RBI का 6.7% फोरकास्ट पड़ सकता है कम! 7% के करीब पहुंच सकती है भारत की इकनॉमिक ग्रोथ

भारत की इकनॉमिक ग्रोथ चालू फाइनेंशियल ईयर में RBI के 6.7 फीसदी फोरकास्ट से ज्यादा रहकर 7 फीसदी के करीब पहुंच सकती है. RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने मजबूत अप्रैल-जून क्वार्टर के आधार पर यह अनुमान जताया है. उन्होंने आने वाले समय में 7.5 फीसदी ग्रोथ को आधार मानते हुए इससे बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य रखने की बात कही. कमजोर मॉनसून और ऊंची एनर्जी कॉस्ट्स के बावजूद इकनॉमिक एक्टिविटी मजबूत रहने की उम्मीद है.

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Highlights

  • भारत की इकनॉमिक ग्रोथ चालू फाइनेंशियल ईयर में RBI के 6.7 फीसदी फोरकास्ट से ज्यादा रहकर 7 फीसदी के करीब पहुंच सकती है.
  • RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने मजबूत अप्रैल-जून क्वार्टर के दम पर ग्रोथ को लेकर भरोसा जताया है.
  • पूनम गुप्ता ने आने वाले समय में 7.5 फीसदी ग्रोथ को आधार मानते हुए इससे बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य रखने की बात कही है.

RBI Growth Forecast: भारत की इकनॉमिक ग्रोथ चालू फाइनेंशियल ईयर में 7 फीसदी के करीब पहुंच सकती है. RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने गुरुवार को यह अनुमान जताया है. उनका कहना है कि मजबूत अप्रैल-जून क्वार्टर के दम पर मार्च में समाप्त होने वाले फाइनेंशियल ईयर में भारत की इकनॉमिक ग्रोथ RBI के 6.7 फीसदी के मौजूदा Forecast से ज्यादा रह सकती है. अगर ऐसा होता है तो भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी इकनॉमीज में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखेगा. पूनम गुप्ता ने Chennai में Madras School of Economics के एक कार्यक्रम में कहा कि अप्रैल-जून क्वार्टर में इकनॉमिक एक्टिविटी मजबूत रहने की उम्मीद है.

7 फीसदी के करीब पहुंच सकती है ग्रोथ

पूनम गुप्ता के मुताबिक, अगर पहली तिमाही में ग्रोथ मजबूत रहती है तो पूरे साल की इकनॉमिक ग्रोथ 7 फीसदी के करीब रह सकती है. उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में 7.5 फीसदी की ग्रोथ को आधार माना जा सकता है और देश को इससे बेहतर प्रदर्शन करने का लक्ष्य रखना चाहिए.

उनका यह अनुमान ऐसे समय आया है, जब भारतीय इकनॉमी के सामने कई चुनौतियां मौजूद हैं. कमजोर मॉनसून और ऊंची एनर्जी कॉस्ट्स जैसे दबावों के बावजूद इकनॉमिक एक्टिविटी की रफ्तार बनी हुई है. इससे इकनॉमी की रेजिलिएंस का संकेत मिलता है.

Rate Hike के संकेत भी दिए

पूनम गुप्ता का यह बयान RBI की हालिया मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग के कुछ दिनों बाद आया है. अगस्त की पॉलिसी मीटिंग के मिनट्स में उनके रुख को अपेक्षाकृत हॉकिश बताया गया था. उन्होंने इस साल के अंत में Rate Hike की संभावना का भी संकेत दिया था.

अगर इकनॉमिक ग्रोथ उम्मीद से बेहतर रहती है और इन्फ्लेशन से जुड़े दबाव भी बने रहते हैं, तो RBI के लिए मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर चुनौती बढ़ सकती है. मजबूत ग्रोथ के बीच सेंट्रल बैंक के लिए ग्रोथ और इन्फ्लेशन के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा.

एक्सटर्नल अकाउंट्स को लेकर भी भरोसा

पूनम गुप्ता ने भारत के एक्सटर्नल अकाउंट्स को लेकर भी सकारात्मक रुख जताया. उन्होंने कहा कि देश का एक्सटर्नल सेक्टर आने वाले समय में काफी अधिक कंड्यूसिव रह सकता है. इकोनॉमिस्ट्स को उम्मीद है कि इस फाइनेंशियल ईयर में भारत का बैलेंस ऑफ पेमेंट्स पॉजिटिव हो सकता है. पहले इसमें डेफिसिट की संभावना जताई जा रही थी.

इसके पीछे फॉरेन इनफ्लोज में संभावित बढ़ोतरी को प्रमुख कारण माना जा रहा है. अनुमान है कि भारतीय करेंसी को सपोर्ट देने वाले उपायों और फॉरेन करेंसी डिपॉजिट्स को आकर्षित करने के लिए दिए जा रहे विशेष इंसेंटिव्स के कारण देश में करीब 80 बिलियन डॉलर तक के फॉरेन इनफ्लोज आ सकते हैं.

8 फीसदी से ज्यादा ग्रोथ का लक्ष्य

भारत की मजबूत इकनॉमिक ग्रोथ को लेकर सरकार का भरोसा भी बढ़ा है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को डेवलप्ड नेशन बनाने की महत्वाकांक्षा दोहराई थी. इकोनॉमिस्ट्स के मुताबिक, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को कम से कम 2 दशकों तक लगातार 8 फीसदी या उससे ज्यादा की इकनॉमिक ग्रोथ बनाए रखने की जरूरत हो सकती है. ऐसे में RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता का 7 फीसदी के करीब ग्रोथ का अनुमान भारतीय इकनॉमी के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.

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