इक्विटी टैक्सेशन की चिंताओं पर विचार करेंगी सरकार, वित्त मंत्री ने कहा- निवेशकों के सामने बदल गए हैं हालात

वित्त मंत्री ने बताया कि 2023-24 में भारत का टैक्स स्ट्रक्चर काफी हद तक ऐसा ही था, फिर भी देश में भारी विदेशी निवेश आया था. यहां तक ​​कि कुछ मामलों में यह अब तक का सबसे अधिक निवेश था. सीतारमण ने कहा कि विदेशी निवेश की वापसी के संकेत दिखने लगे हैं.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (फाइल फोटो) Image Credit: PTI

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 नवंबर को भारत के टैक्सेशन सिस्टम को लेकर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) और घरेलू इक्विटी बाजार के प्रतिभागियों के बीच बढ़ती चिंताओं को स्वीकार किया. उन्होंने कहा कि सरकार इस फीडबैक पर विचार करेगी, जबकि साथ ही सरकार का मुख्य फोकस आर्थिक विकास दर को 7 फीसदी या उससे अधिक बनाए रखने पर है.

मुखर हो गई हैं चिंताएं

इस सवाल के जवाब में कि क्या आगामी केंद्रीय बजट में विदेशी निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल कर माहौल या विशेष सुविधाएं (रेड-कार्पेट ट्रीटमेंट) मिल सकती हैं, सीतारमण ने इक्विटी टैक्सेशन में बदलाव को लेकर कोई पक्का वादा तो नहीं किया, लेकिन यह जरूर माना कि निवेशकों के सामने हालात बदल गए हैं और उनकी चिंताएं अब और मुखर हो गई हैं.

इक्विटी पर कितना है LTCG?

विदेशी और घरेलू निवेशकों द्वारा इक्विटी बेचने पर लगने वाला LTCG टैक्स 12.5 फीसदी है, जिसमें इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलता है. यह टैक्स लिस्टेड शेयरों पर प्रति वित्तीय वर्ष 1.25 लाख रुपये से अधिक के मुनाफे पर लागू होता है. अनलिस्टेड शेयरों की बिक्री पर ऐसी कोई सीमा लागू नहीं होती है.

उन्होंने कहा, ‘मैं रिटेल निवेशकों और इक्विटी बाजार के प्रतिभागियों के बीच मौजूद चिंताओं को समझती हूं.’ उन्होंने आगे कहा कि सरकार बाजार के प्रतिभागियों द्वारा उठाई जा रही चिंताओं को पहचानती है.

विदेशी निवेशकों की बिकवाली में इजाफा

वित्त मंत्री ने बताया कि 2023-24 में भारत का टैक्स स्ट्रक्चर काफी हद तक ऐसा ही था, फिर भी देश में भारी विदेशी निवेश आया था. यहां तक ​​कि कुछ मामलों में यह अब तक का सबसे अधिक निवेश था. जबकि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार को कोई अतिरिक्त कर प्रोत्साहन (टैक्स इंसेंटिव) देने की जरूरत नहीं पड़ी थी.

उन्होंने कहा, ‘निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कोई अतिरिक्त कदम नहीं उठाया गया था.’ हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि मौजूदा स्थिति अलग है. चुनौतियां बढ़ गई हैं और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से कैपिटल की निकासी (आउटफ्लो) में भी बढ़ोतरी हुई है.

सीतारमण ने कहा कि विदेशी निवेश की वापसी के संकेत दिखने लगे हैं, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि बदले हुए हालात के कारण निवेशकों की ओर से अधिक अनुकूल टैक्स सिस्टम की मांग और तेज हो गई है.

टैक्स व्यवस्था पर विचार

उन्होंने कहा, ‘मैं समझती हूं कि हालात बदल गए हैं, इसलिए चिंताएं भी अधिक मुखर हो गई हैं. मैं इन बातों को पूरी तरह समझती हूं. मैं इन सभी पहलुओं पर विचार करूंगी.’ उनके बयान काफी अहम हैं, क्योंकि निवेशक यह स्पष्टता चाहते हैं कि क्या सरकार आगामी बजट में कैपिटल गेन्स टैक्स, खासकर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स व्यवस्था पर फिर से विचार करेगी.

हालांकि सीतारमण ने विशेष रूप से LTCG का जिक्र नहीं किया और न ही टैक्स दरों में किसी बदलाव का वादा किया, लेकिन निवेशकों की चिंताओं को स्वीकार करने से बजट से पहले इक्विटी टैक्स को लेकर उम्मीदें बनी रहेंगी.

यह मुद्दा तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की लगातार निकासी, बाजार में उतार-चढ़ाव और अन्य उभरते बाजारों की तुलना में भारतीय इक्विटी के आकर्षण को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं.

ग्रोथ दर को बरकरार रखने पर काम

सीतारमण ने कहा कि ऐसे समय में कैपिटल बहुत महत्वपूर्ण होगी, जब सरकार और कारोबार 7 फीसदी से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर को बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘इसे बनाए रखने के लिए, हमें अभी पूंजी और इक्विटी की विशेष रूप से आवश्यकता है.’

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने घरेलू बॉन्ड बाजार को मजबूत करने पर जोर दिया है, लेकिन अब इक्विटी बाजारों को अधिक समर्थन देने की मांगों पर भी ध्यान देना होगा.

बॉन्ड बाजार को मजबूत करने पर जोर

वित्त मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में उन्होंने बॉन्ड बाजार के विस्तार और उसे मजबूत करने पर काफी जोर दिया है, लेकिन उन्होंने माना कि बाजार के प्रतिभागी अब इक्विटी बाजार पर भी इसी तरह का ध्यान देने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं अभी इस पर और कुछ नहीं कहना चाहती, लेकिन मैं इन मांगों को समझती हूं.’

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने 2 अक्टूबर को रिपोर्ट दी कि सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने सरकार को सुझाव दिया है कि वह विदेशी निवेशकों पर लगाए गए LTCG (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स) को हटा दे.

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