US-Iran में फिर छिड़ी जंग, निवेशकों की बढ़ी चिंता; ये 5 फैक्टर सोमवार को तय करेंगे बाजार की चाल
यूएस-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है. सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर यूएस-ईरान जंग, क्रुड ऑयल की कीमतें, इंडिया-यूएस ट्रेड डील, एफआईआई और डीआईआई की गतिविधियां तथा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों का बड़ा असर देखने को मिल सकता है. अगर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है और क्रुड ऑयल महंगा होता है, तो बाजार पर दबाव बन सकता है.
Indian Stock Marke: सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत वैश्विक घटनाक्रमों के बीच होने जा रही है. पिछले सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी ने सीमित बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया था, लेकिन अब निवेशकों की नजर पांच बड़े फैक्टर्स पर टिकी हुई है. इनमें सबसे अहम अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है, जिसने एक बार फिर वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है. इसके अलावा इंडिया-यूएस ट्रेड डील, क्रूड ऑयल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और रुपये की चाल भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी.
यूएस-ईरान तनाव ने बढ़ाई बाजार की चिंता
सप्ताह की शुरुआत में सबसे बड़ा ट्रिगर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव रहेगा. अमेरिकी सेना ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं. अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट के पास एक कारोबारी जहाज पर हुए ड्रोन हमले के जवाब में की गई.
इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि यदि वह सीजफायर समझौते का उल्लंघन जारी रखता है, तो अमेरिका और कड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है. इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन को फिर बढ़ा दिया है. यदि तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक शेयर बाजारों के साथ-साथ भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है.
क्रूड ऑयल की कीमतें रहेंगी सबसे बड़ा फैक्टर
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इम्पोर्टेड क्रूड ऑयल से पूरा करता है. इसलिए तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ता है. हालांकि, पिछले सप्ताह ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड में तेज गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन अगर यूएस-ईरान तनाव बढ़ता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल सप्लाई प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें फिर तेजी पकड़ सकती हैं. इससे महंगाई, आयात बिल और कंपनियों की लागत बढ़ने का जोखिम पैदा हो सकता है.
इंडिया-यूएस ट्रेड डील पर भी रहेगी नजर
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील भी इस सप्ताह बाजार के लिए अहम ट्रिगर होगी. हाल ही में दोनों देशों के बीच बातचीत का नया दौर पूरा हुआ है और संकेत मिले हैं कि समझौता अंतिम चरण में है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं. यदि इस दिशा में सकारात्मक प्रगति होती है, तो इसका असर बाजार की सेंटिमेंट पर भी देखने को मिल सकता है.
FII की खरीद-बिक्री तय करेगी बाजार का रुख
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार से करीब 2,080 करोड़ रुपये की निकासी की. इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने करीब 11,100 करोड़ रुपये का निवेश कर बाजार को सहारा दिया. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस सप्ताह FII की खरीदारी लौटती है, तो बाजार को मजबूती मिल सकती है. वहीं, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से बाजार पर दबाव बढ़ सकता है.
रुपये और अमेरिकी ब्याज दरों पर भी रहेगी नजर
भारतीय रुपया पिछले सप्ताह डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ. इसका मुख्य कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेश फ्लो में सुधार रहा. हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता अभी भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय है. अगर अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो विदेशी पूंजी उभरते बाजारों से निकल सकती है. इसका असर भारतीय शेयर बाजार और रुपये, दोनों पर देखने को मिल सकता है.
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