गलती की, फिर सेटलमेंट करना है? SEBI ने बदले नियम, अब ऐसे तय होगी रकम
SEBI ने सेटलमेंट रेगुलेशंस, 2026 के तहत शेयर बाजार के नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों के निपटारे की प्रक्रिया में बदलाव किया है. अब सेटलमेंट की रकम तय करने का नया फॉर्मूला होगा और गलत कमाई व निवेशकों के नुकसान की रकम अलग वसूली जाएगी.

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शेयर बाजार से जुड़े नियमों के उल्लंघन के मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए नए नियम पेश किए हैं. सेटलमेंट रेगुलेशंस, 2026 के तहत सेटलमेंट की रकम तय करने का तरीका बदला गया है. गलत तरीके से कमाए गए पैसे और निवेशकों को हुए नुकसान का हिसाब अलग-अलग किया जाएगा. इसके अलावा, कुछ मामलों के जल्दी निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था भी शुरू की गई है.
इन बदलावों का मकसद नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में निपटारे की प्रक्रिया को सरल बनाना और फैसलों में अनिश्चितता कम करना है. नए नियमों के तहत कंपनियों और दूसरे संस्थाओं पर लागू शर्तें संबंधित उल्लंघन और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करेंगी.
1. सेटलमेंट की रकम तय करने का फॉर्मूला बदला
SEBI ने सेटलमेंट की रकम की गणना के लिए नया तरीका तय किया है. इसके तहत संबंधित उल्लंघन के लिए सिक्योरिटीज लॉ में तय न्यूनतम जुर्माने को आधार बनाया जाएगा. इसके बाद मामले की स्थिति और दूसरी परिस्थितियों के हिसाब से इस रकम में बदलाव किया जाएगा.
रकम तय करते समय कार्यवाही किस स्टेज में है, नियामक कार्रवाई, उल्लंघन की गंभीरता, मामले को गंभीर बनाने या राहत देने वाली परिस्थितियों और कानूनी खर्चों को ध्यान में रखा जाएगा. इसका मकसद यह है कि समान तरह के मामलों में सेटलमेंट की रकम तय करने की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और अनुमान लगाने योग्य हो.
2. गलत कमाई और निवेशकों के नुकसान का हिसाब अलग होगा
नए नियमों में गलत तरीके से कमाए गए पैसे, नुकसान से बचाई गई रकम और निवेशकों को हुए नुकसान को अलग-अलग देखने का प्रावधान किया गया है. पहले के तरीके में इन रकमों को सेटलमेंट की गणना में शामिल करने से एक ही रकम दो बार गिने जाने की आशंका हो सकती थी. नए नियम इस तरह के दोहराव को दूर करते हैं.
SEBI के मुताबिक, गलत कमाई, बचाए गए नुकसान या निवेशकों को हुए नुकसान को सेटलमेंट की मूल रकम तय करते समय शामिल नहीं किया जाएगा. अगर इन रकमों की सही गणना की जा सकती है, तो उन्हें अलग से वापस लिया जाएगा. इस प्रक्रिया को डिसगॉर्जमेंट कहा जाता है.
3. सेटलमेंट की शर्तों में होंगे तीन हिस्से
नए नियमों के तहत सेटलमेंट की शर्तों को तीन हिस्सों में बांटा गया है.
पहला, है सेटलमेंट की रकम: नए फॉर्मूले के आधार पर तय की जाने वाली रकम.
दूसरा, है डिसगॉर्जमेंट: गलत तरीके से कमाए गए पैसे, बचाए गए नुकसान या निवेशकों को हुए नुकसान की पहचान होने पर संबंधित रकम की अलग से वसूली.
तीसरा, सुधारात्मक और नियामकीय शर्तें: उल्लंघन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए संबंधित कंपनी या संस्था को जरूरी सुधार करने होंगे. पहले इस तरह की शर्तों को गैर-मौद्रिक शर्तें कहा जाता था. अब इनके लिए सुधारात्मक और नियामकीय शर्तें नाम का इस्तेमाल किया गया है.
4. ₹10 लाख तक के मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था
SEBI ने ऐसे मामलों के लिए तेज निपटारे की व्यवस्था की है, जिनमें सेटलमेंट की रकम 10 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होगी. इस प्रक्रिया के तहत पात्र मामले आंतरिक समिति से सीधे SEBI के पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल के पास भेजे जाएंगे. इससे अपेक्षाकृत कम रकम वाले मामलों में मंजूरी की प्रक्रिया छोटी हो सकती है और निपटारे में लगने वाला समय कम हो सकता है.
हालांकि, 10 लाख रुपये की सीमा का मतलब यह नहीं है कि इस रकम से कम के हर उल्लंघन को अपने आप सेटल करने की अनुमति मिल जाएगी. यह सुविधा केवल निर्धारित शर्तों के तहत पात्र मामलों पर लागू होगी.
5. कुछ उल्लंघनों के लिए अलग फास्ट-ट्रैक रास्ता
नए नियमों में एक दूसरी फास्ट-ट्रैक व्यवस्था भी है. यह 10 लाख रुपये की सीमा वाली व्यवस्था से अलग होगी और उल्लंघन की कैटेगरी के आधार पर लागू की जाएगी. इस प्रक्रिया में SEBI संबंधित संस्था को नोटिस जारी करेगा और नोटिस में बताई गई रकम का भुगतान करके मामले का निपटारा करने का अवसर देगा. रकम का पेमेंट होने के बाद SEBI के सदस्यों का एक पैनल सेटलमेंट आदेश जारी करेगा.
इस व्यवस्था में कुछ खुलासों से जुड़े उल्लंघनों का भी उल्लेख किया गया है. कौन-सा मामला इस प्रक्रिया के तहत आएगा, यह उल्लंघन की कैटेगरी और लागू नियामकीय शर्तों पर निर्भर करेगा.
6. वित्तीय विवरणों में गलत जानकारी और फंड के गलत इस्तेमाल के मामले भी शामिल
नए नियमों के तहत वित्तीय विवरणों में गलत जानकारी देने या फंड को दूसरी जगह इस्तेमाल करने से जुड़े मामलों का भी सेटलमेंट किया जा सकता है. हालांकि, इसके लिए जरूरी सुधारात्मक और नियामकीय शर्तों को पूरा करना होगा. इन शर्तों में जरूरी खुलासे करना और गलत तरीके से दूसरी जगह भेजे गए फंड को वापस लाना शामिल हो सकता है.
इसका मतलब यह नहीं है कि सिर्फ सेटलमेंट की रकम जमा करके मामला बंद किया जा सकेगा. संबंधित संस्था को उल्लंघन से पैदा हुई नियामकीय समस्याओं को दूर करने के लिए जरूरी कदम भी उठाने पड़ सकते हैं.
कंपनियों और निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
SEBI के नए नियमों का शेयर बाजार से जुड़े कानून के उल्लंघन से जुड़े मामलों का निपटारा अधिक व्यवस्थित और तेज हो सकता है. सेटलमेंट की रकम तय करने का स्पष्ट आधार, गलत कमाई और नुकसान की अलग वसूली तथा दो फास्ट-ट्रैक व्यवस्थाएं इस बदलाव के अहम हिस्से हैं.
कंपनियों और दूसरी संस्थाओं के लिए सेटलमेंट की शर्तें संबंधित उल्लंघन और नियमों में तय प्रावधानों पर निर्भर करेंगी. नए नियम प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ-साथ जरूरी सुधार और नियामकीय कार्रवाई की शर्तों को भी बनाए रखते हैं.
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