‘AI इंसानों को खत्म कर सकता है’, DeepMind के पूर्व रिसर्चर की चेतावनी! बोले- अब समय कम बचा है

Google DeepMind के पूर्व रिसर्चर Bilal Chughtai ने AI को लेकर गंभीर चेतावनी दी है. उनका कहना है कि AI में पूरी मानवता को खत्म करने की क्षमता हो सकती है और इससे बचने के लिए दुनिया के पास समय कम हो सकता है. हालांकि, उनका मानना है कि AI को सुरक्षित तरीके से विकसित करना अभी भी संभव है, लेकिन इसके लिए AI कंपनियों के बीच होड़ कम करके ज्यादा तालमेल की जरूरत है.

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर दुनिया में जहां एक तरफ नई तकनीक और संभावनाओं की चर्चा हो रही है, वहीं इसके खतरों को लेकर चेतावनियां भी लगातार बढ़ रही हैं. Google DeepMind में आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस यानी AGI की सुरक्षा और एलाइनमेंट रिसर्च पर काम कर चुके पूर्व रिसर्चर Bilal Chughtai ने AI को लेकर बेहद गंभीर चिंता जताई है. उनका कहना है कि AI में पूरी मानवता को खत्म करने की क्षमता हो सकती है और इससे बचने के लिए दुनिया के पास अब ज्यादा समय नहीं बचा हो सकता.

Chughtai ने जुलाई 2026 में Google DeepMind से इस्तीफा दिया था. कंपनी में रहते हुए उन्होंने AGI की सुरक्षा और एलाइनमेंट से जुड़े रिसर्च पर काम किया था. कंपनी छोड़ने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर AI के भविष्य को लेकर अपनी चिंता जाहिर की.

‘AI हमें सभी को खत्म कर सकता है’

Chughtai ने कहा कि उन्होंने Google DeepMind से इस्तीफा दे दिया है, जहां वह AGI सुरक्षा और एलाइनमेंट रिसर्च पर काम कर रहे थे. उन्होंने AI के संभावित खतरों को लेकर कहा कि उनका गंभीरता से मानना है कि AI में पूरी मानवता को खत्म करने की क्षमता है और इस स्थिति से बचने के लिए शायद हमारे पास समय कम होता जा रहा है.

हालांकि, Chughtai पूरी तरह निराश नहीं हैं. उनका कहना है कि AI को सुरक्षित तरीके से विकसित करना अभी भी संभव है, लेकिन इसके लिए AI कंपनियों के बीच ज्यादा तालमेल की जरूरत होगी.

AI कंपनियों की होड़ को लेकर चिंता

Chughtai के मुताबिक, AI इंडस्ट्री को कंपनियों के बीच लगातार आगे निकलने की होड़ से हटने की जरूरत है. उनका कहना है कि समाज को AI के बढ़ते जोखिमों से निपटने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए. उनके मुताबिक, AI का विकास इतनी रफ्तार से होना चाहिए जिसे समाज संभाल सके. इससे उभरते जोखिमों की पहचान कर अत्यधिक नुकसान होने से पहले उनका समाधान किया जा सकेगा.

उन्होंने AI कंपनियों के बीच चल रही तेज प्रतिस्पर्धा को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि इस तरह की होड़ से बचने के लिए आपसी तालमेल जरूरी है.

DeepMind के बाद दूसरे AI रिसर्चर भी दे चुके हैं चेतावनी

AI की सुरक्षा को लेकर Chughtai की चिंता अकेली नहीं है. इससे पहले Anthropic के रिसर्चर Jacob Coxon ने भी AI को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा था कि AI बनाने वाले कुछ लोग खुद मानते हैं कि दशक खत्म होने से पहले AI पूरी मानवता के लिए घातक साबित हो सकता है.

इसके बाद Anthropic के वैज्ञानिक Evan Hubinger ने भी Coxon की चिंता से सहमति जताई. उन्होंने अनुमान लगाया कि अगले दशक में AI के पूरी मानवता को खत्म करने की संभावना 10 फीसदी से ज्यादा हो सकती है.

ये बयान AI के बढ़ते विकास और उसके संभावित खतरों को लेकर चल रही बहस को और तेज करते हैं.

AI के विकास की रफ्तार धीमी करने की मांग

AI के संभावित खतरों को लेकर कुछ बड़े तकनीकी नाम भी विकास की रफ्तार पर बहस कर चुके हैं. Anthropic के CEO Dario Amodei ने सबसे एडवांस AI सिस्टम के विकास को कुछ समय के लिए धीमा करने की मांग की थी. इस प्रस्ताव को OpenAI के CEO Sam Altman और SpaceXAI के प्रमुख Elon Musk का भी समर्थन मिला था. इसके बाद AI को लेकर ‘डूमरिज्म’ यानी AI के संभावित विनाशकारी असर की बहस और तेज हुई.

हालांकि, Chughtai का रुख पूरी तरह AI विरोधी नहीं है. उनका कहना है कि AI को सुरक्षित तरीके से विकसित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए कंपनियों और समाज को मिलकर काम करना होगा.

DeepMind छोड़ने के बाद अब क्या कर रहे हैं Chughtai?

Chughtai की LinkedIn प्रोफाइल के मुताबिक, Google DeepMind छोड़ने के बाद उन्होंने BlueDot Impact ज्वाइन किया है. यह एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो AI सुरक्षा के क्षेत्र में लोगों को प्रशिक्षण देने पर काम करता है यानी AI के संभावित खतरों को लेकर चिंता जताने के साथ-साथ Chughtai अब AI सुरक्षा से जुड़े लोगों को तैयार करने के काम से भी जुड़े हैं.

AI रेगुलेशन को लेकर भी जारी है बहस

AI के विकास को लेकर अमेरिका में भी रेगुलेशन पर बहस जारी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने AI इंडस्ट्री की ओर से जताई जा रही चिंताओं और रेगुलेशन की मांगों को ‘होएक्स’ यानी झूठा प्रचार बताया है. वहीं, AI के संभावित जोखिमों को लेकर विशेषज्ञों की चेतावनियां लगातार सामने आ रही हैं. यही वजह है कि AI को कितनी तेजी से विकसित किया जाए और इसके खतरों से निपटने के लिए कितने कड़े सुरक्षा उपाय जरूरी हैं, इस पर तकनीकी कंपनियों, शोधकर्ताओं और सरकारों के बीच बहस बढ़ती जा रही है.

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