Gold ETF vs Equity: निवेशकों का बदलता रुख क्या संकेत दे रहा है?
जनवरी में गोल्ड और सिल्वर ETF में निवेशकों की तेज एंट्री ने बाजार में एक नई बहस छेड़ दी है. ताजा AMFI डेटा के अनुसार, लगभग 12 लाख नए निवेशकों ने इन फंड्स में कदम रखा, जबकि प्रेशियस मेटल फंड्स में करीब ₹33,000 करोड़ का इनफ्लो दर्ज किया गया. यह रुझान साफ संकेत देता है कि निवेशक मौजूदा बाजार उतार-चढ़ाव के बीच सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुक रहे हैं.
आमतौर पर जब इक्विटी बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तो गोल्ड को ‘सेफ हेवन’ के रूप में देखा जाता है. ETF के जरिए सोने और चांदी में निवेश करना आसान और लिक्विड विकल्प बन चुका है, जिससे नए निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है. हालांकि, यह सवाल बना हुआ है कि क्या गोल्ड ETF अब SIP जैसे इक्विटी निवेशों का विकल्प बन रहे हैं या केवल पोर्टफोलियो संतुलन का साधन हैं. गोल्ड को पूरी तरह रिटर्न एसेट नहीं, बल्कि हेजिंग इंस्ट्रूमेंट के रूप में देखना ज़्यादा व्यावहारिक रणनीति हो सकती है. यह ट्रेंड टिकाऊ रहेगा या अस्थायी, यह काफी हद तक वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगा.
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