YES Bank के शेयर एक महीने में 26% टूटे, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी चिंता, अब क्या करें निवेशक
YES Bank के शेयर एक महीने में करीब 26 फीसदी टूट चुके हैं और गुरुवार को 52 हफ्ते के निचले स्तर 15.44 रुपये तक पहुंच गए. सुप्रीम कोर्ट ने 8,415 करोड़ रुपये के AT1 बॉन्ड राइट-ऑफ मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है. इससे बैंक की संभावित वित्तीय देनदारी और पूंजी पर असर को लेकर चिंता बढ़ी है. दूसरी ओर, बैंक का दूसरी तिमाही का मुनाफा 65 फीसदी बढ़ा है.

YES Bank के शेयरों में लगातार दबाव देखने को मिल रहा है. गुरुवार को बैंक का शेयर 52 हफ्ते के नए निचले स्तर 15.44 रुपये तक पहुंच गया. पिछले एक महीने में शेयर करीब 26 फीसदी टूट चुका है. इसकी बड़ी वजह 8,415 करोड़ रुपये के Additional Tier 1 यानी AT1 बॉन्ड राइट-ऑफ मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला है. कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें मार्च 2020 में इन बॉन्ड को राइट-ऑफ करने के फैसले को रद्द कर दिया गया था. ऐसे में निवेशकों के सामने सवाल है कि क्या शेयर में गिरावट अभी जारी रह सकती है या इसमें रिकवरी का मौका बन सकता है?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से क्यों बढ़ी चिंता?
सुप्रीम कोर्ट ने YES Bank, भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI और केंद्र सरकार की अपील खारिज कर दी है. ये अपीलें बॉम्बे हाई कोर्ट के जनवरी 2023 के फैसले के खिलाफ थीं. हाई कोर्ट ने बैंक के 8,415 करोड़ रुपये के AT1 बॉन्ड राइट-ऑफ को रद्द कर दिया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी फैसले को बरकरार रखा है.
YES Bank ने एक्सचेंज को दी जानकारी में कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले की विस्तार से समीक्षा कर रहा है. बैंक उपलब्ध कानूनी विकल्पों और आगे उठाए जाने वाले कदमों पर भी विचार कर रहा है.
इस फैसले के बाद बैंक पर संभावित वित्तीय असर को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ गई है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस मामले का बैंक की वित्तीय स्थिति पर अंतिम असर कितना होगा.
क्या हैं AT1 बॉन्ड और क्यों हुआ विवाद?
AT1 बॉन्ड ऐसे डेट इंस्ट्रूमेंट होते हैं, जिनमें आम तौर पर ज्यादा रिस्क के बदले बेहतर रिटर्न मिलता है. बैंक पर वित्तीय दबाव आने की स्थिति में तय शर्तों के तहत इन बॉन्ड को राइट-ऑफ किया जा सकता है या इक्विटी में बदला जा सकता है.
YES Bank को करीब छह साल पहले वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा था. इसके बाद बैंक के लिए रिस्ट्रक्चरिंग प्लान लागू की गई और नए निवेशकों को शामिल किया गया. इसी प्रक्रिया के दौरान बैंक के 8,415 करोड़ रुपये के AT1 बॉन्ड राइट-ऑफ किए गए थे.
बॉन्डधारकों ने इस फैसले को चुनौती दी थी. जनवरी 2023 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उस फैसले को बरकरार रखा है. यही वजह है कि शेयर बाजार में बैंक के संभावित वित्तीय रिस्क को लेकर चिंता बढ़ी है.
अच्छे नतीजों के बावजूद क्यों गिर रहा है शेयर?
YES Bank ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में बेहतर नतीजे पेश किए हैं. बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम यानी NII सालाना आधार पर 22.7 फीसदी बढ़कर 2,822 करोड़ रुपये हो गई. वहीं, बैंक का नेट प्रॉफिट 65 फीसदी बढ़कर 1,080 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.
उन्होंने कानूनी और वित्तीय अनिश्चितता के बीच निवेशकों को नई खरीदारी से बचने की सलाह दी है. यानी बैंक के बेहतर तिमाही नतीजों के बावजूद निवेशकों के लिए फिलहाल रिस्क को नजरअंदाज करना आसान नहीं है.
शेयर के लिए 15 और 14 रुपये के स्तर अहम
टेक्निकल एक्सपर्ट का मानना है कि YES Bank के शेयर में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. शेयर के लिए 15 रुपये का स्तर सपोर्ट है. इसके नीचे अगला सपोर्ट 14 रुपये पर है. वहीं, शेयर में रिकवरी के लिए 20 से 21 रुपये का स्तर अहम रहेगा. जब तक शेयर इस दायरे को मजबूती से पार नहीं करता, तब तक इसमें तेजी आने पर भी बिकवाली का दबाव रह सकता है.
गुरुवार को शेयर 1.15 फीसदी गिरकर 15.44 रुपये तक पहुंचा. बाद में यह 0.96 फीसदी की गिरावट के साथ 15.47 रुपये पर कारोबार कर रहा था. पिछले एक महीने में इसमें 25.89 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.
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अब क्या करें निवेशक?
YES Bank के शेयर को लेकर फिलहाल दो अहम पहलू हैं. एक तरफ बैंक ने दूसरी तिमाही में मुनाफे और नेट इंटरेस्ट इनकम में अच्छी बढ़त दर्ज की है. दूसरी तरफ AT1 बॉन्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ी कानूनी और वित्तीय अनिश्चितता बनी हुई है.
ऐसे में निवेशकों को केवल शेयर की गिरती कीमत या बेहतर तिमाही नतीजों के आधार पर फैसला लेने से बचना चाहिए. नई खरीदारी करने वालों के लिए बैंक की आगे की कानूनी कार्रवाई और इस मामले के संभावित वित्तीय असर को समझना जरूरी है.
टेक्निकल लेवल पर 15 रुपये और 14 रुपये के सपोर्ट पर नजर रखी जा सकती है, जबकि 20-21 रुपये का स्तर रिकवरी के लिए अहम माना जा रहा है. हालांकि, ये स्तर शेयर की चाल की गारंटी नहीं देते. निवेशकों को अपने रिस्क और निवेश की अवधि को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए.
डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है.