धनतेरस और दिवाली से पहले क्या सस्ता होगा सोना, क्यों मिल रहे हैं गिरावट के संकेत? एक्सपर्ट्स से समझें पूरी बात
Gold Price Outlook: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई की चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं. इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले से यह तय हो सकता है कि कीमती धातुओं की कीमतें स्थिर होंगी या उनमें और गिरावट आएगी. शुक्रवार को सोने की कीमत कुछ समय के लिए 3,989 अमेरिकी डॉलर तक गिर गई थी.

Gold Price Outlook: त्योहारी सीजन में देश में सोने की मांग बढ़ जाती है. धनतेरस और दिवाली के दौरान सोना खरीदना शुभ माना जाता है. त्योहारी सीजन के दौरान सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है. विश्लेषकों का कहना है कि इस हफ्ते सोने और चांदी को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई की चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं. इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले से यह तय हो सकता है कि कीमती धातुओं की कीमतें स्थिर होंगी या उनमें और गिरावट आएगी.
बॉन्ड यील्ड का असर
बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर के मजबूत होने से कीमती धातुएं पहले ही दबाव में हैं. अब सबकी नजरें 27-28 अक्टूबर को होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक और उसके चेयरमैन के बयानों पर टिकी हैं, जिनसे यह संकेत मिल सकता है कि क्या ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी.
पश्चिम एशिया संघर्ष महत्वपूर्ण
इसके साथ ही, यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसलों पर भी नजर रहेगी. साथ ही अमेरिका के ‘ड्यूरेबल गुड्स’ के ऑर्डर, उपभोक्ता विश्वास, व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) से जुड़ी महंगाई और तीसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों पर भी ध्यान रहेगा.
उन्होंने आगे कहा कि यूरोजोन में महंगाई के आंकड़े, अमेरिका के मध्यावधि चुनावों से जुड़े घटनाक्रम, रूस-यूक्रेन शांति वार्ता और पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष भी महत्वपूर्ण रहेंगे.
कब तक बना रहेगा कीमतों पर दबाव?
एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट (VP) जतिन त्रिवेदी ने कहा, ‘निकट भविष्य के लिए सतर्क रहने की जरूरत है. जब तक फेडरल रिजर्व की नीति को लेकर स्थिति साफ नहीं हो जाती, तब तक सोने पर दबाव बना रह सकता है. आने वाले फैसले से यह तय होगा कि कीमतें मौजूदा स्तर के आसपास स्थिर होती हैं या उनमें और गिरावट आती है.’
MCX पर सोने का भाव
घरेलू बाजारों में भी यह दबाव साफ दिखा. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी के लिए गोल्ड का फ्यूचर रेट पिछले हफ्ते 5,768 रुपये (लगभग 4 फीसदी) गिरकर 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए. चांदी में और भी बड़ी गिरावट देखने को मिली. यह 2 लाख रुपये के स्तर से नीचे आ गई और 15,087 रुपये (7.14 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 1.96 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई.
त्रिवेदी ने कहा, ‘इस हफ्ते सोने में गिरावट का सिलसिला जारी रहा. बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर पर बने रहने के कारण सोने पर दबाव रहा और MCX पर यह 3 फीसदी से अधिक गिरकर 1,42,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था.’
बिकवाली का दबाव
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर के मजबूत होने से कीमती धातुओं में सुधार की कोशिशें नाकाम रहीं, जिससे इन पर और बिकवाली का दबाव बनने का खतरा बना हुआ है. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दिसंबर डिलीवरी के लिए कॉमेक्स (Comex) गोल्ड फ्यूचर्स पिछले सप्ताह 173.2 अमेरिकी डॉलर या 4.14 फीसदी गिरकर 4,007.9 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ.
शुक्रवार को सोने की कीमत कुछ समय के लिए 3,989 अमेरिकी डॉलर तक गिर गई थी, लेकिन बाद में यह फिर से 4,000 अमेरिकी डॉलर के स्तर के ऊपर आ गई.
सिल्वर फ्यूचर्स 3.35 अमेरिकी डॉलर या लगभग 6 फीसदी गिरकर 53.95 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ.
कीमतों में कितनी गिरावट?
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च विभाग (EBG) के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, प्रणव मेर ने कहा, ‘गोल्ड फ्यूचर्स में गिरावट का दौर जारी रहा. वैश्विक स्तर पर सोने की कीमत 4,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गई और सप्ताह के अंत में इसमें 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.’
उन्होंने कहा कि चांदी में आई गिरावट औद्योगिक धातुओं और सोने में दिखी कमजोरी को दिखाती है. इसके साथ ही, ऊंची कीमतों के कारण उद्योगों द्वारा चांदी के विकल्पों की तलाश करने या इसके इस्तेमाल में कमी लाने से भी इसकी मांग कमजोर हुई है. मेर ने बताया कि ऊर्जा की बढ़ती लागत ने बुलियन (सोना-चांदी) पर दबाव और बढ़ा दिया है.
ब्रेंट क्रूड का भाव
ब्रेंट क्रूड 117 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बंद हुआ. इससे यह चिंता बढ़ गई है कि लगातार बनी हुई महंगाई के कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपनी मॉनिटरी पॉलिसी को और सख्त रख सकते हैं या ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकते हैं.
अमेरिकी फेड के फैसले पर नजर
त्रिवेदी ने कहा कि कीमतों में लगातार आ रही यह गिरावट यह भी दिखाती है कि ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों के प्रति निवेशक कितने संवेदनशील हो गए हैं. इसलिए, आने वाले सप्ताह में फेड (अमेरिकी केंद्रीय बैंक) की नीतिगत घोषणा और उसके चेयरमैन की टिप्पणी, बुलियन की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएगी.
त्रिवेदी ने आगे कहा, ‘अगर फेड का रुख सख्त रहता है – यानी ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश कम होती है या नीतियां और सख्त होने के संकेत मिलते हैं – तो इससे डॉलर मजबूत हो सकता है और यील्ड बढ़ सकती है, जिससे बुलियन पर और दबाव पड़ेगा. इसके विपरीत, अगर रुख थोड़ा नरम रहता है, तो इससे ‘शॉर्ट कवरिंग’ हो सकती है और कीमतों को कुछ राहत मिल सकती है.’
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