है. लोन देने में इस विस्तार से SBI के कुल कारोबार (जिसमें डिपॉजिट और एडवांस दोनों शामिल हैं) को लगभग 115 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने में मदद मिली.
डिपॉजिट (जमा राशि)
SBI के कुल डिपॉजिट सालाना आधार पर 12% बढ़कर 62.78 लाख करोड़ रुपये हो गए, जबकि एक साल पहले यह 55.92 लाख करोड़ रुपये थे. पिछली तिमाही के मुकाबले डिपॉजिट में 4% की बढ़ोतरी हुई. कम लागत वाले करंट अकाउंट और सेविंग्स अकाउंट (CASA) डिपॉजिट में 8% की बढ़ोतरी हुई, जबकि घरेलू टर्म डिपॉजिट में 14% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
हालांकि, CASA रेश्यो एक साल पहले के 39.63% से घटकर 38.32% रह गया. इसका कारण यह है कि कम लागत वाले डिपॉजिट की तुलना में टर्म डिपॉजिट में तेजी से वृद्धि हुई. डिपॉजिट के इस बदलाव के बावजूद, बैंक ने इस तिमाही के दौरान अपने ‘नेट इंटरेस्ट मार्जिन’ में सुधार दर्ज किया.
जून तिमाही में घरेलू नेट इंटरेस्ट मार्जिन 3% से बढ़कर 3.11% हो गया, जो 11 बेसिस पॉइंट्स का सुधार है. यह एक साल पहले के 3.08% के मुकाबले भी 3 बेसिस पॉइंट्स अधिक था. पूरे बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 2.94% रहा, जिसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 8 बेसिस पॉइंट्स का सुधार हुआ है.
बैड लोन में कमी
SBI की एसेट क्वालिटी में सुधार जारी रहा. इसका ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) रेश्यो एक साल पहले के 1.73% और जून तिमाही के 1.47% से घटकर 1.39% पर आ गया. नेट NPA रेश्यो एक साल पहले के 0.42% से घटकर 0.36% रह गया.
कुल रकम के हिसाब से देखें तो, ग्रॉस बैड लोन 76,243 करोड़ रुपये से घटकर 72,529 करोड़ रुपये रह गए. नेट बैड लोन 18,546 करोड़ रुपये रहा.
बैंक का स्लिपेज रेश्यो (जो यह मापता है कि कितने नए लोन बैड लोन में बदल रहे हैं) एक साल पहले के 0.45% से बेहतर होकर 0.41% हो गया. क्रेडिट कॉस्ट 0.39% से घटकर 0.22% रह गई, जो प्रोविजनिंग के कम बोझ को दर्शाती है. राइट-ऑफ किए गए अकाउंट्स को मिलाकर, प्रोविजन कवरेज रेश्यो 91.83% रहा.
इस तिमाही के दौरान SBI ने अपनी कैपिटल स्थिति को भी मजबूत किया. इसका कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो एक साल पहले के 14.62% से बढ़कर 16.09% हो गया, जबकि इसका कॉमन इक्विटी टियर-1 रेश्यो 11.47% से बेहतर होकर 13.34% पर पहुंच गया.
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