Opening Bell: सेंसेक्स 100 अंक चढ़ा, निफ्टी 23450 के पार; SBI और ITC में 1-1% की बढ़त
Opening Bell: बुधवार के सेशन में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स पर भारी बिकवाली का दबाव रहा, क्योंकि जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमतें $100 प्रति बैरल के स्तर से ऊपर चली गईं. गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 25 पैसे गिरकर 95.33 पर आ गया.

Opening Bell: ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, गुरुवार 10 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ खुले. इस तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के स्तर से ऊपर बनी रहीं.
शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स 38.07 अंक बढ़कर 74,809.95 पर पहुंच गया. 50 शेयरों वाला NSE निफ्टी 9.85 अंक बढ़कर 23,439.20 पर पहुंच गया.
ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.20 प्रतिशत गिरकर 101 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.
सेंसेक्स के टॉप गेनर्स और लूजर्स
शुरुआती कारोबार में SBI, Axis Bank और ITC सेंसेक्स के टॉप गेनर्स में शामिल रहे, जबकि M&M और Tata Steel सबसे अधिक गिरावट वाले शेयरों में रहे.
IT में रिकवरी, ऑटो में गिरावट
पिछले कारोबार में भारी बिकवाली के बाद Nifty IT में वापसी हुई. वहीं, ऑटो और फार्मा इंडेक्स टॉप लूजर्स में शामिल रहे.
रुपया हुआ कमजोर
गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 25 पैसे गिरकर 95.33 पर आ गया, क्योंकि ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर के पार चली गई, जिससे भारत के आयात बिल को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गईं.
जारी रहेगा दबाव
ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ-टेक फर्म ‘एनरिच मनी’ के CEO पोनमुडी आर ने कहा, ‘भारतीय इक्विटी पर दबाव बने रहने की उम्मीद है क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी ग्लोबल मैक्रोइकॉनॉमिक आउटलुक पर असर डाल रही है.’
उन्होंने कहा कि ऊर्जा की ऊंची कीमतें और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से जोखिम लेने का उत्साह कम रहेगा और भारत सहित उभरते बाजारों की इक्विटी पर दबाव पड़ेगा.
महंगाई के आंकड़ों पर नजर
पोनमुडी ने आगे कहा, ‘हालांकि US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ संघर्ष मध्यावधि चुनावों के तुरंत बाद खत्म हो सकता है, लेकिन तनाव कम करने के रास्ते पर स्पष्टता की कमी निवेशकों को सतर्क रख रही है और ऊर्जा बाजारों में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम बना हुआ है.’
उन्होंने कहा कि आगे चलकर, निवेशक फेडरल रिजर्व की पॉलिसी की दिशा के बारे में नए संकेतों के लिए US के आगामी महंगाई के आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखेंगे.