BSE Share खरीदने का सही मौका या फंसने का खतरा? जानें एक्सपर्ट राय

BSE के शेयर में तीन महीने में करीब ₹30,000 करोड़ की मार्केट वैल्यू घट गई. नए Closing Auction Session, कमजोर इंडेक्स ऑप्शंस कारोबार और सख्त नियमों ने दबाव बढ़ाया है. निवेशकों के लिए अब सवाल है. गिरावट में खरीदारी करें या इंतजार?

BSE के शेयर

Highlights

  • BSE शेयर की मार्केट वैल्यू तीन महीनों में ₹30,000 करोड़ घटी
  • कमजोर ऑप्शंस कारोबार और नए CAS ने दबाव बढ़ाया है
  • सख्त बैंक गारंटी नियमों से कमाई पर असर पड़ा है

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE के शेयर ने पिछले दो साल में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया, लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है. पिछले तीन महीनों में BSE की मार्केट वैल्यू करीब ₹30,000 करोड़ घट गई है. शेयर पर एक साथ कई दबाव बढ़े हैं, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है.

तीन बड़ी चुनौतियों ने बढ़ाई परेशानी

BSE के शेयर पर दबाव की सबसे बड़ी वजह तीन घटनाएं बताई जा रही हैं. इनमें नया Closing Auction Session (CAS), इंडेक्स ऑप्शंस के कारोबार में कमी और ब्रोकरों के लिए बैंक गारंटी से जुड़े सख्त नियम शामिल हैं.

इन बदलावों का सीधा असर BSE के डेरिवेटिव कारोबार पर पड़ रहा है. खासकर Sensex ऑप्शंस से मिलने वाले कारोबार और कमाई को लेकर बाजार की उम्मीदें कमजोर हुई हैं. इसके चलते ब्रोकरेज कंपनियों ने BSE की भविष्य की कमाई के अनुमान में भी कटौती की है.

CAS से ऑप्शंस कारोबार पर असर

3 अगस्त 2026 से बाजार में नया Closing Auction Session लागू हुआ है. इसमें दिन के अंत में शेयरों की क्लोजिंग कीमत एक ऑक्शन प्रक्रिया के जरिए तय होती है. पहले कई शेयरों की क्लोजिंग कीमत अंतिम 30 मिनट के औसत भाव के आधार पर तय होती थी.

इस बदलाव का असर खासकर ऑप्शंस कारोबार पर पड़ा है. ब्रोकरेज फर्म Nuvama के मुताबिक, CAS के कारण एक्सपायरी के समय ऑप्शन प्रीमियम में होने वाली गिरावट पहले की तुलना में कम अनुमानित हो गई है. इससे कुछ शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग रणनीतियों पर असर पड़ा है.

Jefferies के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में अब तक BSE के ऑप्शंस कारोबार का औसत दैनिक प्रीमियम टर्नओवर जुलाई की तुलना में करीब 12% कम रहा है.

बैंक गारंटी नियम भी बना रहे दबाव

दूसरी बड़ी चुनौती RBI के बैंक गारंटी से जुड़े नियम हैं. इन नियमों से ब्रोकरों के लिए पूंजी की जरूरत बढ़ सकती है. इसका असर खासकर उन ट्रेडिंग रणनीतियों पर पड़ सकता है, जिनमें ज्यादा कारोबार और कम मार्जिन का इस्तेमाल होता है.

Jefferies का अनुमान है कि इन नियमों के कारण अगले साल BSE के प्रीमियम टर्नओवर में 10% तक कमी आ सकती है. Nuvama ने भी वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए BSE के EPS अनुमान में क्रमशः 6.3% और 15% की कटौती की है.

क्या BSE में वापसी की उम्मीद है?

BSE के लिए पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं है. अगर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ता है, CAS में लिक्विडिटी बेहतर होती है और ट्रेडर्स नए सिस्टम के साथ तेजी से तालमेल बैठाते हैं, तो ऑप्शंस कारोबार में फिर सुधार आ सकता है.

इसके अलावा BSE के पास फीस बढ़ाने का विकल्प भी है. Jefferies के अनुसार, ऑप्शंस फीस बढ़ाने से कंपनी की EPS में 6-7% तक और को-लोकेशन सुविधा की मैसेजिंग फीस बढ़ाने से मुनाफे में करीब 8% तक का फायदा हो सकता है.

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

BSE को लेकर ब्रोकरेज की राय फिलहाल मिली-जुली है. 18 एनालिस्ट्स में आधे से ज्यादा ने शेयर पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है और 12 महीने का औसत टारगेट मौजूदा स्तर से करीब 20% ऊपर बताया गया है. वहीं, Jefferies ने BSE को Underperform कर दिया है और टारगेट प्राइस ₹3,520 से घटाकर ₹2,940 कर दिया है. Nuvama ने भी रेटिंग घटाकर Hold कर दी और टारगेट ₹4,090 से घटाकर ₹3,240 किया है.

ऐसे में BSE शेयर में गिरावट के बाद आकर्षण जरूर बढ़ा है, लेकिन फिलहाल इसे बिना जोखिम वाला निवेश नहीं माना जा सकता. निवेशकों को ऑप्शंस वॉल्यूम, CAS के असर, नियामकीय बदलाव और कंपनी की कमाई में सुधार के संकेतों पर नजर रखनी चाहिए. यह खबर निवेश सलाह नहीं है.

यह भी पढ़ें- IT Stocks: Infosys और TCS पर Kotak हुआ सतर्क, LTIMindtree को Sell रेटिंग; इन IT शेयरों पर जताया भरोसा