Gold Loan: सोने की चमक के पीछे बड़ा दांव, Tata-Godrej के बाद Birla की एंट्री से बढ़ी होड़
भारत में गोल्ड लोन बाजार तेजी से बढ़ रहा है. ₹3.3 लाख करोड़ के बाजार को देखते हुए Tata, Godrej और Birla जैसे बड़े समूह इस सेक्टर में उतर रहे हैं. महंगे सोने और सुरक्षित कर्ज की बढ़ती मांग से प्रतिस्पर्धा तेज होगी.

भारत में सोने की बढ़ती कीमतों का असर अब सिर्फ ज्वेलरी बाजार पर नहीं दिख रहा है. इसका फायदा गोल्ड लोन कारोबार को भी मिल रहा है. देश के बड़े कारोबारी समूह अब इस बाजार में तेजी से उतर रहे हैं. Tata Capital, Godrej Capital के बाद अब Aditya Birla Capital ने भी गोल्ड लोन कारोबार में बड़ा दांव लगाने का ऐलान किया है. इससे गोल्ड लोन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की उम्मीद है.
3.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा गोल्ड लोन बाजार
Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2026 तक भारत में सोने के आभूषणों के बदले दिए गए लोन का बकाया करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया था. वित्त वर्ष 2025-26 में गोल्ड लोन में करीब 50 फीसदी की वृद्धि हुई. ऐसे में यह रिटेल लोन के सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में शामिल हो गया है.
गोल्ड लोन कारोबार में NBFC कंपनियों की भी तेज ग्रोथ देखने को मिल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, सख्त नियामकीय निगरानी के बावजूद NBFC के गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में करीब 70 फीसदी सालाना वृद्धि हुई है.
Tata और Godrej ने खरीदा मौजूदा कारोबार
इस बाजार में उतरने के लिए Tata Capital और Godrej Capital ने अधिग्रहण का रास्ता चुना है. Tata Capital ने केरल की Yogloans में 88.6 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने पर सहमति जताई है. इस प्लेटफॉर्म के पास 160 से ज्यादा शाखाएं, करीब 32,000 ग्राहक और 700 करोड़ रुपये से ज्यादा का लोन बुक था.
वहीं, Godrej Capital ने Kanakadurga Finance के गोल्ड लोन कारोबार का अधिग्रहण किया. इसके जरिए उसे करीब 280 करोड़ रुपये का पोर्टफोलियो, 12,000 ग्राहक और 54 शाखाएं मिलीं. कंपनी ने 2031 तक अपना गोल्ड लोन बुक 5,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है.
Birla तीन साल में खोलेगा 1,000 शाखाएं
Aditya Birla Capital ने दूसरी कंपनियों से अलग खुद अपना गोल्ड लोन नेटवर्क खड़ा करने का फैसला किया है. कंपनी अगले तीन साल में करीब 1,000 समर्पित गोल्ड लोन शाखाएं खोलना चाहती है. मार्च 2027 तक 200 से 300 शाखाएं शुरू करने का लक्ष्य है. कंपनी शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों के ग्राहकों को शाखाओं के साथ डिजिटल माध्यम से भी सेवाएं देगी.
महंगा सोना बना बड़ा कारण
गोल्ड लोन बाजार की तेजी में सोने की बढ़ती कीमतों की अहम भूमिका है. सोने की कीमत बढ़ने पर ग्राहक उतनी ही मात्रा में आभूषण गिरवी रखकर ज्यादा रकम का लोन ले सकता है. इससे ग्राहकों की उधार लेने की क्षमता बढ़ती है और लोन कंपनियों का कारोबार भी तेजी से बढ़ता है.
लेकिन कंपनियों की दिलचस्पी सिर्फ महंगे सोने तक सीमित नहीं है. असल वजह सुरक्षित लोन कारोबार की बढ़ती मांग भी है. पर्सनल लोन और दूसरे अनसिक्योर्ड लोन पर नियामकीय सख्ती बढ़ने के बाद NBFC अब सुरक्षित लोन की ओर रुख कर रहे हैं.
गोल्ड लोन क्यों बन रहा है पसंदीदा कारोबार?
गोल्ड लोन में ग्राहक के पास पहले से मौजूद सोना ही जमानत के तौर पर इस्तेमाल होता है. इसलिए होम लोन की तरह लंबी कानूनी जांच या ज्यादा दस्तावेजी प्रक्रिया की जरूरत नहीं पड़ती. सोने की कीमत का आकलन भी अपेक्षाकृत आसान है और लोन की अवधि आमतौर पर छोटी होती है.
इसके अलावा गोल्ड लोन लेने वाले ग्राहकों का दायरा भी बदल रहा है. पहले इसे मुख्य रूप से ग्रामीण परिवारों, छोटे कारोबारियों या आर्थिक जरूरत वाले लोगों से जोड़कर देखा जाता था. अब बड़े टिकट वाले लोन लेने वाले अपेक्षाकृत संपन्न ग्राहक भी इस विकल्प का इस्तेमाल कर रहे हैं.
इस तरह Tata, Godrej और Birla जैसे बड़े समूहों की एंट्री बताती है कि गोल्ड लोन अब सिर्फ कुछ विशेषज्ञ कंपनियों तक सीमित कारोबार नहीं रह गया है. बड़े वित्तीय समूह इसे रिटेल लेंडिंग के अगले बड़े ग्रोथ इंजन के तौर पर देख रहे हैं.