LIC का OFS आज से खुलेगा, सरकार बेचेगी 6.5% तक हिस्सेदारी; 382 रुपये तय हुआ फ्लोर प्राइस
केंद्र सरकार ने LIC में 2.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए OFS लॉन्च किया है. ग्रीन शू ऑप्शन के तहत अतिरिक्त 4 फीसदी हिस्सेदारी भी बेची जा सकती है, जिससे कुल बिक्री 6.5 फीसदी तक पहुंच सकती है. OFS का फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है. गैर-खुदरा निवेशकों के लिए OFS आज से खुल गया है, जबकि खुदरा निवेशक 5 अगस्त को बोली लगा सकेंगे.

LIC OFS: केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी LIC में अपनी हिस्सेदारी घटाने के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) लाने का ऐलान किया है. सरकार शुरुआती चरण में 2.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी, जबकि मांग अधिक रहने पर ग्रीन शू ऑप्शन के तहत अतिरिक्त 4 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का विकल्प भी रखा गया है. इस तरह सरकार कुल 6.5 फीसदी तक हिस्सेदारी बेच सकती है. इस OFS के लिए 382 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया है.
सोमवार को हुई घोषणा
DIPAM ने सोमवार को इसकी घोषणा की. विभाग के मुताबिक, नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए OFS आज (4 अगस्त) खुलेगा, जबकि रिटेल निवेशक 5 अगस्त को इसमें बोली लगा सकेंगे. DIPAM के सचिव अरुणिश चावला ने एक्स पर कहा कि सरकार LIC में 2.5 फीसदी इक्विटी बेच रही है और जरूरत पड़ने पर ग्रीन शू ऑप्शन के जरिए अतिरिक्त 4 फीसदी हिस्सेदारी भी बेची जा सकती है.
क्या है OFS और ग्रीन शू ऑप्शन
ऑफर फॉर सेल (OFS) एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके जरिए प्रमोटर या सरकार शेयर बाजार के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी बेचती है. इसमें पहले इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स से बोली मंगाई जाती है और उसके बाद रिटेल इन्वेस्टर्स को हिस्सा लेने का मौका मिलता है.
वहीं, ग्रीन शू ऑप्शन का मतलब है कि यदि OFS को निवेशकों की ओर से अपेक्षा से अधिक प्रतिक्रिया मिलती है, तो सरकार पहले से तय अतिरिक्त हिस्सेदारी भी बेच सकती है. LIC के मामले में सरकार ने 2.5 फीसदी हिस्सेदारी के साथ 4 फीसदी अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने का विकल्प रखा है.
सरकार के पास अभी कितनी हिस्सेदारी
मौजूदा समय में केंद्र सरकार के पास LIC की करीब 96.5 फीसदी हिस्सेदारी है. मई 2022 में LIC की शेयर बाजार में लिस्टिंग देश के इतिहास का सबसे बड़ा IPO थी. हालांकि लिस्टिंग के बाद भी सरकार की हिस्सेदारी काफी अधिक बनी हुई है. यदि यह OFS पूरी तरह सफल रहता है और ग्रीन शू ऑप्शन का भी इस्तेमाल होता है, तो सरकार की हिस्सेदारी घटकर करीब 90 फीसदी के आसपास पहुंच सकती है. हालांकि, इसके बाद भी सरकार LIC की सबसे बड़ी शेयरधारक बनी रहेगी.
MPS नियम पूरा करना सरकार की प्राथमिकता
SEBI के नियमों के मुताबिक, शेयर बाजार में सूचीबद्ध सभी कंपनियों में कम से कम 25 फीसदी पब्लिक शेयरहोल्डिंग होना जरूरी है. इसे मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) कहा जाता है. LIC में फिलहाल पब्लिक शेयरहोल्डिंग केवल करीब 3.5 फीसदी है, जो नियामकीय आवश्यकता से काफी कम है. ऐसे में सरकार चरणबद्ध तरीके से अपनी हिस्सेदारी बेचकर पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ा रही है. यह OFS उसी प्रक्रिया का हिस्सा है.
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