GST के 10 साल, अब AI से आसान होगी टैक्स प्रोसेस, तेजी से मिलेगा रिफंड; जानें सरकार का पूरा प्लान
GST के 10 साल पूरे होने के साथ सरकार अब टैक्स सिस्टम को AI और डिजिटल तकनीक के जरिये और आसान बनाने पर जोर दे रही है. इसका उद्देश्य टैक्स कंप्यायंस को सरल करना, रिफंड की प्रोसेस तेज करना और टैक्स चोरी पर रोक लगाना है. GST लागू होने के बाद रजिस्ट्रर टैक्सपेयर्स की संख्या 66.5 लाख से बढ़कर 1.6 करोड़ हो गई है.

GST 10 Years: देश में गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानी GST लागू हुए 10 साल पूरे होने जा रहे हैं. 1 जुलाई 2017 को लागू हुई इस टैक्स सिस्टम ने कई पुराने सेंट्रल और स्टेट टैक्सों की जगह एक समान टैक्स सिस्टम दिया. अब सरकार GST के अगले चरण पर काम कर रही है, जिसमें AI, डाटा शेयरिंग और डिजिटल तकनीक की मदद से टैक्स प्रोसेस को और आसान बनाया जाएगा. इसका उद्देश्य कारोबारियों का कंप्लायंस कॉस्ट कम करना, रिफंड तेजी से देना और टैक्स चोरी पर सख्ती करना है. खास तौर पर छोटे कारोबारियों और MSME को इसका सबसे अधिक फायदा मिलने की उम्मीद है.
GST ने बदली देश की टैक्स सिस्टम
GST लागू होने से पहले देश में कई तरह के केंद्रीय और राज्य टैक्स लागू थे. 1 जुलाई 2017 को इनकी जगह एक समान इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम लागू की गई. इस बदलाव का मकसद पूरे देश को एक समान बाजार बनाना और टैक्स पर टैक्स की सिस्टम खत्म करना था. सरकार का कहना है कि GST ने कारोबार करना आसान बनाया और टैक्स सिस्टम को अधिक ट्रांसपेरेंसी बनाया है.
AI और से आसान होगा कंप्लायंस
सरकार अब GST सिस्टम को और एडवांस बनाने पर जोर दे रही है. AI और डाटा एनालिटिक्स की मदद से रिस्क का आकलन किया जाएगा और टैक्स चोरी पर नजर रखी जाएगी. GST, इनकम और सीमा शुल्क के डाटा को आपस में जोड़ा जा रहा है. इससे मैनुअल जांच कम होगी, रिफंड जल्दी मिलेगा और कारोबारियों के लिए कंप्लायंस प्रोसेस पहले से अधिक आसान होगी.
टैक्स बेस और मजबूत हुआ रेवेन्यू
GST लागू होने के समय रजिस्ट्र टैक्सपेयर्स की संख्या करीब 66.5 लाख थी, जो अब बढ़कर करीब 1.6 करोड़ हो गई है. वित्त वर्ष 2025 26 में औसत मासिक GST कलेक्शन 1.85 लाख करोड़ रुपये रहा. पूरे वित्त वर्ष में ग्रोस GST कलेक्शन 22.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इससे साफ है कि देश में टैक्स कंप्लायंस और इकोसिस्टम लगातार मजबूत हुई है.
बदला टैक्स स्ट्रक्चर और सस्ती हुई कई चीजें
शुरुआत में GST में 5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी की चार टैक्स दरें थीं. बाद में सिस्टम को आसान बनाने के लिए सितंबर 2025 से दो प्रमुख टैक्स स्लैब लागू किए गए. अब जरूरी सामान पर 5 फीसदी और अधिकतर गुड्स और सर्विस पर 18 फीसदी टैक्स लगता है. वहीं लग्जरी और हानिकारक वस्तुओं के लिए 40 फीसदी की अलग दर रखी गई है. इससे कई सामान की कीमतों में कमी आई है.
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आगे भी सुधार की उम्मीद
जानकारों का मानना है कि GST ने कारोबार को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. अब AI बेस्ट कंप्लायंस, विवादों में कमी, टैक्स दरों का और सरलीकरण और पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया पर काम करने की जरूरत है. सरकार भी टैक्स प्रशासन को और आसान, तेज और टैक्सपेयर्स के अनुकूल बनाने की दिशा में लगातार सुधार कर रही है.