क्या CAS के नियमों में कुछ बदलाव कर सकता है SEBI? कैपिटल मार्केट से जुड़े शेयरों में बंपर तेजी

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने अगस्त में उन स्टॉक्स के लिए 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) नाम का एक नया सिस्टम शुरू किया था, जिनसे फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स जुड़े हुए हैं. इस सिस्टम के तहत, ट्रेडिंग डे के आखिर में एक छोटा ऑक्शन स्टॉक की क्लोजिंग प्राइस तय करने में मदद करता है.

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में क्या होगा बदलाव? Image Credit: money9live

मंगलवार 6 अक्टूबर को BSE, NSE और दूसरे कैपिटल मार्केट स्टॉक्स में 3 फीसदी तक की बढ़त हुई. यह बढ़त एक रिपोर्ट के बाद देखने को मिली, जिसमें कहा गया था कि मार्केट रेगुलेटर SEBI कम से कम एक साल के लिए डेरिवेटिव्स सेटलमेंट की कीमतें तय करने के लिए ‘क्लोजिंग ऑक्शन’ का इस्तेमाल बंद कर सकता है.

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने अगस्त में उन स्टॉक्स के लिए ‘क्लोजिंग ऑक्शन सेशन’ (CAS) नाम का एक नया सिस्टम शुरू किया था, जिनसे फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स जुड़े हुए हैं.

CAS में क्या होता है?

इस सिस्टम के तहत, ट्रेडिंग डे के आखिर में एक छोटा ऑक्शन स्टॉक की क्लोजिंग प्राइस तय करने में मदद करता है. यह नया प्रोसेस US और हांगकांग जैसे ग्लोबल मार्केट्स में इस्तेमाल होने वाले प्रोसेस जैसा ही है. हालांकि, एक्सपायरी के दिनों में डेरिवेटिव्स की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के कारण रेगुलेटर को इसकी समीक्षा करनी पड़ी.

कैपिटल मार्केट्स इंडेक्स में उछाल

6 अक्टूबर को सुबह 9:45 बजे, निफ्टी कैपिटल मार्केट्स इंडेक्स 1.2% ऊपर ट्रेड कर रहा था. इसमें मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज, BSE, एंजेल वन और Groww सबसे आगे थे, जो क्रमशः 2.9%, 2.5%, 2.2% और 2% ऊपर ट्रेड कर रहे थे. हाल ही में लिस्ट हुए NSE के शेयर 1.3% ऊपर 1,746 रुपये प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहे थे.

नियमों में बदलाव के लिए सुझाव

वीकेंड पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में, SEBI ने कहा कि उसे पिछले महीने जारी कंसल्टेशन पेपर के जवाब में नियमों में बदलाव के लिए 20,000 सुझाव मिले हैं.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इसके बजाय, डेरिवेटिव प्राइसिंग तय करने के लिए ट्रेडिंग के आखिरी 30 मिनट की ‘वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस’ का इस्तेमाल किया जा सकता है. उम्मीद है कि SEBI इस महीने के आखिर तक ये बदलाव लागू कर देगा.

इस नए तरीके से भारत US और यूरोप के मार्केट्स के साथ बेहतर ढंग से जुड़ पाएगा. वहां डेरिवेटिव्स सेटलमेंट अक्सर खास प्राइसिंग सिस्टम का इस्तेमाल करके तय किया जाता है, जिसमें एक ही क्लोजिंग ऑक्शन के बजाय तय ट्रेडिंग पीरियड के दौरान ‘वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस’ जैसे तरीके शामिल होते हैं.

10 मिनट की CAS विंडो

रेगुलेटर ने सितंबर में अपनी समीक्षा योजनाओं में यह भी प्रस्ताव दिया था कि 10 मिनट की CAS विंडो के दौरान इंडेक्स की इंडिकेटिव वैल्यू पब्लिश करना बंद कर दिया जाए. सिर्फ अलग-अलग स्टॉक्स की इंडिकेटिव कीमतें ही पब्लिश की जाएं, क्योंकि इंडेक्स वैल्यू उस समय भी तय हो रही होती है.

रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि ज्यादा फीडबैक कमेंट्स में कहा गया कि एडवांस्ड ट्रेडिंग डेस्क उन वैल्यूज को स्वतंत्र रूप से फिर से बना सकते हैं. उन्हें हटाने से हेरफेर की चिंताओं को दूर किए बिना पारदर्शिता कम हो जाएगी.

फीडबैक में टाइमटेबल का समर्थन

फीडबैक में मौजूदा टाइमटेबल को मोटे तौर पर वैसा ही बनाए रखने का भी समर्थन किया गया, जिसमें रेगुलर ट्रेडिंग दोपहर 3:30 बजे तक और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग दोपहर 3:45 बजे तक जारी रहे, क्योंकि इससे प्राइस डिस्कवरी में मदद मिलेगी और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को कैश मार्केट की क्लोजिंग प्रोसेस के साथ बेहतर ढंग से अलाइन किया जा सकेगा.

यह भी पढ़ें: Jio IPO की ग्रे मार्केट में धूम, GMP ने अभी से ही पकड़ी रफ्तार, निवेशकों के लिए कब खुल सकता है ऑफर?