SEBI का कड़ा एक्शन, JPMorgan के यूनिट पर लगाया बैन, क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम में हेरफेर का आरोप

SEBI ने जेपी मॉर्गन की यूनिट कॉपथॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट और मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग के खिलाफ क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम में कथित हेरफेर के मामले में तेजी से कार्रवाई की है. 13 अगस्त की कथित बिजनेस एक्टिविटी के करीब 6 दिन बाद दोनों संस्थाओं पर कैपिटल मार्केट से प्रतिबंध लगाया गया.

SEBI ने JPMorgan की यूनिट पर कार्रवाई की है. Image Credit: JP Morgan

Highlights

  • SEBI ने JPMorgan की यूनिट और एक स्थानीय ब्रोकरेज पर कार्रवाई की.
  • 13 अगस्त की कथित ट्रेडिंग गतिविधि के सिर्फ 6 दिन बाद कार्रवाई हुई.
  • Closing Auction System में Sensex की कीमत प्रभावित करने का आरोप है.

SEBI ने जेपी मॉर्गन की एक यूनिट के खिलाफ कथित शेयर बाजार में हेरफेर के मामले में तेजी से कार्रवाई की है. SEBI ने कॉपथॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट लिमिटेड और स्थानीय ब्रोकरेज कंपनी मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड को कैपिटल मार्केट से प्रतिबंधित किया है. यह कार्रवाई कथित कारोबारी गतिविधि के सिर्फ 6 दिन बाद की गई. बाजार के जानकार इसे SEBI की ओर से कारोबारियों के लिए कड़ा संदेश मान रहे हैं. मामला नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम में सेंसेक्स की कीमत को प्रभावित करने की कोशिश से जुड़ा है.

जेपी मॉर्गन की यूनिट पर क्यों हुई कार्रवाई

SEBI के मुताबिक, कॉपथॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट लिमिटेड और मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड ने 13 अगस्त को क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम के दौरान ऐसे कारोबार किए, जिनसे बीएसई सेंसेक्स इंडेक्स कीसिम्बोलिक बैलेंस प्राइस प्रभावित हो सकती थी. रेगुलेटर का आरोप है कि इन कारोबारों से कुछ विकल्प सौदों को फायदा पहुंचाया गया. दोनों संस्थाओं पर बाजार में हेरफेर करने का आरोप लगाया गया है. SEBI ने दोनों को कैपिटल मार्केट से प्रतिबंधित किया है.

6 दिन में SEBI की कार्रवाई क्यों अहम

इस मामले में SEBI की तेजी को बाजार के लिए खास माना जा रहा है. कथित बिजनेस एक्टिविटी 13 अगस्त को हुई थी और अंतरिम आदेश 19 अगस्त को जारी किया गया. यानी रेगुलेटर ने करीब 6 दिन में कार्रवाई कर दी. पहले ऐसे मामलों में SEBI को कार्रवाई करने में काफी लंबा समय लग जाता था. मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि नए सिस्टम में किसी भी तरह की हेरफेर को शुरुआत में ही रोकने के लिए यह तेज कार्रवाई जरूरी थी.

क्या है क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम

क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम भारतीय शेयर बाजार के हालिया बडे़ बदलावों में से एक है. इसका उद्देश्य शेयरों के अंतिम भाव तय करने की प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित करना और इसे वैश्विक मानकों के करीब लाना है. इस सिस्टम में एक तय समय के दौरान खरीद और बिक्री के ऑर्डर के आधार पर संकेतात्मक बैलेंस प्राइस तय होती है. हाल में इस सिस्टम के दौरान कुछ शेयरों और इंडेक्स में अचानक उतार- चढाव देखने को मिला था. इसके बाद कारोबारियों की ओर से भी इस व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए थे.

जेपी मॉर्गन पर सीधा असर नहीं

SEBI की कार्रवाई में जेपी मॉर्गन की कॉपथॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट लिमिटेड यूनिट का नाम है. यह भारत में काम करने वाली जेपी मॉर्गन की लोकल यूनिट जे पी मॉर्गन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से अलग है. भारत में स्थानीय इकाई SEBI के साथ शेयर ब्रोकर और मर्चेंट बैंकर के रूप में रजिस्टर है. इसलिए कॉपथॉल मॉरीशस पर लगी रोक का भारत में जेपी मॉर्गन के सामान्य कारोबार पर सीधा असर नहीं पड़ता है. कार्रवाई मुख्य रूप से संबंधित कारोबारी गतिविधि और उससे जुड़ी संस्थाओं पर है.

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SEBI का कारोबारियों को साफ संदेश

इस कार्रवाई से SEBI ने नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम को लेकर अपनी सख्ती का संकेत दिया है. SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे पहले ही कह चुके हैं कि नया सिस्टम बना रहेगा, हालांकि जरूरत के मुताबिक इसमें बदलाव किए जा सकते हैं. मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि शुरुआत में सिस्टम से जुड़ी कुछ दिक्कतें आ सकती हैं.