Public Wifi के खिलाफ क्यों खोला मोबाइल कंपनियों ने मोर्चा?

भारत के डिजिटल भविष्य में सार्वजनिक वाई-फाई की भूमिका पर एक महत्वपूर्ण बहस छिड़ गई है. देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियां जैसे जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया का मानना है कि सस्ते मोबाइल डेटा और 4जी/5जी नेटवर्क के विस्तार के कारण पब्लिक वाई-फाई की जरूरत और व्यावसायिक व्यवहार्यता सीमित है. वे पीएम-वानी (PM-WANI) जैसी योजनाओं के तहत मुफ्त या सस्ते वाई-फाई मुहैया कराने के सरकार के प्रयासों का विरोध कर रहे हैं, जिसका उदाहरण रेलवे स्टेशन पर वाई-फाई परियोजना के गैर-लाभकारी होने का हवाला देकर दिया गया है.

दूसरी ओर, गूगल, अमेज़न और मेटा जैसी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाला ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (BIF) तर्क देता है कि भारत की बढ़ती डिजिटल जरूरतों को केवल मोबाइल नेटवर्क के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. उनका मानना है कि पब्लिक वाई-फाई भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क का बोझ कम करेगा और उन ग्रामीण इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाएगा जहां मोबाइल कनेक्टिविटी कमजोर है. ट्राई (Trai) इस मामले की समीक्षा कर रहा है, और इसका निर्णय देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की अगली दिशा तय करेगा.

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