बासमती धान बेचने वाले किसानों की चांदी, ₹5,200 प्रति क्विंटल पहुंचा भाव
बासमती धान की कीमतों में इस साल रिकॉर्ड तेजी देखने को मिल रही है. पंजाब और हरियाणा की मंडियों में 1121 किस्म का भाव ₹5,200 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है. खाड़ी देशों से बढ़ती मांग और खाद्य सुरक्षा की चिंता के कारण कीमतें बढ़ी हैं. हालांकि, महंगी खरीद और ढुलाई लागत से निर्यातकों की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं.

बासमती धान की खेती करने वाले किसानों के लिए इस साल अच्छी खबर है. पंजाब और हरियाणा की मंडियों में बासमती धान की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. धान की प्रमुख किस्मों के भाव पिछले साल के मुकाबले करीब 1,000 रुपये प्रति क्विंटल तक ज्यादा मिल रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह विदेशों से बढ़ती मांग है. खासकर खाड़ी देशों में चावल की मांग बढ़ने से भारतीय बासमती धान के बाजार को मजबूती मिली है.
1121 और 1509 किस्म के क्या हैं भाव?
बासमती धान की 1121 किस्म का भाव करीब 5,200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है. वहीं, 1509 किस्म के लिए किसानों को करीब 4,500 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहे हैं. पिछले साल इसी समय बासमती धान का भाव करीब 4,000 रुपये प्रति क्विंटल था. इस तरह किसानों को इस बार अपनी फसल बेचने पर बेहतर कीमत मिल रही है.
1121 और 1509 बासमती धान की प्रमुख किस्में हैं. इनसे तैयार होने वाले चावल की विदेशों में अच्छी मांग रहती है. खासकर लंबे दाने और बेहतर गुणवत्ता वाले बासमती चावल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पसंद किया जाता है.
खाड़ी देशों से बढ़ी बासमती चावल की मांग
भारतीय बासमती चावल के सबसे बड़े खरीदारों में सऊदी अरब, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और खाद्य आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं के कारण कई देश चावल का अतिरिक्त स्टॉक जुटाने पर ध्यान दे रहे हैं. इसका फायदा भारतीय बासमती चावल के कारोबार को मिल रहा है.
विदेशों से मांग बढ़ने का असर धान की खरीद पर भी दिखाई दे रहा है. निर्यातकों को ज्यादा ऑर्डर मिलने से मंडियों में बासमती धान की कीमतों को समर्थन मिल रहा है.
किसानों को फायदा, निर्यातकों की बढ़ी चिंता
बासमती धान के ऊंचे भाव से किसानों की कमाई बढ़ने की उम्मीद है. हालांकि, दूसरी ओर निर्यातकों के सामने लागत बढ़ने की चुनौती भी है. महंगा धान खरीदने के लिए ज्यादा पूंजी की जरूरत पड़ती है. इसके अलावा माल ढुलाई और समुद्री परिवहन की लागत भी कारोबार को प्रभावित कर सकती है.
चावल की कीमतें ज्यादा बढ़ने पर विदेशी खरीदार सस्ते विकल्पों की तरफ भी रुख कर सकते हैं. ऐसे में आने वाले समय में बासमती धान के भाव और निर्यात की स्थिति काफी हद तक विदेशी मांग, परिवहन लागत और पश्चिम एशिया के हालात पर निर्भर करेगी.
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