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Coal India Capex: कोल इंडिया का कैपेक्स 27% बढ़ा, 6 महीने में खर्च किए ₹7966 करोड़

कोल इंडिया लिमिटेड का कैपिटल खर्च चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 27 फीसदी बढ़कर 7966 करोड़ रुपये हो गया. पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में कंपनी ने 6283 करोड़ रुपये खर्च किए थे. अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का कैपेक्स लक्ष्य 7286 करोड़ रुपये था, जिसके मुकाबले उसने 109 फीसदी खर्च किया.

कंपनी ने छह महीने में तय कैपेक्स लक्ष्य का 109 फीसदी खर्च किया. Image Credit: tv9

Highlights

  • कोल इंडिया का कैपेक्स पहली छमाही में 27 फीसदी बढ़कर ₹7966 करोड़ रहा.
  • कंपनी ने छह महीने में तय कैपेक्स लक्ष्य का 109 फीसदी खर्च किया.
  • खदानों के बुनियादी ढांचे, जमीन अधिग्रहण और मशीनरी पर सबसे ज्यादा निवेश हुआ.

देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में अपने कैपिटल खर्च यानी कैपेक्स में 27 फीसदी की बढ़ोतरी की है. कंपनी ने अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान 7966 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह रकम 6283 करोड़ रुपये थी. कोल इंडिया का यह निवेश खदानों के आधुनिकीकरण, प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने और कोयले की ढुलाई से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर फोकस है. कंपनी का कहना है कि इन निवेशों से देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी.

टारगेट से ज्यादा खर्च कर चुकी है कंपनी

कोल इंडिया ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के लिए 7286 करोड़ रुपये के कैपेक्स का टारगेट रखा था. इसके मुकाबले कंपनी ने 7966 करोड़ रुपये खर्च किए. यानी कंपनी ने छह महीने में अपने तय लक्ष्य का करीब 109 फीसदी हासिल कर लिया. यह खर्च पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तय 16500 करोड़ रुपये के कैपेक्स लक्ष्य का 48 फीसदी से ज्यादा है. कंपनी का निवेश लैंड एक्विजिशन, खदानों के विकास, भारी मशीनों की खरीद और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर किया जा रहा है.

खदानों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर सबसे ज्यादा निवेश

कोल इंडिया ने अप्रैल से सितंबर के दौरान खदानों के बुनियादी ढांचे के विकास पर 2,152 करोड़ रुपये खर्च किए. यह कैपेक्स का सबसे बड़ा हिस्सा रहा. इसमें रेलवे साइडिंग, रेल कॉरिडोर, कोल हैंडलिंग प्लांट, साइलो और वजन मापने वाली मशीनों जैसी सुविधाओं पर निवेश शामिल है. इन सुविधाओं का उद्देश्य खदानों से कोयले की निकासी और उसकी ढुलाई को अधिक व्यवस्थित बनाना है. बेहतर ढुलाई व्यवस्था से कोयले को खदानों से आगे भेजने की प्रक्रिया को मजबूत करने में मदद मिल सकती है.

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सोलर एनर्जी और दूसरे कारोबारों में भी निवेश

कोल इंडिया अब कोयला कारोबार के अलावा दूसरे क्षेत्रों में भी निवेश कर रही है. कंपनी ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में डायवर्सिफाइड प्रोडक्ट पर 739 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए. इन प्रोजेक्ट में सोलर एनर्जी, क्रिटिकल मिनरल्स, कोयला गैसीफिकेशन और थर्मल पावर प्रोडक्शन शामिल हैं.

डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.