बिना गारंटी वाले लोन की ग्रोथ स्लो, गोल्ड लोन 4.4 गुना बढ़े; पोर्टफोलियो में दक्षिण भारत की 70 फीसदी हिस्सेदारी
इस तेजी से बढ़ोतरी ने पर्सनल लोन के स्ट्रक्चर को भी बदल दिया है. जुलाई 2024 में कुल पर्सनल लोन में गोल्ड लोन का हिस्सा सिर्फ 2.2 फीसदी था. पूरे देश में तेजी से विस्तार के बावजूद, गोल्ड-बैक्ड लोन मुख्य रूप से दक्षिण भारत में ही केंद्रित हैं.

पिछले दो वर्षों में गोल्ड लोन चार गुना से अधिक बढ़ गए हैं. इसकी वजह सोने की बढ़ती कीमतें और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नियमों में ढील है, जिससे उधार लेने वाले अपनी ज्वैलरी के बदले अधिक लोन ले सकते हैं. ये खासकर छोटे लोन के मामलों में अधिक है.
मनीकंट्रोल ने RBI के डेटा के अनुसार बताया कि गोल्ड ज्वैलरी के बदले लिए गए लोन जुलाई 2024 में 1.24 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर जुलाई 2026 में 4.4 गुना यानी 5.52 लाख करोड़ रुपये हो गए. जुलाई 2025 में बकाया राशि 2.06 लाख करोड़ रुपये थी.
बदल गया पर्सनल लोन का स्ट्रक्चर
इस तेजी से बढ़ोतरी ने पर्सनल लोन के स्ट्रक्चर को भी बदल दिया है. जुलाई 2024 में कुल पर्सनल लोन में गोल्ड लोन का हिस्सा सिर्फ 2.2 फीसदी था. जुलाई 2025 में यह हिस्सा दोगुने से ज्यादा होकर 4.8 फीसदी हो गया और जुलाई 2026 में और बढ़कर 7.7 फीसदी तक पहुंच गया.
इसके उलट, एजुकेशन, कंज्यूमर ड्यूरेबल और क्रेडिट-कार्ड लोन का कुल हिस्सा जुलाई 2024 में 7.7 फीसदी से घटकर एक साल बाद 7.4 फीसदी और जुलाई 2026 में और कम होकर 6.7 फीसदी रह गया.
दक्षिण भारत बना गोल्ड लोन का मुख्य केंद्र
पूरे देश में तेजी से विस्तार के बावजूद, गोल्ड-बैक्ड लोन मुख्य रूप से दक्षिण भारत में ही केंद्रित हैं. CRIF हाई मार्क की ‘हाउ इंडिया लेंड्स’ रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 तक तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल – इन पांच दक्षिणी राज्यों की कुल हिस्सेदारी बकाया गोल्ड-लोन पोर्टफोलियो में 70 फीसदी से ज्यादा थी.
अकेले तमिलनाडु की हिस्सेदारी पोर्टफोलियो में 30 फीसदी थी, इसके बाद आंध्र प्रदेश 15.9 फीसदी और कर्नाटक 10.2 फीसदी के साथ थे.
फैल रहा है ग्रोथ का दायरा
जून तक उत्तर प्रदेश का गोल्ड-लोन पोर्टफोलियो साल-दर-साल 122.8 फीसदी बढ़ा, जो CRIF द्वारा ट्रैक किए गए 10 सबसे बड़े राज्यों में सबसे ज्यादा है. पश्चिम बंगाल में 99.7 फीसदी और राजस्थान में 91.2 की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि गुजरात और तेलंगाना में 80.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई.
RBI के नियमों से मिला बढ़ावा
सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के अलावा, रेगुलेटरी बदलावों ने छोटे गोल्ड लोन को उधार लेने वालों के लिए ज्यादा आकर्षक बना दिया है. RBI के सोने और चांदी के कोलैटरल (गिरवी रखी जाने वाली संपत्ति) से जुड़े नए फ्रेमवर्क में कंजम्पशन लोन के लिए टियर्ड लोन-टू-वैल्यू (LTV) स्ट्रक्चर लागू किया गया है.
संशोधित नियमों के तहत, लेंडर (कर्ज देने वाले) कुल 2.5 लाख रुपये तक के लोन के लिए गिरवी रखे गए सोने की कीमत का 85 फीसदी तक लोन दे सकते हैं. 2.5 लाख रुपये से ज्यादा और 5 लाख रुपये तक के लोन के लिए यह सीमा 80 फीसदी है, जबकि 5 लाख रुपये से ज्यादा के लोन के लिए यह सीमा 75 फीसदी है.
PNB में अच्छी ग्रोथ
बैंकों ने भी इस सेगमेंट पर अपना फोकस बढ़ाया है. अगस्त में एक इंटरव्यू के दौरान पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के गोल्ड-लोन पोर्टफोलियो में तेजी से हुई बढ़ोतरी के बारे में पूछे जाने पर, PNB के MD और CEO अशोक चंद्रा ने कहा कि बैंक पहले इस बिजनेस में अपेक्षाकृत छोटा प्लेयर था. लेकिन RBI की साफ गाइडलाइंस ने बैंक को इस प्रोडक्ट को ज्यादा सक्रिय रूप से आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया है.
सिक्योर्ड लेंडिंग को मिल रही प्राथमिकता
यह बदलाव इसलिए भी आया है क्योंकि लेंडर अनसिक्योर्ड रिटेल मार्केट के कुछ हिस्सों को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं. क्रेडिट-कार्ड लोन और ज्यादातर कंज्यूमर लेंडिंग के उलट, गोल्ड लोन एक ऐसी एसेट (संपत्ति) से सुरक्षित होते हैं, जिसे डिफॉल्ट की स्थिति में लेंडर बेचकर पैसा वसूल सकते हैं.
इस सेगमेंट में एसेट क्वालिटी अपेक्षाकृत ठीक बनी हुई है. CRIF के डेटा से पता चलता है कि जून में गोल्ड-लोन पोर्टफोलियो में 31-90 दिनों तक ओवरड्यू (समय पर भुगतान न होने वाले) लोन का हिस्सा 0.9 फीसदी था, जबकि 0.3 फीसदी लोन 91-180 दिनों की कैटेगरी में थे और 0.2 फीसदी लोन 180 दिनों से अधिक समय से ओवरड्यू थे.