क्या AI इंसानों को कम समझदार बना रही है? निखिल कामथ और Anthropic CEO के बीच अहम बातचीत
बेंगलुरु में हुई एक बातचीत के दौरान जेरोधा के को-फाउंडर निखिल कामथ ने डारियो अमोडेई, जो कि एन्थ्रॉपिक के सीईओ हैं, से एक बेहद अहम सवाल पूछाक्या- एआई का बढ़ता इस्तेमाल इंसानों को धीरे-धीरे “कम समझदार” बना सकता है? इस चर्चा का केंद्र यह चिंता थी कि चैटजीपीटी, जेमिनी और क्लॉड जैसे एआई टूल्स पर बढ़ती निर्भरता कहीं इंसानी सोच, रचनात्मकता और क्रिटिकल थिंकिंग को कमजोर तो नहीं कर रही. बातचीत में यह सवाल भी उठा कि क्या हम अपनी सोचने की क्षमता मशीनों को “एक्सपोर्ट” कर रहे हैं. अगर हर जवाब, आइडिया और समाधान एआई से मिलने लगे, तो इंसान खुद सोचने की मेहनत क्यों करेगा?
डारियो अमोडेई ने माना कि यह एक वास्तविक जोखिम है, लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि एआई का उद्देश्य इंसानों को रिप्लेस करना नहीं, बल्कि असिस्ट करना होना चाहिए. सही इस्तेमाल होने पर एआई प्रोडक्टिविटी बढ़ा सकता है, लेकिन गलत इस्तेमाल इंसानी जजमेंट और क्रिएटिविटी को नुकसान पहुंचा सकता है. चर्चा में फ्यूचर ऑफ वर्क पर भी बात हुई. एआई-ड्रिवन दुनिया में कोडिंग जैसे कुछ काम ऑटोमेट हो सकते हैं, लेकिन एम्पैथी, क्रिएटिविटी, जजमेंट और क्रिटिकल थिंकिंग जैसी ह्यूमन-सेंट्रिक स्किल्स की अहमियत और बढ़ेगी.