Gold Loan Banks| गोल्ड लोन ने बदल दी बैंकों की तकदीर, लेकिन क्या है बड़ा खतरा?
गोल्ड लोन सेगमेंट ने हाल के वर्षों में बैंकों और एनबीएफसी के बिज़नेस को नई रफ्तार दी है. सोने के बदले आसानी से मिलने वाला कर्ज़, तेज प्रोसेसिंग और कम डॉक्यूमेंटेशन ने इसे ग्राहकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है. इससे वित्तीय संस्थानों की लोन बुक और रेवेन्यू में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिली है. लेकिन इस तेजी के साथ जोखिम भी जुड़ा है. गोल्ड लोन का पूरा ढांचा सोने की कीमतों पर निर्भर करता है. यदि सोने के भाव में तेज गिरावट आती है, तो लोन-टू-वैल्यू अनुपात बिगड़ सकता है. ऐसी स्थिति में बैंकों को अतिरिक्त प्रावधान या नीलामी जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं.
इसके अलावा, इस सेगमेंट में अत्यधिक निर्भरता भी चिंता का विषय बन सकती है. रेगुलेटरी सख्ती, ब्याज दरों में बदलाव और ग्राहक डिफॉल्ट जैसे फैक्टर जोखिम बढ़ा सकते हैं. इसलिए गोल्ड लोन की ग्रोथ कहानी मजबूत जरूर दिखती है, लेकिन सतर्कता और जोखिम प्रबंधन उतना ही जरूरी है.